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Showing posts from August, 2017

अन्तर्जातीय विवाह के जरिए भू-समाज को खोखला करने की साजिश

अन्तर्जातीय विवाह दलित और एससी,एसटी की राजनीति करने वाले नेताओं के प्रमुख एजेंडे में से एक है.लेकिन सच्चाई ये है कि सवर्ण जाति को अन्तर्जातीय विवाह की बात कहने वाले फर्जी नेता खुद कभी किसी गरीब-गुरबे और दलित-वंचित की बेटी से ब्याह नहीं करते।।लालू चुन-चुनकर यादव दामाद लाते हैं।।अखिलेश यादव राजपूतानी से शादी करते हैं।।रामविलास पासवान.... लिस्ट लंबी है।। आखिर अन्तर्जातीय विवाह की बात करने वाले नेतागण खुद क्यों नहीं अन्तर्जातीय विवाह करते ? यदि करते भी हैं तो उनकी प्राथमिकता में सवर्ण ही क्यों होते हैं? क्योंकि सच्चाई ये है कि विवाह समाज की नींव को खोखला करता है. वर्णशंकर संताने जाति के प्रति समर्पित नहीं होती. दूसरी तरफ विजातियों का समाज में दखल बढ़ जाता है. इस मामले में पारसी समुदाय से सीख लेने की जरुरत है. पारसी समुदाय में अंतर्जातीय विवाह करने पर बिरादरी से बाहर कर दिया जाता है.यदि अन्तर्जातीय विवाह की स्थिति बनती भी है तो सवर्ण को सवर्ण से विवाह करना चाहिए. शास्त्र भी इसकी इजाजत देते हैं और वेद-पुराण में ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें बाह्मण और क्षत्रियों के विवाह के उदाहरण है. इसलिए अन्त…

आत्मघाती होगा भूमिहार आरक्षण की मांग, हंसी के पात्र बनेंगे सो अलग

आरक्षण लागू किए हुए भले कई दशक बीत गए हो, लेकिन आरक्षण की राजनीति अब भी जोर-शोर से चल रही है. आरक्षण वाले और अधिक आरक्षण मांग रहे हैं तो जनरल कैटगरी वाले जातिगत आरक्षण का विरोध कर रहे हैं. बहुत बड़ा तबका जातिगत आरक्षण की बजाए आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग कर रहा है. लेकिन पिछले कुछ समय से अलग-अलग राज्यों में कुछ अगड़ी जातियों ने भी आरक्षण की मांग शुरू कर दी और कई जगहों पर इसे लेकर आंदोलन का गुबार भी उठ खड़ा हुआ. इनमें प्रमुख है जाट, पटेल और मराठा. इनकी देखा-देखी और नेताओं की नेतागिरी के चक्कर में कई और राज्यों की ऐसी अगड़ी जातियां भी आरक्षण की मांग करने लगी है जो अबतक जातिगत आरक्षण का विरोध कर रहे थे. अब ऐसी ही कुछ सुगबुगाहट बिहार में भी सुनाई दे रही है. भूमिहार ब्राह्मण समुदाय के कुछ भटके युवा अचानक से भूमिहार आरक्षण आंदोलन की मांग करने लग गए हैं. उनकी मांग है कि भूमिहार को भी आरक्षण मिलना चाहिए. हालाँकि भूमिहारों के किसी भी नेता ने इस आंदोलन को अबतक कोई समर्थन नहीं दिया है और न इसके समर्थन में कोई बयान दिया है. फिर भी एक ख़ास वर्ग इसे आंदोलन बनाने की मुहिम में लगा हुआ. वे ये नहीं सोंच र…

ऑपरेशन भूमिहार वाले अभिसार शर्मा ऑपरेशन राम-रहीम की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पाए?

न्यूज़ चैनलों के लिए बाबा राम-रहीम अब बलात्कारी बाबा-रहीम बन चुके हैं. सजा के बाद न्यूज़ चैनलों पर ताबड़तोड़ पैकेज चल रहे हैं और बताया जा रहा है कि राम-रहीम ने धर्म और अध्यात्म की आड़ में कितना घिनौना खेल - खेला. एबीपी न्यूज़ भी इसमें पीछे नहीं है. उसके एंकर अभिसार भी ज्ञान बांचने से पीछे नहीं हट रहे. लेकिन वे ये भूल जा रहे हैं कि थोड़े वक़्त पहले ही राम-रहीम की फिल्म और एमएसजी प्रोडक्ट को प्रोमोट करने में एबीपी न्यूज़ किस कदर बिछ गया था. एबीपी के न्यूज़रूम को राम-रहीम की तस्वीरों से पाट दिया गया था और आज बतकही करने वाले अभिसार शर्मा उस वक़्त न्यूज़रूम में राम-रहीम का इंटरव्यू ले रहे थे. राम-रहीम की अपराध की कहानी नयी नहीं है. मीडियावालों और पत्रकारों को भी पहले से पता है. निश्चित रूप से एबीपी और अभिसार शर्मा को भी जरुर पता होगा. लेकिन ऑपरेशन भूमिहार वाले अभिसार और एबीपी न्यूज़ ऑपरेशन राम-रहीम करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए. जुटाते भी कैसे, यहाँ ऑपरेशन के लिए पैसे जो नहीं मिल रहे थे.इसलिए तो लोग कहते हैं #NewsDalalABP, Community Journalism With Courage

भूमिपुत्र डॉ.मनीष कुमार ने किया अद्भूत ब्रेन सर्जरी, जानेंगे तो रह जायेंगे हैरान

दिल्ली/गुरुग्राम – भू-समाज में एक से बढ़कर एक भूमिपुत्र हैं जो समय-समय पर अपनी प्रतिभा से दुनिया को आश्चर्य में डाल देते हैं. ऐसे ही भूमिपुत्र हैं डॉ.मनीष कुमार. वे देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन हैं जिन्होंने हाल में एक ऐसी ब्रेन सर्जरी की जो सुर्खियाँ बटोर रही है. इस सर्जरी की ख़ास बात ये रही कि मरीज को बिना बेहोश किए ही ऑपरेशन किया गया. इस दौरान मरीज और डॉक्टर के बीच संवाद भी होता रहा. पार्क अस्पताल गुरुग्राम (गुडगाँव) में 19 अगस्त 2017 को ये सर्जरी डा.मनीष कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुआ. उनका साथ विशेषज्ञ डाक्टरों की एक टीम ने दिया. इस अवेक क्रैनियोटोमी (रोगी के सजग रहते हुए उसके सिर की सर्जरी) द्वारा मिर्गी के एक रोगी का इलाज कर उसे अपाहिज होने से बचाया गया. 
दरअसल 42 वर्ष की उम्र का कंपनी में काम करने वाला एक मजदूर 2014 से मिर्गी के दौरों से पीड़ित था. जांच से उसके दिमाग के बाईं भाग में एक गाँठ के होनी और बढ़ते जाने की पुष्टि हुई थी. इस गाँठ के और बढ़ने की संभावना थी. यह गाँठ बढ़ते-बढ़ते दिमाग के उस जगह पंहुंचने वाला था जहाँ से रोगी का दाहिना हाथ और आवाज (बात - चीत) का नियंत्रण होता ह…

भूमिपुत्र कवि कुमार नहीं रहे, इंडियाबुल्स के थे फाउंडर मेंबर, दो फिल्मों का भी किया था निर्माण

दिल्ली. भूमिहार समाज के लिए एक बुरी खबर है. भूमिपुत्र कवि कुमार नहीं रहे. कैंसर से जूझते हुए 7अगस्त को सुबह पांच बजे वे चीर निंद्रा में लीन हो गए.अंतिम संस्कार के लिए उन्हें दिल्ली से सीतामढ़ी उनके पैतृक गाँव 'पकड़ी' ले जाया गया. अभी वे महज 50 वर्ष के ही थे. उनकी पहचान वित्तीय विशेषज्ञ की थी. फायनेंसियल मार्केट की दुनिया में उनका बड़ा नाम था.देश के चोटी के शेयर मार्केट जानकारों में उनकी गणना की जाती थी. वे कुछ समय पूर्व तक ग्लोबल कैपिटल के कंट्री हेड थे. वे इंडियाबुल्स के फाउंडर मेंबर से एक थे. उसे कामयाब बनाने के बाद इंडियाबुल्स से अपनी हिस्सेदारी ले निकल गए थे. बतौर विशेषज्ञ टीवी पर हिंदी में वित्तीय बाज़ार की बात करने वाले शुरआती लोगों में से वे एक थे. 
लेकिन उनकी एक और पहचान थी. उन्होंने अपने जीवनकाल में हिंदी और भोजपुरी की एक-एक फिल्म भी बनायी. बॉक्स ऑफिस पर फारुख शेख अभिनीत उनकी फिल्म क्लब60 की फिल्म समीक्षकों ने खूब सराहा. वे इस फिल्म के निर्माता थे. इसके अलावा दर्जनों डाक्यूमेंट्री और टीवी एपिसोड के भी वे निर्माता रहे. खेती-किसानी को लेकर उनमें गहरी दिलचस्पी थी. डेयरी …

डा. शिवपूजन राय के नेतृत्व में आज ही के दिन आठ भूमिपुत्रों ने तिरंगे के लिए दे दी थी अपनी जान

भूमिहार ब्राहमण समाज के भूमिपुत्रों ने जंगे आज़ादी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और देश की आज़ादी के लिए हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए. ऐसे ही आज़ादी के दीवाने अमर शहीद डा. शिवपूजन राय और उनके आठ साथी थे जिन्होंने आज के ही दिन हँसते-हँसते तिरंगे के सम्मान में अपनी जान दे दी. इन्हीं को याद करते हुए केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ने लिखा - " 18 अगस्त 1942 को मुहम्मदाबाद तहसील परिसर,गाजीपुर में देश की आजादी के लिए सीने पर गोली खाकर तिरंगा फहराने वाले सभी अमर शहीदों को मेरा नमन।"
भूमिपुत्रों की बेमिसाल क्रांति :  मुहम्मदाबाद। वर्ष 1942 की अगस्त क्रांति के इतिहास में मुहम्मदाबाद की अहिंसक क्रांति बेमिसाल थी। इस घटना का जिक्र सुनकर लोग आज भी जोश से भर जाते हैं। महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ों के आह्वान पर अमर शहीद डा. शिवपूजन राय के नेतृत्व में 1942 को आठ नौजवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पूर्ण स्वराज की मांग पर जोश से लबरेज लोग देश के कोने-कोने से स्वतंत्रता संग्राम के महायज्ञ में अपने प्राणों की आहुति देने के लिए आगे आ रहे थे। 18 अगस्त 1…

अलका राय को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश

गाजीपुर: मोहम्मदाबाद सीट पर लंबे समय से कुख्यात माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के परिवार का कब्ज़ा था. लेकिन इस बार यूपी विधानसभा के चुनाव में अलका राय ने सिबगतुल्लाह अंसारी को 30,000 के बड़े अंतर से शिकस्त देकर भू-पताका लहरा दिया. इससे अलका राय की लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ है जिससे विरोधियों में बेचैनी है. इसलिए उनके खिलाफ अब षड्यंत्र रचा जाने लगा है. उसी कड़ी में स्वतंत्रता दिवस पर उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर गलत तरीके से वायरल कराने की कोशिश की गयी जिसमें बताया गया अलका राय ने तिरंगे का अपमान किया है. साजिशकर्ताओं ने ये कहकर तस्वीर साझा की कि अलका राय ने तिरंगे पर पैर रखा है. लेकिन स्थानीय साईट 'ग़ाज़ीपुर खबर लाइव' की टीम ने पड़ताल की तो पाया कि जिसे तिरंगा बताकर प्रचारित किया जा रहा था वो तिरंगा नहीं, बल्कि रंगोली था जिसे कार्यालय प्रभारी अंकित राय द्वारा बनाया गया गया था.उसी रंगोली पर विधायक अलका राय ने पैर रखा था. इसी मुद्दे पर विधायक के प्रतिनिधि आनंद राय मुन्ना ने कहा कि विधायक अलका राय को बदनाम करने की ये घिनौनी साजिश है. तस्वीर जो सोशल मीडिया पर फैलाई गयी -
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अनंत सिंह के बयान पर तेजस्वी यादव का तंज

पटना. बिहार में गठबंधन टूटने के बाद से राजनीतिक पारा गरम है. राजद जनसभाएं कर जदयू और भाजपा पर हमला कर रही है. इसी क्रम में जदयू के पूर्व नेता और मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने कल लालू परिवार पर हमला करते हुए, उनके बेटों को उनके खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए ललकारा. उन्होंने कहा कि अगर लालू में दम है तो परिवार में से किसी बेटे को इस्तीफा दिलवा कर चुनाव में उतारें. अनंत ने कहा कि मैं भी इस्तीफा दूंगा और फिर उनके खिलाफ चुनाव लड़ूंगा. निर्दलीय विधायक ने कहा कि मैं राघोपुर से भी तेजस्वी के खिलाफ चुनाव लड़ने को तैयार हूं और चुनाव लड़ने के बाद उन्हें पता चल जाएगा जनता किसके साथ है. अनंत सिंह के इसी बयान पर पलटवार करते हुए तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर लिखा - CM का अति चेहता बाहुबली अनंत सिंह पहले अपने दुलारे बड़के नेता से कहे कि वो मेरे ख़िलाफ़ चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बनकर दिखाए।
अनंत सिंह की ललकार, तेजस्वी यादव को दी चुनौती Community Journalism With Courage

अनंत सिंह की ललकार, तेजस्वी यादव को दी चुनौती

पटना. लंबी चुप्पी को तोड़ते हुए मोकामा के विधायक अनंत सिंह आज लालू यादव एंड फैमिली पर जमकर बोले और तेजस्वी यादव को ललकारने वाले अंदाज़ में उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती भी दे डाली.अनंत सिंह ने कहा कि लालू परिवार का एक ही लक्ष्य है जनता के पैसे को लूटना. उन्होंने कहा कि लालू पटना के मेरे मॉल में हिस्सा मांगते थे जब मैंने हिस्सा देने से इंकार किया तो मेरे उपर तरह-तरह के केस लाद दिये गये. उन्होंने ये बातें पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही.इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने लालू यादव के बेटों को उनके खिलाफ चुनाव में उतरने के लिए भी ललकारा. उन्होंने कहा कि अगर लालू में दम है तो परिवार में से किसी बेटे को इस्तीफा दिलवा कर चुनाव में उतारें. अनंत ने कहा कि मैं भी इस्तीफा दूंगा और फिर उनके खिलाफ चुनाव लड़ूंगा. निर्दलीय विधायक ने कहा कि मैं राघोपुर से भी तेजस्वी के खिलाफ चुनाव लड़ने को तैयार हूं और चुनाव लड़ने के बाद उन्हें पता चल जाएगा जनता किसके साथ है. अनंत सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि लालू प्रसाद ने मुझसे मेरी कमाई का आधा हिस्सा मांगा था. मैंने बालू के कारोबार में हाथ आजमाने क…

बिहार में दहेज़ का रेट कार्ड देखेंगे तो हैरान रह जायेंगे, करोड़ों में IAS का रेट

पटना. बिहार में दहेज उत्पीड़न के मामले में पिछले साल के मुकाबले इस साल बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दैनिक भाष्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल दहेज के मामलों 25 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हैरानी की बात ये है कि यहां दहेज के लिए वधू पक्ष को वर पक्ष से डील करनी पड़ती है। अलग-अलग क्षेत्र में काम करने वाले वर का दहेज के लिए रेट कार्ड बना हुआ है। वधू पक्ष जब रिश्ते के लिए वर पक्ष के पास जाते हैं तो वे सबसे पहले अपना दहेज का रेट कार्ड पेश करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार यहां आईएएस को मुंहमांगी कीमत मिल जाती है। वहीं वर बैंक में नौकरी करता है तो उसका रेट 10 से 30 लाख रुपए है। डेढ़-दो साल पहले एक बैंक क्लर्क का रेट 6-8 लाख था, लेकिन अब 7 से 10 लाख तक है। इसी तरह बाकी कैटेगरी के वर के लिए भी रेट में जबरदस्त ग्रोथ हुई है।
आमतौर पर वर पक्ष की मांग होती है कि लड़की काम करने वाली होनी चाहिए। जो दहेज की रकम दी जाए वो कैश होनी चाहिए। कई मामलों में ये भी देखा गया कि कैश के अलावा गहनों की भी मांग रखी गई। इसके अलावा लड़की की बैंक में सरकारी नौकरी है और लड़का भी सरकारी नौकरी करता है तो ऐसे में लड़की वालों को …

तारकेश्वरी सिन्हा की आज पुण्यतिथि, संसद में उनका भाषण आज भी याद किया जाता है

भूमिहार ब्राह्मण महिलाओं ने भी भारत की राजनीति में अमिट छाप छोड़ी है. उसका सबसे बड़ा उदाहरण तारकेश्वरी सिन्हा हैं. वे नेहरू मंत्रिमंडल में कैबिनेट मिनिस्टर थी. आज उनकी पुण्यतिथि है. 26 दिसंबर 1926 को जन्मी तारकेश्वरी सिन्हा का निधन 14 अगस्त 2007 को हुआ था. बिहार की भूमिपुत्री चार बार लोकसभा में चुनकर गयी और अपने ओजपूर्ण भाषणों के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भी हिस्सा लिया और मात्र 26साल की उम्र में पहली बार सांसद बनी. उन्हें याद करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी रामनगीना सिंह लिखते हैं - "Smt Tarkeshwari sinha was a great leader and parliamentarian.she was a member of the Indian parliament from 1952 to 1971.she was a minister in the Nehru cabinet. She was known as Hind kokila.she was a brilliant writer and orator and a very great orgniser.she passed away on 13.8.2007 and crimated on 14 August 2007 at Delhi. She was member of the Indian parliament from Barh, in the Patna district of Bihar. I pay my respect and regard to the great soul and also pray to almighty to give…

बक्सर के डीएम मुकेश कुमार पाण्डेय गाज़ियाबाद में मृत पाए गए

दुखद खबर. बिहार के बक्सर जिले के डीएम मुकेश कुमार पांडेय गाजियाबाद में मृत पाए गए. प्रथम दृष्टया में ये आत्महत्या का मामला बताया जा रहा है. शव गुरुवार शाम गाजियाबाद स्टेशन से 1 किलोमीटर दूर कोटगांव के पास रेलवे ट्रैक पर मिला.गौरतलब है कि उन्होंने 4 अगस्त को ही बक्सर जिले के डीएम का पदभार संभाला था. जिलाधिकारी के रूप में यह उनकी पहली नियुक्ति थी. वे 2012 बैच के आईएएस अफसर थे. ख़बरों के मुताबिक़ उनकी जेब से एक सुसाईड नोट भी निकला है.पुलिस मामले की जांच कर रही है.शुक्रवार को उनकी शव का पोस्टमार्टम होगा. (एजेंसी)
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बाबा ब्रह्मेश्वर के कार्यक्रम में निशांत सिंह सम्मानित, इंडिया गेट पर किया था बाबा को याद

भूमंत्र के आह्वाहन को स्वीकार कर इंडिया गेट पहुंचे निशांत सिंह, युवाओं ने बाबा ब्रह्मेश्वर को श्रद्धांजली देकर पेश की मिसाल  दिल्ली. किसी भी समाज का भविष्य नयी पीढ़ी पर निर्भर करता है. यदि नयी पीढ़ी अपनी विरासत को लेकर सजग है तो समझिये समाज का भविष्य सुरक्षित है. इसी भरोसे को भूमंत्र ग्रुप के युवा सदस्य निशांत सिंह ने कायम रखा है. दरअसल 1जून को बाबा ब्रह्मेश्वर की याद में दिल्ली में जब कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया तो भूमंत्र के आह्वाहन पर 15वर्षीय निशांत सामने आए और इंडिया गेट पहुंचकर ब्रह्मेश्वर मुखिया को अनोखे अंदाज़ में श्रद्धांजलि अर्पित की और उनका साथ कई दूसरे युवाओं ने भी दिया. उनके इसी पहल को सम्मानित करने के उद्देश्य से रविवार 6अगस्त को ब्रहमेश्वर मुखिया की याद में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया.यह सम्मान अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन के अध्यक्ष इंदुभूषण सिंह और चंदन कुमार सिंह ने दिया. कार्यक्रम का आयोजन 'अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन' ने किया था.इस मौके पर बड़ी संख्या में समाज के बुद्धिजीवी भी मौजूद रहे. कार्यक्रम का …