Skip to main content

मनोज भाई साहब का बीएसएनएल भाई साहब के लिए दावा !

इंदौर.केंद्रीय दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा का दावा है कि बीएसएनएल अब ‘भाई साहब, नहीं लगेगा'. इसकी सेवायें अब इतनी बेहतरीन हो गयी है कि इसे अब ‘बेहतर सेवा की नयी लगन' के नाम से जाना जायेगा.उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा, 'किसी जमाने में बीएसएनएल पर (फुल फॉर्म के रूप में) 'भाई साहब, नहीं लगेगा' का तमगा लग गया था, लेकिन हमने पिछले दो सालों में इस तमगे को हटाकर इसे 'बेहतर सेवा की नई लगन' का नया नाम दिया है. हम इस कम्पनी को विकास के पथ पर और आगे ले जाएंगे.

मनोज सिन्हा ने कहा कि, 'पिछले दो सालों में हमने नेटवर्क विस्तार और नई तकनीक अपनाने के क्षेत्रों में बीएसएनएल का निवेश काफी बढ़ाया है और अब कम्पनी परिचालन लाभ कमा रही है. आने वाले समय में हम इन क्षेत्रों में और निवेश करेंगे.' इस मौके पर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ कई योजनाओं लोकार्पण एवं शिलान्यास किया जो इस तरह से है 

- 1- इंदौर में अत्याधुनिक तकनीकी से सुसज्जित 189 बीटीएस के नेटवर्क का लोकार्पण जिससे यहाँ के उपभोक्ताओं को बेहतर दूरसंचार सेवाएं मिलेगी. 

2- 43 NGN(Next Generation Network) दूरभाषा केंद्रों का लोकार्पण , ये आईपी टेक्नोलॉजी से सुसज्जित है जिससे उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार की नयी सेवायें जैसे वीडियो,इंटरनेट इत्यादि आने वाले समय में मिल सकेगी। 

3- इंदौर जोन के तीव्रगति इंटरनेट नेटवर्क का लोकार्पण , इससे उपभोक्ताओं को तीव्रगति का इंटरनेट मिल सकेगा। डिजिट इंडिया के लिये तीव्रगति का इंटरनेट होना अत्यंत आवश्यक है ताकि सरकार की विभिन्न सेवायें उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुँच सकें। 

4- प्रधानमंत्री जी के डिजिट इंडिया के सपनों को पूरा करने की दिशा में इंदौर की भारतनेट परियोजना, जिसमे 320 ग्रामपंचायतें आती हैं,उनका लोकार्पण किया। गाँव-गाँव तक तीव्रगति की इंटरनेट सेवा मिलने से ग्रामीणक्षेत्र के लोग पूरी दुनिया से विभिन्न सेवाओं को लेने और जानकारी पाने में सक्षम होंगे । 

5- इंदौर जिले में सौरऊर्जा के220KV के सयंत्रों का शिलान्यास ,जिससे वातावरण का संरक्षण होगा और साथ ही साथ बीएसएनएल को भी आर्थिक फायदा होगा ।

Community Journalism With Courage

Comments

Popular posts from this blog

पिताजी के निधन पर गमगीन कन्हैया के चेहरे का नूर !

सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन तस्वीर है कि यकीन करने पर मजबूर करती है. आपको जैसा कि पता ही है कि छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आए कन्हैया के पिता का निधन हो गया था. इस दौरान उनकी तस्वीर भी न्यूज़ मीडिया में आयी थी जिसमें कि वे फूट-फूट कर रो रहे थे. समर्थक और विरोधी सबने दुःख की घड़ी में दुआ की और एक अच्छे इंसान की भी यही निशानी है कि वो ऐसे वक्त पर ऐसी ही संवेदना दिखाए.

बेगूसराय की इस भूमिपुत्री ने 18 साल की उम्र में कर दिया कमाल, पढेंगे तो इस बिटिया पर आपको भी होगा नाज!

प्रेरणादायक खबर : बेटियों पर नाज कीजिए, उन्हें यह खबर पढाईए
बेगूसराय. प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती. बेगूसराय के बिहटा की भूमिपुत्री प्रियंका ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. 18 साल की उम्र में प्रियंका इसरो की वैज्ञानिक बन गयी हैं. आप सोंच रहे होंगे कि वे किसी धनाढ्य और स्थापित परिवार से संबद्ध रखती हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके पिता राजीव कुमार सिंह रेलवे में गार्ड की नौकरी करते हैं और मां प्रतिभा कुमारी शिक्षिका हैं. वे बिहटा के एक साधारण भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इस मायने में उनकी सफलता उल्लेखनीय है.  पढाई-लिखाई :  1-दसवी और 12वीं : वर्ष 2006 में 'डीएवी एचएफसी' से दसवीं और वर्ष 2008 में 12वीं  2-बीटेक : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अगरतला  3-एमटेक : एमटेक की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी से पूरा कर रही हैं  सफलताएं :  1- वर्ष 2009 में एआईईई की परीक्षा में 22419वां रैंक  2- वर्ष 2016 में गेट की परीक्षा में 1604वां रैंक  3- शोध पत्र 'वायरलेस इसीजी इन इंटरनेशनल' जर्नल ऑफ रिसर्च एंड साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग म…

सेनारी नरसंहार को देख जब भगवान भी काँप गए,17 साल से बंद है मंदिर

मंदिर भगवान का घर होता है लेकिन उस मंदिर में जाकर कोई कुकृत्य करे तो भगवान भी नाराज़ हो जाते हैं और अपने द्वार बंद कर देते हैं. 
बिहार के अरवल जिले के सेनारी गांव में 17 साल पहले ऐसा ही हुआ जब मंदिर रक्तरंजित हो गया और उस घटना को देख भगवान भी एक बार काँप गए होंगे.लेकिन प्रभु से ये मासूम जिज्ञासा भी है कि अपने सामने ऐसा अनर्थ उन्होंने होने कैसे दिया? 
सेनारी में 17 साल पहले गाँव के इसी मंदिर में चुन-चुनकर 34 भू-किसानों की हत्या एक के बाद एक कर हुई थी. ह्त्या का तरीका भी बेहद निर्मम और दिल दहलाने वाला था. 
सभी 34 लोगों की हत्या गला रेत कर गाँव के मंदिर के द्वार पर की गयी थी. तब से आज तक उस मंदिर के द्वार बंद हैं. गांव के लोगों ने इस मंदिर में पूजा पाठ करना बंद कर दिया है. 
ग्रामीणों के मुताबिक भगवान के द्वार पर लोगों की हत्या कर दी गई है. लिहाजा मंदिर में पूजा करने का क्या फायदा ? अब पिछले 17 सालों में यह मंदिर वीरान पड़ा हुआ है.