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2G घोटाला : ये कैसा घोटाला जिसमें सभी आरोपी बरी ?

समाजद्रष्टा सह स्वतंत्र राजनैतिक विश्लेषक एवं ब्रम्हर्षि चिंतक राजीव कुमार 2 G घोटाला में आये विशेष न्यायलय के फैसले से काफीे दुखी हैं और इसे किसी भी देश के लोकतंत्र और न्यायपालिका के लिए अशुभ सन्देश मान रहे हैं ।पढ़िए उनका पूरा लेख : 

राजीव कुमार -

घोटाले पर घोटाला 

बात 2G घोटाला की करते हैं जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है । सवाल आरोपियों के बरी होने का नहीं है । सवाल है कि यदि घोटाला हुआ ही नहीं था तो इतना हो हल्ला क्यों मचा ? सवाल यह भी है कि जब सबकुछ ठीक ही था तो CAG ने किस बुनियाद पर इसे 176000 करोड़ का नुकसान बताया था ?CAG जैसी संस्था तो कदापि गलत नहीं बोल सकती । CAG ने जो कुछ भी कहा होगा वो निश्चित रूप से साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर ही कहा होगा । तो फिर भूल या चूक कहाँ हुई जो सभी के सभी आरोपी बरी कर दिए गए जैसे घोटाला हुआ ही नहीं ।जब सर्वोच्च न्यायालय ने 2012 में यह देखकर एवं मानकर कि नुकसान हुआ है और देश के खजाने को चूना लगा है , 122 टेलिकॉम लाइसेंस को रद्द कर दिया था तो फिर उसी मामले में निचली अदालत ने ये कैसा फैसला सुना दिया कि इस मामले में 7 वर्षों तक इन्तेजार करने के बाद भी कोई साक्ष्य मिला ही नहीं और कोई घोटाला हुआ ही नहीं।कुल मिलकर सूक्ष्मता से अध्ययन करने पर ये 2 G घोटाला पर आया न्यायालय का फैसला देश की लोकतान्त्रिक और न्यायिक दोनों प्रणाली एवं व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है । 

न्यायपालिका पर गंभीर सवालिया निशान

उक्त सारी बातों का निष्कर्ष ये है कि हाल में आये न्यायालय के कुछ फैसलों ने देश के लोकतंत्र और न्यायपालिका पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं । बात चाहे 2 G घोटाले की हो या हिट एंड रन केस की हो , इन दोनों ही हाई प्रोफाइल केस में कोर्ट के द्वारा दिए गए फैसले ने देश में सम्पूर्ण व्यवस्था के भ्रष्ट होने की पुष्टि कर दी है । अब भगवान बचाये इस देश और इसकी व्यवस्था को ।सचमुच कितना पटरी से उतर चुका है मेरा यह देश और इसकी पूरी व्यवस्था । मेरा तो इस देश की सारी व्यवस्था से भरोसा ही उठ गया है । मैं इसलिए ही व्यापक चुनाव सुधार की वकालत करता हूँ और फिलवक्त NOTA का पुरजोर पक्षधर भी हूँ ।
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