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Showing posts from June, 2017

10वीं की परीक्षा में भूमिपुत्र प्रेम कुमार बने स्टेट टॉपर, लिखकर सवाल पूछने वाले रिपोर्टर कहाँ गए?

न्यूज़ चैनलवालों को यूपीएससी परीक्षा परिणामों से भी ज्यादा बिहार बोर्ड के दसवीं और बारहवीं परीक्षाओं का इंतज़ार रहता है. इधर परीक्षा परिणाम आते हैं और उधर चैनल वाले टॉपर्स की लानत-मलानत के लिए कैमरा-माइक लेकर पहुँच जाते हैं. पिछले दो साल से कुछ ऐसा ही चल रहा है. अभी बारहवीं परीक्षा के परिणामों के समय भी हुआ. लेकिन इस क्रम में जो असली टॉपर हैं उनकी भी इज्जत उछल जाती है. बहरहाल बिहार बोर्ड ने दसवीं परीक्षा का परिणाम आज घोषित कर दिया. दसवीं की परीक्षा में लखीसराय के आम किसान परिवार के भूमिपुत्र 'प्रेम कुमार' टॉपर बने हैं.गोविंद हाई स्कूल से पढ़ने वाले प्रेम को 465 नंबर मिले हैं. उम्मीद करते हैं कि चैनल के रिपोर्टर इस टॉपर का भी इंटरव्यू लेंगे. फिर उन्हें पता चलेगा कि टॉपर क्या होता है? एक फर्जी टॉपर के चक्कर में तमाम असली टॉपर और शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करना पीत पत्रकारिता है. प्रेम कुमार की मार्क्सशीट - सभी टॉपर्स की सूची - 1- प्रेम कुमार- गोविंद हाई स्कूल- 465 2.भव्या कुमारी, सिमुलतला आवासीय विद्यालय-464 93% 3. हर्षिता कुमारी सिमुलतला आवासीय विद्यालय 462-92.8% 4- अनिल कु…

नक्सलवाद के मौलिक दर्शन पर सर्जिकल स्ट्राइक : भाग 1

{अराजकतावादी वामपंथी शासनतंत्र बनाम  सनातन भारतीय व्यवस्था} ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~                 क्या है अराजकतावाद ????  ज्ञात हो कि पश्चिमी वाम पंथ विभिन्न मतों का संकलन है यथा माक्स का मार्क्सवाद , लेनिन का लेनिनवाद , प्लूटो , हेराक्लिटिस ,हेलूमूसयस आदि के मत । इसी क्रम मे एक मत है अराजकतावाद {anarchism}।
यह राजनीति विज्ञान की वह विचारधारा है जिसमें राज्य की उपस्थिति को अनावश्यक माना जाता है। इस सिद्धांत के अनुसार किसी भी तरह की सरकार अवांछनीय है। इसमें साधारणतः यह तर्क दिया जाता है कि मनुष्य मूलतः विवेकशील, निष्कपट और न्यायपरायण प्राणी है। अतः यदि समाज सही ढंग से संगठित हो तो किसी प्रकार के बल प्रयोग की आवश्यकता ही नहीं रहेगी। ऐसी स्थिति में राज्य की उपस्थिति स्वतः अप्रासंगिक हो जायगी।
विचारधारा के प्रवर्तक 
माइकेल बाकुनिन {१८१४-१८७६} प्रिंस क्रोपोट्किन( १८४२- १९११)
अराजकतावाद की प्रमुख मान्यतायें  १. धर्म और राज्य की मानव को आवश्कता नही , पूर्ण स्वतंत्रा उसका अधिकार है। २. मानव को सभ्यता और विकासवाद के पथ पर आपसी सहयोग के साथ बढना चाहिए। ३. राज्य निरंकुशता का प…

सीआरपीएफ के इस भूमिपुत्र की शहादत को सलाम कीजिए

देश की रक्षा का जब भी सवाल उठता है तो भूमिपुत्र सबसे आगे नज़र आते हैं. प्राचीन समय से चली आ रही ये परम्परा आज भी कायम है और इसी परम्परा के निर्वाहन के लिए भूमिपुत्र बड़ी संख्या में सेना, सीआरपीएफ और पुलिस में भर्ती होकर देश की रक्षा के लिए शपथ लेते हैं और वक़्त आने पर अपनी शहादत देने से भी नहीं चूकते. ऐसे ही भूमिपुत्र हैं सीआरपीएफ के सेठ कुमार. वे सीआरपीएफ में कॉन्स्टेबल के पद पर कश्मीर में तैनात थे. लेकिन आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में वे शहीद हो गए. मूलतः नालंदा(बिहार) के पोखरपुर के निवासी सेठ कुमार के पिता पुलिस में हैं और भाई भी सीआरपीएफ में हैं. भूमंत्र भारत माता के इस वीर सपूत को नमन करता है. ऐसे ही भूमिपुत्रों के कारण हमारा देश सुरक्षित है. Community Journalism With Courage

धराशायी होती भूमिहार अस्मिता, बाबू अंबुज शर्मा की कविता

कलिकाल लाल कराल भाल  पर महाकाल ताण्डव कर रहे लड लड के भिडकर संग मे भूमिहार संकट  सह रहे
नर नारी धेनू वाहन निशि दिन यादवा-आतंक की बलि चढ रहे आपसी मतभेद मे नित नये ऋण ऋषिकुल के बाभनो पर बढ रहे 
है वृहद हृदय विशाल सहज स्वभाव बाभन जात का हा मिल गये गर आज फिर देगे जवाब ये हर बात का हो गरीब या सुपुष्ट अमीर या हो अपंग-अनाथ का आज है दरकार हमे एक दूसरे से विश्वस्त साथ का
सम्प्रति बवंडर लाने की रखते है क्षमता सभी  युद्ध मे बुद्दि हमारी  होती न है  असफल कभी कर तैयारी संग्राम की ब्रहर्षि कस कटि अब शान से  फिर कुछ ऐसा हो कि मस्तक उठा रहे अभिमान से डरते रहे युगो तक सब शत्रु भार्गवनंदनो  के नाम से हो सुशोभित जग पुनः हमारे विषद अनुपम ज्ञान से 
एक घटना कह रहा हू नयी सुनो ध्यान से कुकर्मी चढ गये बहुसंख्या मे एक गांव पे भृगुनंदनिया तन गयी देख खतरा आन पे अंत तक लडी सब था मान प्यारा जान से 
आततायी जुल्मियो ने तब किया ऐसा  दारूण काम रे माताओ के जबडे तोडकर लिखाया कायरो मे नाम रे
पर शूर वीरपुत्रो की जुबां क्यो अबी तक मौन है? घरनियो के अपमान पर भी क्यो पौरूष गौण है? क्या हो चुका है रक्त पानी माता सती के पूत …

मीडिया करती है बिहार के इस भूमिपुत्र को सलाम, नाम है जिसका उदय शंकर

प्रेरणादायक खबर : मीडिया इंडस्ट्री में कभी किसी पत्रकार ने ऐसी तरक्की नहीं की जैसी उदय शंकर ने की है. वे स्टार इंडिया के सीईओ हैं और पिछले एक दशक से स्टार प्लस के प्रमुख के तौर पर कार्यरत हैं. इस दौरान उन्होंने कई नए आयाम स्थापित किए और स्टार प्लस को नयी ऊँचाइयों पर पहुँचाया. मूलतः बिहार के मुजफ्फरपुर से ताल्लुक रखने वाले उदय शंकर ने मीडिया इंडस्ट्री में जिस तेजी से अपना मुकाम बनाया, वो अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है. उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पटना एडिशन से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की. फिर सहारा के न्यूज़ चैनल से जुड़े. फिर आजतक में आए और उसके चैनल हेड बने. आजतक के बाद वे स्टार न्यूज़ के चैनल हेड और सीईओ बने. तत्पश्चात पीटर मुखर्जी के जाने के बाद स्टार इंडिया के सीईओ बने और उनका कद लगातार बढ़ता गया और अब देश के प्रभावशाली लोगों में उनकी गिनती की जाती है.इंडिया टुडे और इंडियन एक्सप्रेस ने देश के सौ असरदार लोगों की सूची में उदय शंकर को भी प्रभावशाली व्यक्ति माना. इंडिया टुडे ग्रुप के मालिक अरुण पूरी ने उनकी तरक्की देखकर कहा था कि इतने सालों में वे एक ही व्यक्ति को ठीक से न…

गिरिराज सिंह ने किया लालू यादव को बर्थडे विश, लालू ने कसा तंज, यूजर्स करने लगे फनी कमेंट्स !

केंद्रीय मंत्री और लालू यादव के बीच सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से अक्सर महाभारत छिड़ी रहती है.लेकिन इसके बावजूद लालू यादव के जन्मदिन पर आज बधाई देने से नहीं चूके गिरिराज सिंह और उन्होंने ट्वीट करके लालू यादव को जन्मदिन की बधाई दी. गौरतलब है इसी महीने के पहले तारीख को वे किसान नेता ब्रह्मेश्वर मुखिया की पुण्यतिथि पर चुप्पी साध ली थी और श्रद्धांजलि के दो शब्द भी ट्वीट नहीं किया था. बहरहाल आज उन्होंने लालू यादव को ट्वीट करके कहा कि -  " Wishing @laluprasadrjd ji a long healthy life on his birthday ."  इसपर लालू यादव ने भी कोट करते हुए जवाब दिया, लेकिन इस जवाब में महीन व्यंग्य था. लालू यादव ने लिखा -  " Thank you Mantri Ji "  वैसे आपको ये सामान्य उत्तर लगेगा. लेकिन राजनीतिक रूप से देखिएगा कि चार शब्दों के इस प्रतिउत्तर में 'मंत्री' संबोधन के रूप में व्यंग्य छुपा हुआ है. लालू यादव बिना इस संबोधन के भी गिरिराज सिंह को टैग करते हुए ट्वीट कर सकते थे, जैसे गिरिराज सिंह ने अपने ट्वीट में किया था. लेकिन लालू यादव ने तंज कसते हुए 'मंत्री' संबोधन का इस्ते…

कराहता भूमिहार और माखौल उडाती दुनिया !

-बाबू अंबुज शर्मा- आज बिहार मे सर्वत्र भूमिहारो को दरकिनार करने की होड़ चल रही है।लोग राजनीति से लेकर आम जीवन तक में इस जाति विशेष से दूरी बनाए रखना चाहती है । आखिर क्यो?कारण क्या है आखिर?
भारतवर्ष मे काल और स्थान पर शासक राजवंश बदलते रहे पर नही बदला तो वो था मुख्यधारा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रीढ भूमिहार। एक ऐसी प्रजाति जिसके इर्द गिर्द सूक्ष्म रूप से कृषि आधारित भारतीय अर्थव्यवस्था शुरू से कमोबेस आज तक घूमती आयी  है।जनता मे पैठ और जमीन से जुडे रहना हमारी खासियत रही है। मिट्टी की सेवा और भारत पर जान न्यौछावर करने का जज्बा शुरू से रहा है। अन्याय के विरूद्ध  आवाज उठाना हमारी फितरत। किसी की राह पर न चल खुद नई राह बनाना हमारी आदत।फिर भी आज हम हाशिए पर क्यो और कैसे? विरोधियो की चाल को समझने की जरूरत है। 
झूठा शान और दंभ धीरे धीरे कर के हमारे पिछलग्गु भीतरघाती शत्रु जो शुरू से हमारे टुकडो पर पलते आए  मालिक मालिक कर के हमारे बच्चो के मन मस्तिष्क मे झूठा घमण्ड भरते गये और आज इतना दंभी और अहंकारी हो चुका है ये समाज की इसे अपने लिए खोदा गया कुआं भी प्रशंसा की गूंज लगते है।अरे कुल …

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के नाम भूमंत्र का खुला खत

सेवा में, 
श्री गिरिराज सिंह, 
केंद्रीय मंत्री, 
भारत सरकार .

विषय : सेनारी के मंदिर का जीर्णोद्धार और किसान नेता ब्रह्मेश्वर मुखिया की मूर्ति स्थापित करने के संबंध में 

महोदय, 

आप हिन्दुत्व के प्रबल समर्थक हैं इसलिए ये खत बड़ी उम्मीद से आपको लिख रहा हूँ. चूँकि सत्ता के ऊँचे गलियारे तक आवाज़ पहुँचाना मुश्किल होता है, इसलिए खुला खत लिखने की मजबूरी है. शायद अब ये आवाज़ आपतक पहुँच जाए. सेनारी का नाम तो आपने जरुर सुना होगा. वही सेनारी जहाँ आज से 17 साल पहले 34 निर्दोष किसानों की हत्या बड़ी बेरहमी से नक्सलियों द्वारा कर दी गयी थी. इस घटना को सेनारी गाँव के मंदिर के पास अंजाम दिया गया जिसके बाद से उस मंदिर में पूजा-अर्चना बंद हो गयी.मानो भगवान भी किसी श्राप की सजा काट रहे हैं.भक्त-भगवान से और भगवान-भक्त से नाराज हो गए. लेकिन आप दूसरे नजरिये से देखिये तो ये भय का प्रतीक भी है. मानते हैं कि जहाँ 34 लोगों की एक साथ नृशंस हत्या कर दी गयी हो, वहां पैर रखते ही रूह तो कांपेगी ही. अपनों की याद आएगी ही और खौफ़जदा करने वाला नज़ारा भी सामने आएगा. लेकिन ये जरूरी है कि भावनाओं को नियंत्रित कर मंदिर में पुनः भगवान …

उत्कर्ष कुमार सिंह ने टॉपर गणेश को एबीपी न्यूज़ पर आइना दिखाया तो कुंठित लोग भूमिहार-भूमिहार चिल्लाने लगे

बिहार में हर साल टॉपर घोटाला हो रहा है. इसकी वजह से बिहार बोर्ड की पूरे देशभर में थू-थू हो रही है. लेकिन नीतीश सरकार शराबबंदी के बावजूद मदमस्त है. इस बार बिहार बोर्ड की बारहवीं के आर्ट्स टॉपर गणेश कुमार भी फर्जी पाए गए और गिरफ्तार भी हुए. लेकिन गिरफ्तारी के पहले एबीपी न्यूज़ ने गणेश का एक इंटरव्यू लिया था जिसमें एक टॉपर के हिसाब से 40 सवाल पूछे गए थे. इन सवालों का गणेश ठीक से जवाब नहीं दे पाए थे. यह इंटरव्यू एबीपी न्यूज़ के रिपोर्टर उत्कर्ष कुमार सिंह ने लिया था. इंटरव्यू के बाद हंगामा मच गया और दलितों के नाम पर अपनी दूकान चला रहे लोग इंटरव्यू के कंटेंट पर चर्चा की बजाए हाय भूमिहार, हाय भूमिहार चिल्लाने लगे. दरअसल उत्कर्ष कुमार सिंह जाति से भूमिहार हैं और इसी को मुद्दा बनाकर गणेश कुमार के फर्जीवाड़े पर पर्दा डालने की कोशिश की गयी. घोर जातिवादी दिलीप मंडल के छत्रछाया में चल रही एक वेबसाईट ने टाइटल दिया - "पढ़िए गणेश का इंटरव्यू करने वाले एबीपी न्यूज के भूमिहार पत्रकार का जातिवादी चरित्र". लेकिन उत्कर्ष के जातिवादी चरित्र को बताने की चेष्टा करने वाले खुद कितने जातिवादी हैं उसकी…

भूमंत्र की खबर का असर, डॉ.अरुण कुमार ने दी भूमिपुत्री को बधाई

हाल ही में यूपीएससी के रिजल्ट आए तो भूमिपुत्र और भुमिपुत्रियों ने भी देश की सबसे कठिन परीक्षा में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवायी. जहानाबाद की आरती शर्मा ने 118वीं रैंकिंग हासिल करके पूरे जहानाबाद जिले का नाम रौशन किया. इसपर भू-समाज के साथ-साथ पूरा जहानाबाद भी ख़ुशी से झूम उठा. सबने बधाई दी. लेकिन जहानाबाद के सांसद डॉ.अरुण कुमार किसी वजह से बधाई देने से चूक गए. हालाँकि उन्होंने बाकी दो प्रत्याशियों को बधाई जरुर दी थी, बस आरती शर्मा का नाम लेना भूल गए. संभवतः ऐसा जानकारी के अभाव में ये मानवीय भूल हुई होगी. इसलिए उनके ध्यानाकर्षण के लिए भूमंत्र ने एक पोस्ट की और लिखा - 
"कहूंगा तो आप में से कुछ लोग बुरा मान जाएंगे।लेकिन बिना कहे रहा भी नहीं जाता है।ये मेरा फर्ज भी है।सांसद #अरुण_कुमार यूपीएससी परीक्षा में सफल हुए #आरिफ_अहसन और लक्ष्मणपुर बाथे के गौरव को अपने वॉल पर बधाई देते हैं लेकिन 118वीं रैंकिंग हासिल करने वाली जहानाबाद की #आरती_शर्मा का जिक्र तक नहीं करते।जाति और धर्म को लेकर ये उनकी प्राथमिकता को दर्शाता है।" 
भूमंत्र के इस पोस्ट पर काफी ज्यादा वाद-विवाद हुआ. पक्ष-प्रतिपक…

देखिए अरुण जी कैसे कुशवाहा समाज के जगदेव प्रसाद की जयंती मनाने से नहीं चूकते उपेन्द्र कुशवाहा

हर समाज के अलग-अलग नायक होते हैं.ये जरुरी नहीं कि आपके नायक को भी दूसरा नायक माने.ऐसे में उस समाज का कर्तव्य होता है कि वे अपने नायक के नायकत्व को संजो के रखे और पूरे दुनिया में उसका प्रचार-प्रसार करता रहे. इसी नीयत से सभा-संगोष्ठी, जयंती आदि मनायी जाती है. इस मामले में समाज के नेताओं की भूमिका अग्रणी होती है. लेकिन जब वे ही अपने कर्तव्य से विमुख हो जाए तो समाज और उसके नायक के सामने बड़ी संकटप्रद और हास्यास्पद स्थिति पैदा हो जाती है. 
हाल में भूमिहार ब्राह्मण समाज के सामने कुछ ऐसी ही स्थिति पैदा हुई जब किसान नेता ब्रह्मेश्वर मुखिया की पांचवी पुण्यतिथि शहादत दिवस के रूप में मनायी गयी. इस मौके पर पटना में हर साल की तरह इस बार भी एक भव्य कार्यक्रम मनाया गया. भूमंत्र के आह्वाहन पर दिल्ली के इंडिया गेट पर एक युवा निशांत सिंह की अगुवाई में ब्रह्मेश्वर मुखिया को बड़ी श्रद्धा से याद किया गया. फेसबुक और ट्विटर उनके चित्रों और नारों से पट गया. उस दिन सोशल मीडिया के रणवीरों ने फेसबुक पर अपनी प्रोफाइल पिक बदल ली तो ट्विटर पर हैशटैग #BrahmeshwarTheWarrior पर सैकड़ों ट्वीट हुए. मिला-जुलाकर दृश्य ऐसा …

जमशेदपुर में बैकुंठ शुक्ल और बाबा ब्रहमेश्वर पर कार्यक्रम, मुख्य अतिथि अरुण कुमार नहीं पहुंचे

जमेशदपुर.ब्रह्मऋषि विकास मंच के तत्वाधान में जमशेदपुर में 4जून को बैकुंठ शुक्ल और बाबा ब्रह्मेश्वर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.इसमें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रण पत्र पर जहानाबाद के सांसद डॉ.अरुण कुमार का नाम प्रकाशित था.लेकिन वे नहीं आए.गौरतलब है कि ठीक उसी दिन वे इफ्तार पार्टी में व्यस्त थे.इसी पर सोशल मीडिया पर दुःख व्यक्त करते हुए एक सज्जन लिखते हैं - 
Sudhir Kumar Singh : माननीय सांसद जहानाबाद डॉक्टर अरुण कुमार को जमशेदपुर के कार्यक्रम में इनकी सहमति से मुख्य अतिथि बनाया गया यह माननीय इस पारिवारिक कार्यक्रम में नहीं आए जो बहुत ही दुखद है यह हमारे परिवार के नेता है इन्हे संसद में यह आवाज उठानी चाहिए अमर शहीद बैकुंठ शुक्ला की मूर्ति बिहार विधानसभा भवन में कब लगेगी, शहीद का दर्जा कब मिलेगा.किसानों के मसीहा शहीद ब्रह्मेश्वर नाथ सिंह मुखिया को न्याय कब मिलेगा.परिवार से है तो परिवार की बात संसद में भी जानी चाहिए।
बहरहाल उनकी अनुपस्थिति में बाबा ब्रह्मेश्वर के पुत्र इंदुभूषण सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और अपने विचारों को व्यक्त किया.इस मौके पर ब्लड डोनेशन कैम्प का भी आयोज…

जहानाबाद के सांसद अरुण कुमार के नाम भूमंत्र का खुला ख़त

सेवा में,  डॉ.अरुण कुमार,  सांसद, जहानाबाद. 
विषय : जहानाबाद में बाबा ब्रहमेश्वर की प्रतिमा स्थापित करने के संबंध में 
महोदय,  सोशल मीडिया पर आपके इफ्तार पार्टी की तस्वीरें देखकर अच्छा लगा कि आप सर्वधर्म में यकीन रखते हैं और समाज के सभी धर्म और जाति के लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं. लेकिन इसके लिए आप अपनी जाति और धर्म का त्याग कर टोपी धारण कर ले, यह न्यायोचित नहीं.1 जून को किसानों के नेता ब्रहमेश्वर मुखिया की पांचवी पुण्यतिथि पर आपकी चुप्पी बहुत खली. आपको तो पता ही है कि कृषकों और समाज में बाबा ब्रह्मेश्वर की कितनी मान्यता है. लेकिन जहानाबाद का सांसद बाबा ब्रह्मेश्वर की पुण्यतिथि पर तुच्छ राजनीति के चक्कर में चुप्पी मार दे, ये चुभता है और हृदय तोड़ने वाली बात है. दूसरे नेताओं से आशा नहीं, लेकिन आपका यूँ मुंह फेर लेना अखरता है. 
बहरहाल ये पत्र शिकायतें करने के लिए नहीं लिख रहा.पत्र का उद्देश्य किसान नेता ब्रह्मेश्वर सिंह मुखिया की मूर्ति स्थापित करने से संबंधित है. ये बेहद दुःख का विषय है कि किसानों के मसीहा बाबा ब्रहमेश्वर की मूर्ति अबतक कहीं नहीं स्थापित हुई है. चुकी जहानाब…

मुसलमानों को रिझाने में लगे आपके सांसद डॉ.अरुण कुमार

भूमिहार की राजनीतिक ज़मीन पर खड़े डॉ.अरुण कुमार किसान नेता ब्रह्मेश्वर मुखिया का नाम भले भूल गए हो,लेकिन दावत-ए-इफ्तार नहीं भूले. जॉर्ज फर्नांडिस को भी नहीं भूले. पूरी ठसक से उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर इसकी तस्वीर शेयर भी की है.आप भी देखिए, क्योंकि तस्वीरें बोलती है. Community Journalism With Courage

जानिए ब्रह्मेश्वर मुखिया का नाम क्यों नहीं लेते गिरिराज सिंह ?

किसान नेता और नक्सलियों के खिलाफ अपने वक़्त के सबसे बड़े रणनीतिकार ब्रह्मेश्वर सिंह मुखिया का 1 जून को शहादत दिवस मनाया गया तब समाज के कई नेताओं ने अपने आप को इससे बिलकुल दूर रखा. यहाँ तक कि सोशल मीडिया पर भी दो शब्द लिखने से वे चूक गए जिससे पूरा भूमिहार ब्राहमण समाज उबल पड़ा. भूमिहार ब्राहमण समाज के बौद्धिक वर्ग द्वारा इसका पुरजोर विरोध हुआ. सोशल मीडिया पर बड़े नेताओं की खूब फजीहत हुई. ट्विटर और फेसबुक पर नेताओं से सवाल पूछा गया कि तुच्छ राजनीति के दवाब में क्या आप समाज के महापुरुषों को भी भूला देंगे. श्रद्धांजलि का एक ट्वीट तक नहीं करेंगे? इस मसले पर मुख्यतः चार नेता निशाने पर रहे जिनके नाम हैं गिरिराज सिंह, डॉ.अरुण कुमार, अखिलेश प्रसाद सिंह और सीपी ठाकुर. यहाँ हम बात गिरिराज सिंह की कर रहे हैं. 
गिरिराज सिंह की भी ट्विटर पर काफी लानत-मलानत हुई कि हर विषय पर मुखरता से ट्विट करने वाले गिरिराज सिंह बाबा ब्रह्मेश्वर को नमन करना क्यों भूल गए. एक ट्वीट तक नहीं किया. गौरतलब है कि कभी उन्होंने बाबा ब्रह्मेश्वर को गांधीवादी और किसानों का नेता भी कहा था. पूरा मामला यही से आकर शुरू होता है. दरअस…

भूमंत्र के आह्वाहन को स्वीकार कर इंडिया गेट पहुंचे निशांत सिंह, युवाओं ने बाबा ब्रह्मेश्वर को श्रद्धांजली देकर पेश की मिसाल

दिल में यदि चाहत हो तो कुछ भी संभव है. बाबा ब्रह्मेश्वर के पुण्यतिथि पर आज एक युवा निशांत सिंह ने पहल की और इंडिया गेट पहुंचकर बाबा ब्रह्मेश्वर को श्रद्धांजली अर्पित की. उनका साथ दूसरे युवाओं ने भी बखूबी दिया. गौरतलब है कि बाबा ब्रह्मेश्वर को लेकर कोई भी भूमिहार संगठन कार्य्रकम करने के लिए जब सामने नहीं आया तो भूमंत्र के आह्वाहन पर निशांत सामने आए और इंडिया गेट पहुंचकर बाबा को श्रद्दांजलि दी. इससे बड़ी श्रद्धांजलि और क्या हो सकती है? ये सब तुरत-फुरत हुआ और कई लोग इसे फेसबुक की गप्पबाजी समझ रहे थे, शक-सुबह कर रहे थे लेकिन निशांत ने इंडिया गेट पर बाबा को श्रद्धंजली देकर सबको गलत साबित कर दिया. ऐसे ही युवा किसी भी समाज के आशा के केंद्र बनते हैं. इनकी हौसलाफजाई जरुरी है. महान किसान नेता ब्रह्मेश्वर मुखिया को नमन. देखिए तस्वीरें -
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