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फिल्म 'चौहर' पर बाभनों के नाम 'चाणक्या वेलफेयर' का पैगाम !

chauhar

ये कहना गलत होगा कि फिल्म 'चौहर' चर्चा में है. दरअसल फिल्म कहीं चर्चा में नहीं है. हाँ फिल्म और फिल्मकार की गंदी मानसिकता की चर्चा सभ्य समाज में जरूर हो रही है और उसकी भर्त्सना भी हो रही है. 'प्रेम कहानी' के बहाने फिल्म में अनावश्यक रूप से एक जाति विशेष को निशाना बनाने की कुत्सित कोशिश की गयी है. उसके अलावा निर्माता ऐतराज करने वाले को सामंती कहकर उकसा भी रहे हैं. बहरहाल इस संबंध में सामाजिक संगठन 'चाणक्या वेळफेयर' ने फिल्म की भाषा और जातिवाचक शब्दों पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है और इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है. इस संबंध में संस्थान ने जनहित में एक अपील भी जारी की है और समाज को प्रजातान्त्रिक तरीके से बहिष्कार की अपील की है. पढ़िए चाणक्या वेलफेयर द्वारा जारी अपील - 

#चौहर फिल्म का विरोध करना है तो क्या करना और क्या नहीं करना है? 

-क्या न करें? 

1.कोई धरना-प्रदर्शन कर या पोस्टर फाड़ कर या मारपीट कर व्यर्थ की पब्लिसिटी न दे.वे यही चाहते हैं. 

2.मारधाड़ वाले बयान सोशल मीडिया पर जारी न करे.भड़ास निकालने के लिए अपने शब्द 'खर्च' मत कीजिये.बाकी आप खुद समझदार हैं और समझदार के लिए इशारा ही काफी होता है. 

3-चौहर फिल्म की चर्चा ऐसे आदमी से भूलकर भी न करे जो फिल्म के बारे में न जानता हो.कहने का अभिप्राय है कि आप मौखिक प्रचार के वाहक मत बनिए. 

-क्या करना है? 

1.कोर्ट में याचिका दायर कीजिये. फिल्म को कोर्ट में घसीटें. देश भर से जितनी याचिकाएं दायर कर सकते हैं दायर कीजिये. इस मामले में भू-समाज के वकील मदद कर सकते हैं. उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर इस मामले की अगुवाई करनी चाहिए. 

2-सेंसर बोर्ड को सामूहिक रूप से पत्र लिखकर 'बाभन' शब्द पर आपत्ति जताएं.फिल्म से 'बाभन' शब्द को हटाये जाने की मांग की जाए. या फिर निर्माता-निर्देशक साबित करे कि 'बाभन' अहंकारी होते हैं. सच्ची घटना के नाम पर झूठ का बवंडर नहीं खड़ा किया जा सकता.रचनात्मकता के नाम पर किसी जाति विशेष पर बदनीयती से चोट करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. 

3-अपने निकटवर्ती सिनेमाघर मालिकों से बात कीजिये और उन्हें अपने सिनेमाहॉल में फिल्म प्रदर्शित न करने के लिए 'हर तरीके' से समझाइये. 

4-यदि फिल्म रिलीज हो जाती है तो उसे बिलकुल न देखें और न किसी को देखने के लिए प्रेरित की. यकीन मानिए ये सी ग्रेड की फिल्म है. फिल्म का ट्रेलर देखकर ही इसका भान होता है. 

5-फिल्म के बारे यदि कोई चर्चा करे तो छूटते के साथ कहिये कि सुना है बड़ी बकवास मूवी है. ढंग का कोई एक्टर भी नहीं.ट्रेलर भी बकवास है. 

6-फिल्म रिलीज होने से पहले बाभन (भूमिहार ब्राहमण) समाज को दिखाया जाए और आपत्तियों पर बातचीत हो.निर्माता-निर्देशक समाज को संतुष्ट करे. 

(चाणक्या वेलफेयर द्वारा जनहित में जारी)

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