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घोर जातिवादी दिलीप मंडल को भी 'ऑपरेशन भूमिहार' नाम पर ऐतराज !

एबीपी न्यूज़ ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बदनीयती से 'ऑपरेशन भूमिहार' नाम का एक कार्यक्रम बनाया था और उसे प्रसारित भी किया गया था. कार्यक्रम के नाम को लेकर भूमिहार ब्राहमण समाज के अलावा चौतरफा उसकी चौतरफा निंदा हुई थी और तकरीबन सबने माना कि रिपोर्टिंग का एक एक सेट एजेंडा था और संभवतः पेड न्यूज़ था. उस वक़्त चैनल के संपादक शाजी ज़मा थे जो अब वहां से निकाले जा चुके हैं. इसी को लेकर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने भी उस वक़्त टिप्पणी की थी और इस नाम से असहमति जताई थी.हालाँकि असहमति के बहाने उन्होंने भूमिहार ब्राहमण को हिंसक और खूंख्वार भी बताने में कोताही नहीं बरती. लेकिन उसके बावजूद उन्होंने नाम को गलत माना. उनकी टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे दिन रात जाति की ही रट लगाते हैं और जी भर कर सवर्णों को कोसते रहते हैं. बहरहाल पढ़िए उन्होंने क्या कहा था -

-दिलीप मंडल-

ABP न्यूज के कार्यक्रम 'ऑपरेशन भूमिहार' के प्रसारण के बाद मुझे वहाँ के संपादक और अपने सीनियर रहे शाजी ज़मां साहब के लिए चिंता हो रही है। भारत एक ख़तरनाक दौर में है, जहाँ सहनशीलता की जगह कम होती जा रही है। देश का पाला बेहद हिंसक और खूंखार विचारधारा वाले लोगों से पड़ा है। ये लोग कार्यक्रम के नाम को लेकर सोशल मीडिया पर काफी उग्र हैं। यह रुकना चाहिए। कार्यक्रम के इस नाम से मेरी असहमति है। मैंने हजारों शीर्षक लिखे हैं। सैकडों कार्यक्रमों के नाम रखे हैं। मैं शायद यह नाम न रखता। मैंने ऐसा कभी नहीं किया। मैं हर जाति में न्यायप्रिय लोगों के होने की कामना करता हूँ। इसी सोच के तहत ज्योतिबा फुले ने अपनी किताब अमेरिका के उन गोरों को समर्पित की थी, जो ग़ुलामी प्रथा के खिलाफ लड़े। वी पी सिंह, सुरेंद्र मोहन, मधु दंडवते जैसे लोग हमारे लिए इसी वजह से आदर के पात्र हैं। जन्म के संयोग से बडा होता है कर्म। किसी जाति को निशाने पर लेना अनुचित है। ऑपरेशन भूमिहार नाम से असहमति है, तो उसे लोकतांत्रिक तरीके से जताएँ।
Community Journalism With Courage
ज़मीन से ज़मीन की बात 
भूमंत्र

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