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Showing posts from October, 2017

मोकामा के भूमंत्र संवाद से निकला राजनीति से दूर रहने का मंत्र

मोकामा. 'संवाद से समाज बदलेगा' की सोंच के तहत मुजफ्फरपुर के बाद मोकामा के परशुराम मंदिर में दूसरा भूमंत्र संवाद आयोजित किया गया. इसका नेतृत्व वरिष्ठ समाजसेवी प्रणव शेखर शाही और भूमंत्र के मॉडरेटर पुरुषोत्तम सिंह ने किया. संवाद लगभग दो घंटे चला जिसमें भू-समाज से जुडी कई सामजिक समस्याओं पर गहन मंथन हुआ. लेकिन निष्कर्ष के रूप में सर्वसम्मति से ये बात सामने आयी कि भूमंत्र को राजनीति से दूर रखा जाए. साथ ही ये राय भी बनी कि आलोचनात्मक दृष्टिकोण के साथ सामाजिक उत्थान संभव नहीं. इसलिए सकरात्मक पहलुओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाए. क्योंकि समाज को जोड़ने का काम सकरात्मक तरीके से ही हो सकता है. अंत में भूमंत्र के मॉडरेटर पुरुषोत्तम सिंह को परशुराम मंदिर में होने वाले यज्ञ पर आने का आमंत्रण भी मिला. Community Journalism With Courage

श्रीबाबू के मुद्दे पर पटना के पत्रकार ने लालू और दूसरे नेताओं को कर दिया पानी-पानी

बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ.श्रीकृष्ण सिंह की जयंती 21 अक्टूबर को पूरे बिहार में जगह-जगह मनाई गई।लेकिन सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस के नेता अखिलेश प्रसाद सिंह द्वारा आयोजित कार्यक्रम पर हुई।इसकी वजह लालू को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाना रहा।बहरहाल लालू आये, मगर श्रीबाबू जयंती को छोड़कर राजनीतिक मुद्दों पर बोलते हुए मंच को राजनीतिक अखाड़े के रूप में तब्दील कर दिया। इसी मुद्दे पर पटना के एक पत्रकार 'सुरेंद्र किशोर' ने अपने फेसबुक वॉल पर तंज कसते हुए लिखा -

हमारे जागरूक फेसबुक मित्र अनिल सिंहा ने आज लिखा है कि पटना में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि ,श्री बाबू पर कुछ कहने के बजाए अपने विरोधियों के खिलाफ बोलने में ही लगे रहे। अनिल जी ने ठीक ही कहा।पर क्या कीजिएगा ! आजकल ऐसे अवसरों पर ऐसा ही होता है।

सिद्धांतवादी स्वतंत्रता सेनानियों की जयंती मनाने का उद्देश्य ही कुछ दूसरा होता है। गांधी युग के वैसे महा पुरूषों के बारे में आज के अवसरवादी नेता आखिर बोलंे तो बोलें क्या ? यह तो बोल नहीं सकते कि श्रीबाबू ने अपने पुत्र को अपने जीवन काल में विधायक तक नहीं बनने दिया तो मैं भी उनके ही रा…

श्रीबाबू के मंच पर लालू यादव की बैठने की हैसियत नहीं

उदय कुमार शर्मा-
संदर्भ - श्रीबाबू के मंच पर लालू यादव मित्रों, भू मंत्रा के प्रश्न के सापेक्ष में, यह बिल्कुल सत्य है कि 90 के दशक के पूर्व का इतिहास में ऐसा कोई वाक्या नहीं है या कोई उदाहरण नहीं है कि भूमिहार ब्राह्मणों से अहिरों के बीच दुश्मनी का भाव रहा है। हम सभी अहिरों द्वारा किये गये खेतों में कार्य पर दलितों से ज्यादा भरोसा करते थे। लालू ने अपने राजनीति में भूमिहार ब्राह्मण के कुछ नेताओं से मित्रवत व्यवहार भी रखा लेकिन जब लालू ने जगन्नाथ मिश्रा को राजनीति के चौसर पर पटकनी देना शुरू किया तो मिश्रा ने ही भूमिहार ब्राह्मण नेताओं को आगे कर लालू के लिए कांटे बोए और यही वह Turning Point है जब अहिरों के मन मस्तिष्क पर भूमिहार ब्राह्मणों की दूश्मनी छा गई । यह भी सत्य है कि उस समय की राजनीति को भूमिहार ब्राह्मण नेताओं ने बिना समझे, वोट प्रतिशत का बिना आंकलन किए,समाज को बिना संगठित किए लालू विरोध की राजनीति की धुरी बन गये। जबकि लालू को याचक ब्राह्मणों, राजपूतों एवं लालाओं ने विरोध तो किया लेकिन दूशमनी के भाव से नहीं। और यही भूमिहार ब्राह्मण नेताओं से चुक हुई …

मुज़फ़्फ़रपुर में पहले 'भूमंत्र संवाद' का सफल आयोजन, मोकामा और बनारस में अगला आयोजन

मुज़फ़्फ़रपुर।। संवाद से समाज बदलता है और संवादहीनता से समाज का बिखराव होता है।। इसी सोंच के तहत मुज़फ़्फ़रपुर के एतिहासिक लंगट सिंह कॉलेज में रविवार 15 अक्टूबर को भूमंत्र संवाद का आयोजन किया गया जिसमें स्थानीय भू-बंधुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कार्यक्रम को सफल बनाया।। गौरतलब है कि सोशल मीडिया से इतर 'भूमंत्र' की यह पहली बैठक थी।। देखिये तस्वीरें - 










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