Skip to main content

भूमिपुत्र कवि कुमार नहीं रहे, इंडियाबुल्स के थे फाउंडर मेंबर, दो फिल्मों का भी किया था निर्माण

kavee kumar
कवि कुमार
दिल्ली. भूमिहार समाज के लिए एक बुरी खबर है. भूमिपुत्र कवि कुमार नहीं रहे. कैंसर से जूझते हुए 7अगस्त को सुबह पांच बजे वे चीर निंद्रा में लीन हो गए.अंतिम संस्कार के लिए उन्हें दिल्ली से सीतामढ़ी उनके पैतृक गाँव 'पकड़ी' ले जाया गया. अभी वे महज 50 वर्ष के ही थे. उनकी पहचान वित्तीय विशेषज्ञ की थी. फायनेंसियल मार्केट की दुनिया में उनका बड़ा नाम था.देश के चोटी के शेयर मार्केट जानकारों में उनकी गणना की जाती थी. वे कुछ समय पूर्व तक ग्लोबल कैपिटल के कंट्री हेड थे. वे इंडियाबुल्स के फाउंडर मेंबर से एक थे. उसे कामयाब बनाने के बाद इंडियाबुल्स से अपनी हिस्सेदारी ले निकल गए थे. बतौर विशेषज्ञ टीवी पर हिंदी में वित्तीय बाज़ार की बात करने वाले शुरआती लोगों में से वे एक थे. 

kavee kumar
मनोज सिन्हा के साथ कवि कुमार (बीच में)
लेकिन उनकी एक और पहचान थी. उन्होंने अपने जीवनकाल में हिंदी और भोजपुरी की एक-एक फिल्म भी बनायी. बॉक्स ऑफिस पर फारुख शेख अभिनीत उनकी फिल्म क्लब60 की फिल्म समीक्षकों ने खूब सराहा. वे इस फिल्म के निर्माता थे. इसके अलावा दर्जनों डाक्यूमेंट्री और टीवी एपिसोड के भी वे निर्माता रहे. खेती-किसानी को लेकर उनमें गहरी दिलचस्पी थी. डेयरी प्रोजेक्ट को लेकर भी उन्होंने सीतामढ़ी के अपने गाँव में प्रयोग किया. 

kavee kumar
फारुख शेख के साथ कवि कुमार
प्रयोगधर्मिता उनके स्वभाव की विशेषता था.कैंसर भी उनके प्रयोगधर्मिता को रोक नहीं पाया.जाते-जाते भी उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में प्रयोग किया और देश का पहला सर्टिफाइड आयुर्वेद डाक्टरों का प्लेटफोर्म निरोगस्ट्रीट.कॉम लॉन्च किया. इसे देश के पहले योग और आयुर्वेद फेस्टिवल 'ओज फेस्टिवल' के दौरान लॉन्च किया गया.इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा आए थे. 

कवि कुमार हंसमुख,मृदुभाषी और जिंदादिल इंसान थे. उनके आकस्मिक निधन से भू-समाज को गहरी क्षति पहुंची जिसकी भरपाई जल्दी संभव नहीं. नमन.

Community Journalism With Courage

Comments

Popular posts from this blog

अंतर्जातीय विवाह की त्रासदी सुहैब इलियासी-अंजू मर्डर केस, सच्चाई जानेंगे तो चौंक जायेंगे

पत्नी अंजू की हत्या के मामले में सुहैब इलियासी दोषी,मिली उम्रकैद की सजा  खुलेपन के नाम पर अंतर्जातीय विवाह आम बात है. भूमिहार समाज भी इससे अछूता नहीं. लड़के और लड़कियां आधुनिकीकरण के नाम पर धर्म और जाति की दीवार को गिराकर अंतर्जातीय विवाह कर रहे हैं. लेकिन नासमझी और हड़बड़ी में की गयी ऐसी शादियों का हश्र कई बार बहुत भयानक होता है. उसी की बानगी पेश करता है अंजू मर्डर केस जिसमें 17साल के बाद कोर्ट का फैसला आया है और अंजू के पति सुहैब इलियासी को उम्र कैद की सजा का हुक्म कोर्ट ने दिया है. गौरतलब है कि अंजू इलियासी कभी अंजू सिंह हुआ करती थी और एक प्रतिष्ठित भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती थी.
सुहैब इलियासी और अंजू की कहानी - अंजू की मां रुकमा सिंह के मुताबिक़ सुहैब और अंजू की पहली मुलाकात 1989 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई थी. धीरे-धीरे दोनों अच्छे दोस्त बन गए और बात शादी तक जा पहुंची. अंजू के पिता डॉ. केपी सिंह को जब इस रिश्ते का पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया. लेकिन इसके बावजूद अंजू और सुहैब ने 1993 में लंदन जाकर स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर ली. इसके बाद अं…

पिताजी के निधन पर गमगीन कन्हैया के चेहरे का नूर !

सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन तस्वीर है कि यकीन करने पर मजबूर करती है. आपको जैसा कि पता ही है कि छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आए कन्हैया के पिता का निधन हो गया था. इस दौरान उनकी तस्वीर भी न्यूज़ मीडिया में आयी थी जिसमें कि वे फूट-फूट कर रो रहे थे. समर्थक और विरोधी सबने दुःख की घड़ी में दुआ की और एक अच्छे इंसान की भी यही निशानी है कि वो ऐसे वक्त पर ऐसी ही संवेदना दिखाए.

बेगूसराय की इस भूमिपुत्री ने 18 साल की उम्र में कर दिया कमाल, पढेंगे तो इस बिटिया पर आपको भी होगा नाज!

प्रेरणादायक खबर : बेटियों पर नाज कीजिए, उन्हें यह खबर पढाईए
बेगूसराय. प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती. बेगूसराय के बिहटा की भूमिपुत्री प्रियंका ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. 18 साल की उम्र में प्रियंका इसरो की वैज्ञानिक बन गयी हैं. आप सोंच रहे होंगे कि वे किसी धनाढ्य और स्थापित परिवार से संबद्ध रखती हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके पिता राजीव कुमार सिंह रेलवे में गार्ड की नौकरी करते हैं और मां प्रतिभा कुमारी शिक्षिका हैं. वे बिहटा के एक साधारण भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इस मायने में उनकी सफलता उल्लेखनीय है.  पढाई-लिखाई :  1-दसवी और 12वीं : वर्ष 2006 में 'डीएवी एचएफसी' से दसवीं और वर्ष 2008 में 12वीं  2-बीटेक : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अगरतला  3-एमटेक : एमटेक की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी से पूरा कर रही हैं  सफलताएं :  1- वर्ष 2009 में एआईईई की परीक्षा में 22419वां रैंक  2- वर्ष 2016 में गेट की परीक्षा में 1604वां रैंक  3- शोध पत्र 'वायरलेस इसीजी इन इंटरनेशनल' जर्नल ऑफ रिसर्च एंड साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग म…