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Showing posts from December, 2017

युवाओं से ही सुधरेगी ब्रह्मऋषि समाज की दशा एवं दिशा

युवा शक्ति ही देश और समाज की दशा और दिशा बदलने में सक्षम है. बदलाव और क्रांति के वही वाहक बनते हैं. इसी मुद्दे पर ब्रह्मऋषि चिंतक 'राजीव कुमार' की प्रस्तुति -  युवा जोश और ब्रह्मऋषि समाज युवा का मतलब उर्जा और जहाँ ऊर्जा है वहीँ विकास है । ब्रह्मऋषि समाज में भी युवाओं का रुझान सोशल मीडिया के माध्यम से अपने समाज के विकास की ओर बढ़ा है । कुछ अवसरों पर तो युवाओं ने अपनी ऊर्जा और सूझबूझ का प्रयोग अपने समाज को सही दिशा और गति देने के लिए बखूबी किया है और अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाया है । 
युवाओं को बरगलाने वाले राजनीतिक जंतु युवाओं में भरे इस जोश और ऊर्जा तथा समाज के विकास के प्रति समर्पण का भाव देखकर काफी ख़ुशी की अनुभूति हो रही है । लेकिन साथ ही एक डर भी सता रहा है कि युवा तो ठहरे युवा । कहीं जोश में आकर वो होश न खो दें । उनमें जो जोश है उसको अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए इस्तेमाल करने के लिए कुछ अति महत्वाकांक्षी परिपक्व लोग भी जोर शोर से सक्रीय हो चुके हैं । उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा ही इन युवाओं की ऊर्जा और इनकी गति को गलत दिशा में ले जा सकती है जिससे इन युवाओं को …

एक राजा जो गरीबों के लिए फकीर बन गया - राजनारायण

गरीबों के मसीहा राजनारायण की पुण्यतिथि पर विशेष राजेंद्र राय, समाजवादी चिंतक-  गरीबों के मसीहा - 20वीं शताब्दी के लोक बंधु, उम्र 69 साल, जेल 80 बार, लोकनायक राजनारायण का जन्म अक्षय नवमी को 1917 में, उत्तर प्रदेश के उस जमींदार परिवार में हुआ था, जिसका संबंध काशी नरेश महाराजा बलवंत सिंह के राजघराने से जुड़ा माना जाता था. बहुतायत में जमीने, रसूख और रूतबा पर वह अलग मिट्टी के बने थे. समाजवाद में तपे और ढले हुए राजनारायण जी पर परिवार के नौकरों-चाकरों, गांव के गरीबों, कामगारों, मजदूरों, दलितों और पिछड़ों को हक दिलाने का ऐसा जुनून सवार था कि उन्होंने अपने हिस्से की सारी जमीन गरीबों को दान दे दी. परिवार में विरोध हुआ. भाइयों ने बुरा माना, पर वे टस से मस नहीं हुए. यहां तक कि अपने बेटों के लिए भी कोई संपत्ति नहीं रखी. 
संघर्ष की प्रतिमूर्ति - काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अपने छात्र जीवन से ही वह एक छात्र नेता के रूप में संपूर्ण उत्तर प्रदेश में जाने जाते थे. 'संघर्ष हमारा नारा है, यही हमारा सहारा है' उनकी जुबान पर छात्र जीवन से ही यह उद‍्घोष के रूप में निकलता रहता था. 1934 में जब …

गजल को क्रांति का रूप देने वाले दुष्यंत कुमार 'त्यागी' !

पुण्यतिथि पर विशेष : हिंदी के कवियों ने गजलकार के रूप में भी हाथ आजमाया है. लेकिन इन सबमें सबसे ज्यादा ख्याति जिन्हें मिली वे दुष्यंत कुमार 'त्यागी' ही थे. उस दौर में जब गजल इश्क-मोहब्बत के दरम्यान ही घूमा करती थी तब दुष्यंत कुमार ने अपने गजलों से क्रांति की आग को हवा दी. उनके द्वारा लिखी ये पंक्तियाँ जेपी आंदोलन के आंदोलनकारियों की जुबान पर उस वक़्त चढ़ गया था  - 
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,  इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।  आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,  शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए। 
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,  हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।  सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,  सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। 
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,  हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए। 
दुष्यंत कुमार का जन्म बिजनौर जनपद (उत्तर प्रदेश) के ग्राम राजपुर नवादा में 1 सितम्बर, 1933 को हुआ था और निधन 30 दिसम्बर सन 1975 में सिर्फ़ 42 वर्ष की अवस्था में हो गया. लेकिन इतने कम उम्र में ही उन्होंने जो ख्याति हासिल की, वो विरलो…

वामपंथियों के सामने राष्ट्रवादी क्यों पिछड़ते हैं?

चन्द्रकान्त प्रसाद सिंह-  पिछले 100 सालों से पूरी दुनिया की बौद्धिकता पर वामपंथ हावी रहा है जिसके मूल में सत्य-विरोधी नैरेटिव है जो नैतिकता के छद्मावरण में पेश होता है और एक की विफलता के लिए दूसरे की सफलता को जिम्मेदार बताकर पूरे समाज में काहिली को बढ़ावा देता है। इस तरह वह निजी उद्यम को नीची निगाह से देखता है और अंततः धनोपार्जक को उत्पीड़क तथा निर्धन को पीड़ित साबित कर ख़ुद को पीड़ित की आवाज़ घोषित कर देता है।   ●मनोविज्ञान बनाम अर्थशास्त्र  इस लिहाज से वामपंथ का अर्थशास्त्र से कम मनोविज्ञान से ज़्यादा गहरा रिश्ता है।कौन नहीं चाहेगा कि उसकी असफलताओं के लिए किसी और को जिम्मेदार ठहरा दिया जाए? राष्ट्रवादी इस वामपंथी छद्मावरण को डिकोड नहीं कर पाने के चलते वामी तर्कजाल में अक्सर उलझ जाते हैं। पूरे यूरोप-अमेरिका का यही हाल है। आज स्थिति यह है कि भारत समेत यूरोप-अमेरिका के ज्यादातर देशों में चुनावी जीत चाहे किसी भी पार्टी की हो, वैचारिक जीत वामियों की ही होती है। 
 ●वामपंथ और इस्लाम   उपरोक्त संदर्भ में वामपंथ के बीज इस्लाम में छिपे दिख जाते हैं क्योंकि वहाँ भी मुसलमानों की सबसे बड़ी समस्या काफ़िर (ग़ैरम…

अमेरिका से चलाते हैं डॉ. यज्ञानंद प्रसाद सिंह समाज के लिए पुस्तकालय

समाज के असली नायक : शिक्षा से बदलेगी समाज की तस्वीर मुजफ्फरपुर. दिल में देश-समाज के लिए कुछ करने की तमन्ना हो तो असंभव कुछ भी नहीं. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है भूमिपुत्र डॉ. यज्ञानंद प्रसाद सिंह ने. वे लंबे समय से अमेरिका में रहते हैं. लेकिन उनका हृदय अपनी माटी के लिए ही धड़कता रहता है. यही वजह है कि वे हर साल कुछ वक़्त के लिए मुजफ्फरपुर(बिहार) स्थित अपने पुश्तैनी गाँव रोहुआ आते हैं और गाँव-समाज के बीच अपना समय बिताते हैं. इसी आने-जाने के क्रम में उन्होंने ये महसूस किया कि गाँव में पढ़ाई-लिखाई का माहौल कमता जा रहा है. गाँव के युवाओं का रूझान नकरात्मक चीजों की तरफ ज्यादा बढ़ रहा है. इसलिए उन्होंने महसूस किया कि गाँव-समाज का माहौल बदलने के लिए एक ऐसी जगह होनी चाहिए जहाँ पढाई-लिखाई का माहौल हो, इसके लिए पुस्तकालय से बेहतर और क्या हो सकता था. बस फिर क्या था उन्होंने गाँव में एक पुस्तकालय खोलने का निर्णय ले लिया और वैद्यनाथ प्रसाद सिंह पुस्तकालय,रोहुआ का श्रीगणेश किया जो शहर से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. गौरतलब है कि वैद्यनाथ प्रसाद सिंह उनके पिता का नाम है और उनकी स्मृति में ही गाँव के पु…

2017 में सोशल मीडिया पर मजबूत हुआ ब्रह्मऋषि समाज

ब्रह्मऋषि चिंतक राजीव कुमार की नजरों में जाते हुए वर्ष 2017 की कुछ खास बातें :  कैसे 2017 वर्ष बीत गया ये हमलोगों को पता भी नहीं चला । जाते जाते इस वर्ष 2017 ने कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन के संकेत दिए ।जहाँ एक तरफ इस साल के शुरुआत में उत्तर प्रदेश और पंजाब के चुनाव ने किसानों के एकजुट होकर वोट करने और अपनी माँग को मनवाने हेतु चुनाव में अपनी माँग पर आधारित एकता दिखाई और नतीजा यह हुआ कि भाजपा जैसी शुद्ध व्यवसाइयों और उद्योगपतियों को समर्थित पार्टी को उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाने हेतु किसानों की कर्ज माफी की घोषणा चुनाव से पहले करनी पड़ी वहीँ कांग्रेस ने भी पंजाब चुनाव में किसानों के कर्जमाफी की बात कहकर उनकी सहानुभूति जमकर बटोरी । साल के अंत में भी ये सिलसिला जारी रहा और गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने किसानों की कर्जमाफी की बात कहकर उनकी सहानुभूति जमकर बटोरी और सरकार बनाने के करीब आकर उससे वंचित रह गए । 
कुलमिलाकर ये साल 2017 किसानों का साल रहा जिसमें सभी राजनीतिक दलों ने किसानों को रिझाने और उनकी दुखती रगों पर हाथ फेरकर उनकी सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया । इ…

मनोज सिन्हा ने किया लाइफ लाइन एक्सप्रेस का उदघाट्न, विश्व का पहला चलता-फिरता अस्पताल

गाजीपुर। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने गाजीपुर के साथ-साथ देश को एक नयी सौगात दी है। उन्होंने आज विश्व के पहले चलते-फिरते अस्पताल 'लाइफ लाइन एक्सप्रेस' का उदघाट्न किया। केंद्रीय मंत्री ने 'लाइफ लाइन एक्सप्रेस' के बारे में जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा -
"ग़ाज़ीपुर के सम्मानित नागरिकों को बेहतर और नि:शुल्क स्वास्थ्य  सुविधा उपलब्ध करवाने के क्रम में आज ग़ाजीपुर सिटी स्टेशन से आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाओं से युक्त 8 कोच वाली लाइफ लाइन एक्सप्रेस का उद्घाटन किया ।
गाजीपुर स्टेशन पर यह ट्रेन 18 जनवरी तक रहेगी। इसमें आंख, नाक, कान, दांत, कटे-फटे होठ, पोलियो, स्त्री रोग, मिर्गी, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज सहित कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की जांच और इलाज के साथ ऑपरेशन की भी सुविधा उपलब्ध है। इसमें विख्यात विशेषज्ञों और चिकित्सकों के द्वारा मरीजों की जांच और उनका इलाज नि:शुल्क होगा साथ ही मरीजों के लिए दवा और भोजन की भी मुफ्त व्यवस्था की गई है।
लाइफ़ लाइन एक्सप्रेस विश्व का पहला चलता-फिरता अस्पताल है जिसे लोग मैजिक ट्रेन के नाम से भी जानते हैं।

भूमिपुत्र यतीन्द्र कश्यप ने मछली पालन से बदल दी किस्मत, कमा रहे हैं 90 लाख सालाना

समाज के असली नायक की सफलता की कहानी प्रेरणादायक खबर : मोतिहारी. बिहार के मोतिहारी जिले के संग्रामपुर गाँव के निवासी यतीन्द्र कश्यप आजकल सुर्ख़ियों में हैं. योर स्टोरी समेत देश के कई प्रमुख वेबसाइटों और समाचार पत्रों में उनकी सफलता की कहानी प्रकाशित हो चुकी है. यतीन्द्र कश्यप ने मछली पालन में सफलता की नयी कहानी लिखी है और मछलीपालन से 90 लाख सालाना तक कमा रहे हैं. 
दूसरे किसान जब गरीबी और खेती-किसानी की समस्या से त्रस्त हैं तब यतीन्द्र कश्यप की सफलता की कहानी प्रेरणादायक है. लेकिन ये सब इतना आसान नहीं था. पांच साल पहले जब वे मछलीपालन के क्षेत्र में उतरे तो पहले सफलता नहीं मिली. नुकसान भी उठाना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और नए तरीके से मछलीपालन की तकनीक की जानकारी हासिल कर उसे आजमाया और उसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 
भास्कर से बातचीत करते हुए वे कहते हैं - "4 साल पहले हेचरी का बिजनेस शुरू किया था। जिसमे दो साल तक जानकारी के अभाव में उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा। कई स्पेशलिस्ट से मिलकर इस बिजनेस के बारीकियों को जानने के बाद आज उनकी इनकम अच्छी है। उनकी हेचरी से एक हैच में…

नव नालंदा विश्वविद्यालय के उपकुलपति बने भूमिपुत्र डॉ. श्रवण कुमार

समाज के असली नायक : डॉ. श्रवण कुमार  सूचना - भूमिपुत्र डॉ. श्रवण कुमार नित्य नयी ऊँचाइयों को छू रहे हैं. उसी की अगली कड़ी है उनका उप कुलपति बनना. उन्हें कल ही नव नालंदा विश्वविद्यालय के उपकुलपति पद का अतिरिक्त कार्यभार मिला है. वर्तमान में वे Joint Secretary, Ministry of Culture, Govt. Of India के पद पर काम कर रहे हैं. इसके पहले वे इनकम टैक्स विभाग में कमिश्नर के पद पर भी काम कर चुके हैं. वे मूलतः नवादा के रहने वाले हैं.

खास बात ये है कि इनकी पत्नी भी समाजसेवी हैं और क्षेत्र के विकास में अपना योगदान दे रही हैं. वे पूर्व जिला पार्षद सह पूर्व विधानसभा प्रत्याशी नवादा से रह चुकी हैं.

जॉइंट सेक्रेटरी के रूप में अपने पहले दिन की तस्वीर शेयर करते हुए डॉ.श्रवण कुमार लिखते हैं -
Change is the only constant in life. While we don't know what lies ahead, we continue to pursue the journey that we have set our course upon.... As I take away host of memories, good times, learnings and experiences from CFSI, I embark upon a new role as Joint Secretary, Ministry of Culture, Govt. Of India. I am hopef…

अपने मूल लक्ष्य से भटकती भूमिहारों की युवा पीढ़ी

समीर कुमार, युवा विश्लेषक - पढ़ाई पर राजनीति भारी:विभिन्न सोशस साइट्स तथा जमीनी स्तर पर भूमिहार युवाओं के कार्यकलाप का अध्ययन करने पर एक बात साफ पता चलती है कि युवाओं का ध्यान अपनी पढ़ाई, अपने कैरियर के बजाय राजनीति पर ज्यादा हो रहा है जिसे अपने समाज के लिए कतई ठीक नहीं कहा जा सकता। वस्तुस्थिति ये है कि भूमिहारों की नयी पीढ़ी जिस तरह से राजनीति की तरफ आकर्षित हो रही है वह सोचनीय विषय है।

दरअसल हर चीज का एक उपयुक्त समय होता है। राजनीति में भाग लेना बुरी बात नहीं है लेकिन पढ़ने-लिखने की उम्र में अपना सारा ध्यान अपने कैरियर पर देना चाहिए न कि भारतीय राजनीति, राजनेताओं और आरक्षण जैसी चीजों पर तर्क-कुतर्क करके अपना बहुमूल्य समय बर्बाद करना चाहिए।

एक समय ऐसा था जब बिहार जैसे भूमिहार बहुल्य राज्यों में छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक हर सरकारी और प्राइवेट नौकरी में भूमिहार ब्राह्मण का दबदबा था लेकिन वर्तमान परिदृश्य में हम पिछड़ते चले जा रहे हैं। अन्य पिछड़ी जातियाँ हमारे ही पैसों से पढ़कर हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रदर्शन कर रही हैं, हर छोटी-बड़ी पोस्ट पर उनकी संख्या बढ़ती जा रही है और हमारी सं…

2G घोटाला : ये कैसा घोटाला जिसमें सभी आरोपी बरी ?

समाजद्रष्टा सह स्वतंत्र राजनैतिक विश्लेषक एवं ब्रम्हर्षि चिंतक राजीव कुमार 2 G घोटाला में आये विशेष न्यायलय के फैसले से काफीे दुखी हैं और इसे किसी भी देश के लोकतंत्र और न्यायपालिका के लिए अशुभ सन्देश मान रहे हैं ।पढ़िए उनका पूरा लेख : राजीव कुमार -घोटाले पर घोटाला बात 2G घोटाला की करते हैं जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है । सवाल आरोपियों के बरी होने का नहीं है । सवाल है कि यदि घोटाला हुआ ही नहीं था तो इतना हो हल्ला क्यों मचा ? सवाल यह भी है कि जब सबकुछ ठीक ही था तो CAG ने किस बुनियाद पर इसे 176000 करोड़ का नुकसान बताया था ?CAG जैसी संस्था तो कदापि गलत नहीं बोल सकती । CAG ने जो कुछ भी कहा होगा वो निश्चित रूप से साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर ही कहा होगा । तो फिर भूल या चूक कहाँ हुई जो सभी के सभी आरोपी बरी कर दिए गए जैसे घोटाला हुआ ही नहीं ।जब सर्वोच्च न्यायालय ने 2012 में यह देखकर एवं मानकर कि नुकसान हुआ है और देश के खजाने को चूना लगा है , 122 टेलिकॉम लाइसेंस को रद्द कर दिया था तो फिर उसी मामले में निचली अदालत ने ये कैसा फैसला सुना दिया कि इस मामले में 7 वर्षों तक इन्तेजार करने…

जस्टिस काटजू ने उड़ाया था भूमिहारों का मजाक !

जस्टिस मार्कंडेय काटजू विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं. इस क्रम में वे बेसिर-पैर के बयान भी देते रहते हैं जो कई बार उनकी गरिमा को शोभा नहीं देता. ऐसा ही एक बयान उन्होंने भूमिहार ब्राह्मणों को लेकर भी दिया था.

पिछले साल जून के महीने में उन्होंने 'जोक्स एबाउट भूमिहार्स' करके फेसबुक पर कमेन्ट किया और भूमिहारों को शूद्र करार दिया. काटजू ने इसे मजाकिया लहजे में पेश करने की कोशिश की, लेकिन सवाल उठता कि पूर्व न्यायाधीश रह चुके व्यक्ति को किसी जाति को लेकर ऐसी टिप्पणी क्या शोभनीय है? वैसे सोशल मीडिया पर उनको करारा जवाब भी मिला और वे भर्त्सना के पात्र भी बने. पढ़िए उनका पूरा कमेन्ट -
Jokes about Bhumihars
Bhumihaars are a caste in north India, mainly in eastern U.P. and Bihar, who are mainly landholders.. They are said to be in between Brahmins and Rajputs. Some write their surnames as Pandey ( which is a typically Brahmin surname ), some as Singh ( which is often a Rajput surname ), and some other write other surnames.
There was a senior lawyer in Allahabad High Court named R.N.…

चाय का ठेला लगाकर पढ़ाई करने वाली आरती की मदद के लिए आगे आये मनोज सिन्हा

भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोज सिन्हा ज़मीनी नेता हैं. केन्द्रीय मंत्री बनने के बावजूद वे अबतक जड़, जमीन और जनता से जुड़े हुए हैं. यही वजह है कि अपने क्षेत्र की जनता की मदद के लिए वे सदैव तत्पर रहते हैं. इसी की नयी मिसाल है आरती. 
दरअसल आरती एक गरीब छात्रा है जो चाय का ठेला चलाकर बमुश्किल अपनी पढाई कर रही है. पढ़ाई के प्रति उसके इसी जूनून को देखते हुए मनोज सिन्हा ने उसे चालीस हजार की छात्रवृति देकर पढाई करने में मदद की. आरती के साथ अपनी तस्वीर शेयर करते हुए मनोज सिन्हा लिखते हैं - 
"आरती एक परिश्रमी और मेधावी छात्रा है जो एक चाय का ठेला लगा कर अपना एवं अपने परिवार का खर्चा चलाती है ।इसी चाय के ठेले से वह अपने दो भाइयों को भी पढ़ाती है और खुद भी पढ़ाई करती है । आरती की पढ़ाई के प्रति लगन और मेहनत को देखते हुए उसे 40,000 रुपये की छात्रवृति उपलब्ध करवाई है ताकि वह अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर सके । आज इस बच्ची की इच्छा के अनुरूप इसकी दुकान पर पहुँचा और उसे हौसले के साथ आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहित किया ।"
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लालू यादव की सजा को जातिगत रंग में रंगने की साजिश !

लालू यादव को चारा घोटाले के एक मामले में राँची की सीबीआई अदालत द्वारा दोषी करार दिये जाने के उपरांत उनकी पार्टी के नेता द्वारा इस फैसले पर विवादास्पद बयान दिया जाने को समाजद्रष्टा सह स्वतंत्र राजनैतिक विश्लेषक एवं ब्रम्हर्षि चिंतक " राजीव कुमार" एक नफरत फ़ैलाने वाला प्रायोजित कदम मान रहे हैं एवं इसकी तीव्र भर्त्सना कर रहे हैं तथा इसपर त्वरित संज्ञान लेने की आवश्यकता पर भी बल दे रहे हैं । एक त्वरित विश्लेषण -  लालू यादव को हुई सजा का दुष्प्रचार क्यों ? लालू यादव को राँची की सीबीआई अदालत द्वारा चारा घोटाले के एक मामले में दोषी करार दिये जाने के पश्चात् उनकी पार्टी के नेताओं द्वारा न्यायालय के आदेश पर विवादास्पद टिप्पणियाँ दी गई और न्यायालय के उक्त आदेश को एक अलग कोण देकर उसके माध्यम से देश और समाज में नफरत फ़ैलाने का प्रयास किया गया है जो कि सरासर गलत कदम है और इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए उतनी कम है । इस तरह की टिप्पणियाँ कहीं से और किसी भी दृष्टि से अच्छी नहीं कही जा सकती बल्कि इनको नफरत फ़ैलाने वाला एक प्रायोजित कदम मानकर उसपर त्वरित संज्ञान लिया जाना चाहिए ताकि आगे से ऐसी …

दलित बस्ती के गरीबों के बीच जाकर डॉ.सीपी ठाकुर ने मनाया जन्मदिन, देखिये तस्वीरें

भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता डॉ.सीपी ठाकुर का कल जन्मदिन था. इस मौके पर शहर के विभिन्न इलाकों में कार्यक्रम आयोजित किए गए. भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री अब्दुल रहमान खालिद कमाल के नेतृत्व में उनके आवास पर केक काटकर जन्मदिन मनाया गया. इस अवसर पर डॉ. ठाकुर ने जरूरतमंद बच्चों के बीच पाठ्य सामग्री बांटी. उन्होंने दानापुर (पटना) के शबरी नगर के दलित बस्ती में गरीब बच्चों के बीच पाठ्य सामग्री, वस्त्र एवम स्वच्छता सम्बंधित वस्तु वितरित किया. इसके अलावा आवास पर सादगी से पूजा व हवन का आयोजन भी किया गया. देखें तस्वीर -




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अंतर्जातीय विवाह की त्रासदी सुहैब इलियासी-अंजू मर्डर केस, सच्चाई जानेंगे तो चौंक जायेंगे

पत्नी अंजू की हत्या के मामले में सुहैब इलियासी दोषी,मिली उम्रकैद की सजा  खुलेपन के नाम पर अंतर्जातीय विवाह आम बात है. भूमिहार समाज भी इससे अछूता नहीं. लड़के और लड़कियां आधुनिकीकरण के नाम पर धर्म और जाति की दीवार को गिराकर अंतर्जातीय विवाह कर रहे हैं. लेकिन नासमझी और हड़बड़ी में की गयी ऐसी शादियों का हश्र कई बार बहुत भयानक होता है. उसी की बानगी पेश करता है अंजू मर्डर केस जिसमें 17साल के बाद कोर्ट का फैसला आया है और अंजू के पति सुहैब इलियासी को उम्र कैद की सजा का हुक्म कोर्ट ने दिया है. गौरतलब है कि अंजू इलियासी कभी अंजू सिंह हुआ करती थी और एक प्रतिष्ठित भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती थी.
सुहैब इलियासी और अंजू की कहानी - अंजू की मां रुकमा सिंह के मुताबिक़ सुहैब और अंजू की पहली मुलाकात 1989 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई थी. धीरे-धीरे दोनों अच्छे दोस्त बन गए और बात शादी तक जा पहुंची. अंजू के पिता डॉ. केपी सिंह को जब इस रिश्ते का पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया. लेकिन इसके बावजूद अंजू और सुहैब ने 1993 में लंदन जाकर स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर ली. इसके बाद अं…

वैवाहिक विवाद और भूमिहार समाज के संगठनों की मजबूरियां

उदय कुमार शर्मा - दो पीढ़ियों का टकराव -  बच्चा जबतक छोटा है तभी तक वह आपके साथ, आपके लिए, आपके पदचिन्हों पर, आपके बताये संस्कारों को लेकर चलता है। उस समय आपको भी और उसे खुब सुख भी मिलता है जब तक वह आत्मनिर्भर नहीं हो जाए !! लेकिन आपकी आत्मनिर्भरता से बच्चा जैसे ही बाहर निकलता है और बाहर की दुनिया में खुद के अस्तित्व देखता है, फिर महसूस करता है और समझता है कि वह घर से मिले पहले के सभी संस्कार, आचरण और अनुभवों को धिरे धिरे छोड़ते हुए /रखते हुए आगे बढ़ रहा है ऐसे में ही अब उसका अपना व्यक्तित्व /अस्तित्व की पहचान होने लगती है। और इस प्रकार मन ही मन में पहले चरण के अनुभव को आज के परिवेश में जो महसूस हो रहा है उन दोनों के बीच तुलना करता है और उस तुलनात्मक स्थिति को एक नाम देता है " Generation Gap " और यही वह शब्द है जहाँ उसे बड़ा होने का और बिना अविभावकों के सही गलत फैसले लेने का अधिकार दे देता है। अब उसके हर गलत सही फैसले में 10-20 फीसदी परिवार का और 80 फीसदी उसके अच्छे बुरे मित्रों का सहयोग / समर्थन रहता है जिसमें घर की रीति रिवाज,परंपरा, स्वभाव और संस्कार की अहमियत भी उसी औसत …

भूमिपुत्र विकास वैभव एशिया पोस्ट के सर्वश्रेष्ठ सुपर कॉप्स में शामिल

बहुमुखी प्रतिभा के धनी और वर्तमान में भागलपुर के डीआईजी विकास वैभव को फेम इंडिया पत्रिका और एशिया पोस्ट के एक सर्वे में 25 सुपर कॉप्स में शामिल किया गया है. गौरतलब है कि फेम इंडिया समय-समय पर ऐसे सर्वे करवाती रहती है. उसी कड़ी में ये सर्वे भी है. फेम इंडिया की रिपोर्ट - 
इंजीनियर बनते-बनते बन गए आपीएस अधिकारी -  2003 बैच के बिहार कैडर के आइपीएस अधिकारी विकास वैभव बिहार के बेगुसराय के रहने वाले हैं। विकास वैभव के पिता इंडियन ऑयल में नौकरी करते थे। विकास की प्रारंभिक शिक्षा बेगुसराय में हुई लेकिन बाद में इनके पिता का तबादला सिंदरी हो गया। विकास 8वीं तक की पढ़ाई सिंदरी में किए, इसके बाद पिता के साथ दिल्ली आ गए। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई दिल्ली से करने के बाद इंजिनीयरिंग परीक्षा की तैयारी में जुट गए। मेधावी छात्र होने के कारण विकास को कानपुर आईआईटी में एडमिशन मिल गया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते समय विकास के मन में बारबार एक सवाल आता था कि इंजीनियर बनके पैसे तो कमा लूंगा लेकिन समाज और देश के लिए भी कुछ योगदान होना चाहिए। यही छटपटाहाट विकास को सिविल सेवा की ओर आकर्षित किया। विकास जब इंजीनियरिं…

गिरिराज सिंह के जन्मदिन पर ये शायद केक ही कट रहा है?

बर्थडे पर केक काटने के खिलाफ गिरिराज सिंह केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अपने एक बयान में जन्मदिन पर केक काटने की खिलाफत की थी, लेकिन उनकी एक पुरानी तस्वीर सामने आ रही है जिसमें उनके जन्मदिन पर केक काटा जा रहा है. ये 2016 की तस्वीर है जिसे सुजीत कुमार नाम के उनके समर्थक ने अपलोड किया है. यदि वाकई में ये केक ही है तो उनके वर्तमान बयान से ये विरोधाभास पैदा करता है. देखिये तस्वीर -
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बर्थडे पर केक काटने के खिलाफ गिरिराज सिंह

औरंगाबाद. गिरिराज सिंह के निशाने पर अक्सर विपक्ष के नेता आते रहते हैं. लेकिन इस बार नेता की बजाए बर्थ डे केक आ गया है. उन्होंने जन्मदिन पर केक काटने के मुद्दे पर कहा कि हिन्दुओं को केक काटने की परंपरा छोड़ देनी चाहिए. उसकी बजाये उन्हें जन्मदिन पर मंदिर जाना चाहिए. भारतीय संस्कृति में केक काटने की कोई परंपरा नहीं है। यह खेदजनक है कि हम पश्चिमी संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि तथ्य यह है कि हमारी संस्कृति अपने आप में मजबूत है और पुरानी है।” उन्होंने कहा, "मैं आप सबसे यह शपथ लेने का अनुरोध करता हूं कि जन्मदिन मनाने के लिए आप मंदिर में जाकर पूजा करें." केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति ग्रामीण इलाकों में तेजी से खत्म हो रही है और यह चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि इन दिनों बच्चे अपनी मां को मां या मइया कहने के बजाय मम्मी कहने लगे हैं और पिता को बाबू जी और पिता जी कहने के बजाय पापा कहते हैं.
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राष्ट्रीय भूमिहार ब्राह्मण महासंघ का वार्षिक स्नेह सम्मेलन

मऊ- राष्ट्रीय भूमिहार ब्राह्मण महासंघ का वार्षिक स्नेह सम्मेलन एसआर प्लाजा भुजौटी में मनाया गया। इस दौरान स्वजातीय बंधुओं को उनके अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति एकजुट होने पर बल दिया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रवीण राय ने सरकार से आरक्षण को समाप्त करने की मांग किया। राघवेन्द्र राय शर्मा ने भूमिहारों को अपने अधिकारों को लेकर एकजुट होने का आह्वान करते हुए स्व. कल्पनाथ राय जी के द्वारा किये गए कार्यों की सराहना करते हुए उनके पदचिन्हों पर चलने की बात कही। कार्यक्रम को अन्य जनपदों से आये भूमिहार समाज के लोगों ने सम्बोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भागवत राय ने समाज में व्याप्त बुराइयों से समाज को सचेत किया।इस अवसर पर ग्राम प्रधान सहरोज योगेश राय , रामाशीष राय, सुमित राय, आनंद राय ,मनीष राय , पूर्व ब्लाक प्रमुख सर्वेश राय, अजीत राय रामाश्रय राय पूर्व प्रधान अभिषेक राय विकास राय बृजेश राय विवेक राय भूपत राय पूर्व प्रधान प्रधान कसारी संतोष राय प्रधान अमर हट प्रदुमन राय प्रधान ओज राय, दिवाकर राय आदि उपस्थित रहे। (हिन्दुस्तान से साभार) Community Journalism With Courage

गुजरात चुनाव में 'नोटा' का 'सोंटा'

NOTA की बढ़ती लोकप्रियता और इसकी महत्ता पर प्रकाश डाल रहे हैं ब्रम्हर्षि चिंतक 'राजीव कुमार'  -राजीव कुमार-  गुजरात विधानसभा चुनाव में NOTA को मिले तकरीबन 5.5 लाख वोट से बहुत ही उत्साहित हैं समाजद्रष्टा एवं स्वतंत्र राजनैतिक विश्लेषक राजीव कुमार और इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ और अभूतपूर्व सुधारवाद की ओर बढ़ता कदम मान रहे हैं । पढ़िए उनका पूरा लेख -

गुजरात का ऐतिहासिक चुनाव - हाल ही में सम्पन्न गुजरात के विधानसभा के चुनाव ऐतिहासिक रहे हैं । जी हाँ ऐतिहासिक । ऐतिहासिक इस दृष्टिकोण से कि चुनाव के नतीजों के निहितार्थ बहुत ही रोचक और समूचे देश एवं देश के राजनेताओं को एक जबरदस्त सन्देश देने वाले हैं । बात जब नतीजों की करते हैं तो जहां एक ओर सत्ताधारी दल भाजपा को जहां कुल 182 सीटों के लिए हुए चुनाव में 99 सीटें मिली तो देश की दूसरी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस को 80 सीटें । जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 115 और कांग्रेस को 61 सीटें मिली थी । इनदोनों चुनाव के नतीजों का जब हम गंभीर विश्लेषण करते हैं तो सबसे रोचक जो पहलू निकलकर सामने आ रहा है वो है दोनों पार्टियों भाजपा और कांग्र…

नये साल में समाज को नेता नहीं व्यवसायी चाहिए

रमण कुमार - हमें अनकहे नेता की जरूरत है जैसे किंग महेंद्र एवं संप्रदा बाबु हैं अरिस्टो एवं एलकेम दवा कंपनी के । लाखों रोजगार दिया इन्होंने । सबका भला हुआ है ,थोङा अधिक थोङा कम । मैंने भी किबाङ,खिङकी , चौखट, प्लाई ,लकङी की "अरमान डोर एवं प्लाई इंडस्ट्री " लगाई है तेघङा , बेगुसराय जिले में । रोजगार से मेरा भी और मेरे साथ ही अन्य लोगों का भी जीवन बदला है । हिम्मत करके ,मेहनत करके , जिस चीज का व्यवसाय करना हो , पहले वैसे ही व्यवसाय में नौकरी करें या जुङे फिर आपको अपनी व्यवसाय का हरेक पहलु पता होगा जैसा मेरे बङे भाई ने 20 साल गुजरात और महाराष्ट्र के विभिन्न प्लाई इंडस्ट्री में नीचे से उपर मैनेजर पोस्ट तक की नौकरी किया।उनकी इसी अनुभव और कौशल से सब संभव हो पाया । । नये साल में नेता नहीं हमें 100 सफल व्यवसाई मिल जाए तो बेहतर। कुछ भी बनाएं जिसका हरेक जगह इस्तेमाल एवं बिक्री होती हो । शैक्षणिक विकास खासकर तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण पर जोङ दिजिए । मार्केटिंग के गुर सीखे । मारवाड़ी समाज से यह गुण सीखने की जरूरत है। (लेखक के सोशल मीडिया वॉल से साभार) Community Journalism With Co…

'भूरा बाल साफ करो' के बयान से लालू यादव का इंकार !

पटना.लालू यादव ने अपने एक बयान में कहा है कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि भूरा बाल साफ़ करो. गौरतलब है कि 'भूरा बाल' का मतलब भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ समाज से है. पटना में आयोजित कुशवाहा सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बातें की. इस दौरान उन्होंने अपने विरोधियों को भी निशाने पर लिया और कहा कि सामंतवादियों ने गरीब पिछड़ों पर अत्याचार किया. हमारा कसूर बस इतना था कि हमने मंडल कमीशन का साथ दिया. Community Journalism With Courage

भूमिहार आरक्षण की मांग को लेकर बीस सवाल !

- विदेहश्री  आरक्षण की बात करने से पहले कुछ मूल बातों पर क्या जानकारी है उस पर भी विचार कर लें, इसके बिना आरक्षण पर बात करना भी बेमानी है
1. विश्व में भूमिहार ब्राह्मण की संख्या कितनी है?
2. यह संख्या पंचायत/ प्रखंड/ जिला/राज्य/देश स्तर पर कितनी है?
3. प्राप्त संख्या में कितने लोग कृषि आधारित जीविका में है?
4. कितने लोग सरकारी नौकरी में हैं?(सेना को मिलाकर)
5.कितने गैर सरकारी नौकरी में हैं?
6. कितने लोग स्वरोजगार में लिप्त है?
7. कितने लोग बेरोजगार है?
8. जो बेरोजगार है उसमें लोगों की शिक्षा का स्तर क्या है?
9. जो बेरोजगार हैं उसमें कितने टेक्निकल और कितने नॉन- टेक्निकल क्षेत्र से हैं?
10. कितने लोग स्नातक और स्नातकोत्तर हैं?
11. कितने लोग सिर्फ दसवी पास तक के हैं?
12. कितने लोग सिर्फ आठवी पास हैं?
13. कितने लोग अशिक्षित हैं?
14. वर्तमान में केंद्र सरकार के कितने कर्मचारी हैं?
15. वर्तमान में सभी राज्य सरकारों को मिला कर कितने कर्मचारी है?
16. भूमिहार बहुल राज्य, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड में सरकारी कर्मचारियों की संख्या कितनी है?
17. ऊपर इंगित राज्यों में कितनी रिक्तियां हर साल लगती है?
18. केंद्…

रवीश कुमार का तंज, क्या प्रधानमंत्री गिरिराज सिंह हो गए हैं?

“पाकिस्तान के रिटायर्ड आर्मी जनरल अरशद रफ़ीक़ कहते हैं कि सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। पाकिस्तान का वरिष्ठ आर्मी अफसर गुजरात चुनावों में अपना दिमाग़ क्यों लगाएगा? पाकिस्तान का एक डेलिगेशन मणिशंकर अय्यर के घर मिला था, अगर दिन उन्होंने गुजरात के समाज का अपमान किया, गरीबों और मोदी का अपमान किया। क्या ये बातें चिंता पैदा नहीं करती हैं, सवाल खड़े नहीं करते हैं, कांग्रेस को जवाब देना चाहिए” अख़बारों में छपा है कि बनासकांठा में प्रधानमंत्री ने ऐसा कहा है। प्रधानमंत्री अब गुजरात के सामने अहमद पटेल का भूत खड़ा कर रहे हैं। गुजरात की जनता को भय के भंवर में फंसा कर रखना चाहते हैं ताकि वह बुनियादी सवालों को छोड़ अहमद पटेल के नाम पर डर जाए। क्यों डरना चाहिए अहमद पटेल से? क्या इसी इस्तमाल के लिए राज्यसभा में अहमद पटेल को जीतने दिया गया? 
अहमद पटेल बार बार कह चुके हैं कि वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं, कांग्रेस ने भी ऐसा नहीं कहा है। क्या प्रधानमंत्री गुजरात की जनता को मुसलमान के नाम पर डरा रहे हैं? यह प्रधानमंत्री की तरफ से खेला गया सां…

श्रीबाबू के बहाने बिहार में भूमिहारों की नयी सियासत

पिछले तीन-चार सालों से बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जयंती भूमिहार नेतृत्व पर एक दूसरे नेताओं द्वारा रस्साकशी से लेकर धावा बोलने तक पहुंच जाती है. इस बार यानी 21 अक्टूबर को भी श्रीकृष्ण सिंह की जयंती मनायी गयी और फिर वैसा ही हुआ. दरअसल बिहार की राजनीति पर लगभग आधी सदी तक वर्चस्व कायम रखने वाले भूमिहार समाज के नेता श्रीकृष्ण सिंह की लिगेसी के बहाने जहां अपने-अपने नेतृत्व को स्थापित करना चाहते हैं, वहीं वह अपनी-अपनी पार्टियों में अपना वर्चस्व भी स्थापित करना चाहते हैं. ऐसा करने से जहां उन्हें अपनी राजनीति चमकाने का लाभ मिलता है, वहीं दूसरी तरफ श्री बाबू के कद को नुकसान भी पहुंचता है. इसी का परिणाम है कि एक समय तक बिहार के नेता रहे श्री बाबू को उनके ही समाज ने भूमिहारों के नेता के दायरे में कैद करके रख दिया है. बीते 21 अक्टूबर को श्री बाबू की जयंती पर दो संगठनों ने कार्यक्रम आयोजित किए. इसमें एक आयोजन कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह ने किया, जबकि दूसरा आयोजन पूर्व विधान पार्षद महाचंद्र प्रसाद सिंह ने किया. अखिलेश के आयोजन में लालू प्रसाद ने शिरकत की जबकि महाचंद्र प्रसाद के कार्…