Skip to main content

केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के मंच पर सीएम योगी की तस्वीर गायब, मीडिया में हंगामा

गाजीपुर. केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा की छवि एक साफ़-सुथरी और बेदाग़ छवि वाले ज़मीनी नेता की है. वे मूलतः अपनी प्रतिबद्धता और काम के प्रति निष्ठा के वजह से जानते हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी ने उनपर भरोसा जताते हुए उन्हें दो मंत्रालयों का कार्यभार सौंप रखा है जिसे वे बखूबी निभा भी रहे हैं. यूपी के सीएम की रेस में उनका नाम खूब उछला था लेकिन आखिरकार सीएम पद योगी आदित्यनाथ को मिला.उसके बाद मीडिया दोनों को विरोधी की तरफ से देखने लगा और मसाले की तलाश करता रहता है. लेकिन मनोज सिन्हा इतने सुलझे नेता है कि कभी इसका मौका ही नहीं देते. लेकिन हाल में जब वे गाजीपुर में एक सरकारी कार्यक्रम में गए तो वहां मंच के पीछे लगे पोस्टर पर योगी आदित्यनाथ की तस्वीर नहीं थी. उसके बाद ये मुद्दा बन गया और एबीपी न्यूज़ समेत कई और चैनलों ने इसे मुद्दा बना दिया. पढ़िए एबीपी न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट -
manoj sinha
गाजीपुर: यूपी के सीएम योगी आजकल हर जगह छाए रहते हैं, लेकिन गाजीपुर में एक सरकारी कार्यक्रम में योगी की तस्वीर नजर नहीं आई तो तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी हैं. इस कार्यक्रम में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने शिरकत की थी. कार्यक्रम में लगे पोस्टर में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा की तस्वीर, मोदी के स्वच्छ भारत मिशन का लोगों, मंच पर बैठे स्थानीय नेताओं के साथ डीएम की तस्वीर भी दिखी, लेकिन यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तस्वीर कहीं नहीं दिखी.मनोज सिन्हा कल अपने संसदीय क्षेत्र गाजीपुर पहुंचे तो लोगों से मिले. वह नगरपालिका के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बने थे. उन्होंने नगरपालिका की तरफ से किए जा रहे विकास के कामों का लोकार्पण किया, लेकिन इस कार्यक्रम में न सीएम योगी की तस्वीर नजर आई और न ही राज्य के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना की. गाजीपुर में जब ये चर्चा तेज हुई तो कार्यक्रम के आयोजक अफसरों के कान खड़े हुए. नगरपालिका के कार्यक्रम में सीएम की तस्वीर लगाने जैसा कोई दिशानिर्देश नहीं है, लेकिन सभी को याद है कि 11 मार्च को यूपी चुनाव के नतीजों के बाद मनोज सिन्हा का नाम भी सीएम की रेस में चला था. इस वजह से मनोज सिन्हा के मंच पर योगी की तस्वीर न होना चर्चा का मुद्दा बन गया है.
Community Journalism With Courage

Comments

Popular posts from this blog

पिताजी के निधन पर गमगीन कन्हैया के चेहरे का नूर !

सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन तस्वीर है कि यकीन करने पर मजबूर करती है. आपको जैसा कि पता ही है कि छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आए कन्हैया के पिता का निधन हो गया था. इस दौरान उनकी तस्वीर भी न्यूज़ मीडिया में आयी थी जिसमें कि वे फूट-फूट कर रो रहे थे. समर्थक और विरोधी सबने दुःख की घड़ी में दुआ की और एक अच्छे इंसान की भी यही निशानी है कि वो ऐसे वक्त पर ऐसी ही संवेदना दिखाए.

बेगूसराय की इस भूमिपुत्री ने 18 साल की उम्र में कर दिया कमाल, पढेंगे तो इस बिटिया पर आपको भी होगा नाज!

प्रेरणादायक खबर : बेटियों पर नाज कीजिए, उन्हें यह खबर पढाईए
बेगूसराय. प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती. बेगूसराय के बिहटा की भूमिपुत्री प्रियंका ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. 18 साल की उम्र में प्रियंका इसरो की वैज्ञानिक बन गयी हैं. आप सोंच रहे होंगे कि वे किसी धनाढ्य और स्थापित परिवार से संबद्ध रखती हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके पिता राजीव कुमार सिंह रेलवे में गार्ड की नौकरी करते हैं और मां प्रतिभा कुमारी शिक्षिका हैं. वे बिहटा के एक साधारण भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इस मायने में उनकी सफलता उल्लेखनीय है.  पढाई-लिखाई :  1-दसवी और 12वीं : वर्ष 2006 में 'डीएवी एचएफसी' से दसवीं और वर्ष 2008 में 12वीं  2-बीटेक : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अगरतला  3-एमटेक : एमटेक की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी से पूरा कर रही हैं  सफलताएं :  1- वर्ष 2009 में एआईईई की परीक्षा में 22419वां रैंक  2- वर्ष 2016 में गेट की परीक्षा में 1604वां रैंक  3- शोध पत्र 'वायरलेस इसीजी इन इंटरनेशनल' जर्नल ऑफ रिसर्च एंड साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग म…

सेनारी नरसंहार को देख जब भगवान भी काँप गए,17 साल से बंद है मंदिर

मंदिर भगवान का घर होता है लेकिन उस मंदिर में जाकर कोई कुकृत्य करे तो भगवान भी नाराज़ हो जाते हैं और अपने द्वार बंद कर देते हैं. 
बिहार के अरवल जिले के सेनारी गांव में 17 साल पहले ऐसा ही हुआ जब मंदिर रक्तरंजित हो गया और उस घटना को देख भगवान भी एक बार काँप गए होंगे.लेकिन प्रभु से ये मासूम जिज्ञासा भी है कि अपने सामने ऐसा अनर्थ उन्होंने होने कैसे दिया? 
सेनारी में 17 साल पहले गाँव के इसी मंदिर में चुन-चुनकर 34 भू-किसानों की हत्या एक के बाद एक कर हुई थी. ह्त्या का तरीका भी बेहद निर्मम और दिल दहलाने वाला था. 
सभी 34 लोगों की हत्या गला रेत कर गाँव के मंदिर के द्वार पर की गयी थी. तब से आज तक उस मंदिर के द्वार बंद हैं. गांव के लोगों ने इस मंदिर में पूजा पाठ करना बंद कर दिया है. 
ग्रामीणों के मुताबिक भगवान के द्वार पर लोगों की हत्या कर दी गई है. लिहाजा मंदिर में पूजा करने का क्या फायदा ? अब पिछले 17 सालों में यह मंदिर वीरान पड़ा हुआ है.