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अलका राय को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश

गाजीपुर: मोहम्मदाबाद सीट पर लंबे समय से कुख्यात माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के परिवार का कब्ज़ा था. लेकिन इस बार यूपी विधानसभा के चुनाव में अलका राय ने सिबगतुल्लाह अंसारी को 30,000 के बड़े अंतर से शिकस्त देकर भू-पताका लहरा दिया. इससे अलका राय की लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ है जिससे विरोधियों में बेचैनी है. इसलिए उनके खिलाफ अब षड्यंत्र रचा जाने लगा है. उसी कड़ी में स्वतंत्रता दिवस पर उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर गलत तरीके से वायरल कराने की कोशिश की गयी जिसमें बताया गया अलका राय ने तिरंगे का अपमान किया है. साजिशकर्ताओं ने ये कहकर तस्वीर साझा की कि अलका राय ने तिरंगे पर पैर रखा है. लेकिन स्थानीय साईट 'ग़ाज़ीपुर खबर लाइव' की टीम ने पड़ताल की तो पाया कि जिसे तिरंगा बताकर प्रचारित किया जा रहा था वो तिरंगा नहीं, बल्कि रंगोली था जिसे कार्यालय प्रभारी अंकित राय द्वारा बनाया गया गया था.उसी रंगोली पर विधायक अलका राय ने पैर रखा था. इसी मुद्दे पर विधायक के प्रतिनिधि आनंद राय मुन्ना ने कहा कि विधायक अलका राय को बदनाम करने की ये घिनौनी साजिश है. तस्वीर जो सोशल मीडिया पर फैलाई गयी -
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सेनारी नरसंहार को देख जब भगवान भी काँप गए,17 साल से बंद है मंदिर

मंदिर भगवान का घर होता है लेकिन उस मंदिर में जाकर कोई कुकृत्य करे तो भगवान भी नाराज़ हो जाते हैं और अपने द्वार बंद कर देते हैं. 
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सेनारी में 17 साल पहले गाँव के इसी मंदिर में चुन-चुनकर 34 भू-किसानों की हत्या एक के बाद एक कर हुई थी. ह्त्या का तरीका भी बेहद निर्मम और दिल दहलाने वाला था. 
सभी 34 लोगों की हत्या गला रेत कर गाँव के मंदिर के द्वार पर की गयी थी. तब से आज तक उस मंदिर के द्वार बंद हैं. गांव के लोगों ने इस मंदिर में पूजा पाठ करना बंद कर दिया है. 
ग्रामीणों के मुताबिक भगवान के द्वार पर लोगों की हत्या कर दी गई है. लिहाजा मंदिर में पूजा करने का क्या फायदा ? अब पिछले 17 सालों में यह मंदिर वीरान पड़ा हुआ है.