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अपने मूल लक्ष्य से भटकती भूमिहारों की युवा पीढ़ी

bhumihar youth

समीर कुमार, युवा विश्लेषक - 

पढ़ाई पर राजनीति भारी:

विभिन्न सोशस साइट्स तथा जमीनी स्तर पर भूमिहार युवाओं के कार्यकलाप का अध्ययन करने पर एक बात साफ पता चलती है कि युवाओं का ध्यान अपनी पढ़ाई, अपने कैरियर के बजाय राजनीति पर ज्यादा हो रहा है जिसे अपने समाज के लिए कतई ठीक नहीं कहा जा सकता। वस्तुस्थिति ये है कि भूमिहारों की नयी पीढ़ी जिस तरह से राजनीति की तरफ आकर्षित हो रही है वह सोचनीय विषय है।

दरअसल हर चीज का एक उपयुक्त समय होता है। राजनीति में भाग लेना बुरी बात नहीं है लेकिन पढ़ने-लिखने की उम्र में अपना सारा ध्यान अपने कैरियर पर देना चाहिए न कि भारतीय राजनीति, राजनेताओं और आरक्षण जैसी चीजों पर तर्क-कुतर्क करके अपना बहुमूल्य समय बर्बाद करना चाहिए।

एक समय ऐसा था जब बिहार जैसे भूमिहार बहुल्य राज्यों में छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक हर सरकारी और प्राइवेट नौकरी में भूमिहार ब्राह्मण का दबदबा था लेकिन वर्तमान परिदृश्य में हम पिछड़ते चले जा रहे हैं। अन्य पिछड़ी जातियाँ हमारे ही पैसों से पढ़कर हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रदर्शन कर रही हैं, हर छोटी-बड़ी पोस्ट पर उनकी संख्या बढ़ती जा रही है और हमारी संख्या कम होती जा रही है।

राजनीतिक टिप्पणियों से समय की बर्बादी : 

आखिर इसका कारण क्या है?इसका मूल कारण हमारा अध्ययन से दूर होना है। औसतन 5-6 घंटे हम राजनीति की फालतू बातों पर बहस में जाया कर देते हैं, कौन नेता अच्छा है और कौन बुरा है, कौन राजनीतिक दल अच्छा है और कौन बुरा है हम अपने हिसाब से इसका सटीक विश्लेषण करते हैं लेकिन हम अपना बहुमुल्य समय बर्बाद करके अंधकारमय होते भविष्य को नहीं देख पाते हैं। क्या किसी प्रतियोगी परीक्षा में हमसे मोदी, नितीश, राहुल, लालू, मुलायम और मायावती पर टिप्पणी करने को कहा जायेगा? यदि नहीं तो हम अपना समय इन राजनेताओं का विश्लेषण करने में क्यों जाया करें? हमारे अग्रज इन सबका विश्लेषण करने में सक्षम हैं अत: ये काम उन्हीं के लिए छोड़ देना चाहिए और हमें अपना समय गणित और अंग्रेजी के गूढ़ विषयों पर विश्लेषण करने में खपाना चाहिए।

पढ़ाई कीजिये, राजनीति छोड़िये : 

याद रखिए आप पीसीएस, आइएएस, शिक्षक, पत्रकार, वकील बनकर भी अपने समाज की सेवा कर सकते हैं उसके लिए आपका विधायक या मंत्री बनना जरूरी नहीं है। अगर हमने अपना ध्यान राजनीति से हटाकर पढ़ाई में नहीं लगाया तो समाज की निचली जातियाँ हमें दबा देंगी और इस स्थिती में हमारी धोबी के कुत्ते की स्थिती हो सकती है। अत: अपने समाज के सभी युवाओं को इस विषय पर जरूर सोचना चाहिए कि आखिर वो अपने कैरियर को किस दिशा की तरफ ले जा रहे हैं। (लेखक इंजीनियरिंग के छात्र हैं. उनसे sameerrai019@gmail.com के जरिए संपर्क किया जा सकता है)

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