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भूमिपुत्र यतीन्द्र कश्यप ने मछली पालन से बदल दी किस्मत, कमा रहे हैं 90 लाख सालाना

समाज के असली नायक की सफलता की कहानी

yatindra kashyap
यतीन्द्र कश्यप (चित्र गूगल के सौजन्य से)
प्रेरणादायक खबर : मोतिहारी. बिहार के मोतिहारी जिले के संग्रामपुर गाँव के निवासी यतीन्द्र कश्यप आजकल सुर्ख़ियों में हैं. योर स्टोरी समेत देश के कई प्रमुख वेबसाइटों और समाचार पत्रों में उनकी सफलता की कहानी प्रकाशित हो चुकी है. यतीन्द्र कश्यप ने मछली पालन में सफलता की नयी कहानी लिखी है और मछलीपालन से 90 लाख सालाना तक कमा रहे हैं. 

दूसरे किसान जब गरीबी और खेती-किसानी की समस्या से त्रस्त हैं तब यतीन्द्र कश्यप की सफलता की कहानी प्रेरणादायक है. लेकिन ये सब इतना आसान नहीं था. पांच साल पहले जब वे मछलीपालन के क्षेत्र में उतरे तो पहले सफलता नहीं मिली. नुकसान भी उठाना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और नए तरीके से मछलीपालन की तकनीक की जानकारी हासिल कर उसे आजमाया और उसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 

भास्कर से बातचीत करते हुए वे कहते हैं - "4 साल पहले हेचरी का बिजनेस शुरू किया था। जिसमे दो साल तक जानकारी के अभाव में उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। कई स्पेशलिस्ट से मिलकर इस बिजनेस के बारीकियों को जानने के बाद आज उनकी इनकम अच्छी है। उनकी हेचरी से एक हैच में जितना मछली का बच्चा पैदा होता है उसका बाजार मूल्य तीन से पांच लाख रुपया होता है। जबकि महीने में वैसे पांच हैच कराए जाते हैं जो आमदनी के रूप में लगभग 20 लाख रुपया देता है। पूरे साल में इसकी डिमांड बाजार में छह महीने तक रहती है। वे 25 एकड़ में फैले तालाबों से 50 टन मछली पालन करते हैं। जो बाजार के हिसाब से लगभग 75 लाख रुपए इनकम कराता है।" 

गौरतलब है कि सरकार के द्वारा हेचरी और तालाब पर 50 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था की गई है. एक हेचरी लगाने में 12 से 15 लाख का खर्च आता है. शुरूआती दो साल महत्वपूर्ण होते हैं. लेकिन एक बार व्यवसाय स्थापित हो जाने के बाद पीछे मुड़कर देखने की जरुरत नहीं पड़ती.उनकी इस सफलता को देखकर आस-पास के किसान भी मछलीपालन को लेकर उत्सुक हो रहे हैं.

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