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भूमिहारों की पार्टी खड़ी होगी तो भूमिहारों का नेता भी खड़ा हो जाएगा बाबूजी !

संदर्भ - बाभनों की पार्टी तो बना लोगे, नेता कहां से लाओगे बाबूजी! 

गौरव कुमार सिंह के लेख पर भूमिपुत्र शैलेन्द्र का तर्क( विमर्श ) : भूमिहारों की अपनी पार्टी के सवाल पर भूमंत्र  पर विमर्श का दौर जारी है. पहले भूमिपुत्र शैलेन्द्र ने भूमिहार ब्राहमणों की पार्टी बनाने के पक्ष में तर्क दिए.फिर उसपर क्रिया-प्रतिक्रिया का दौर शुरू हुआ.भूमिपुत्र गौरव कुमार सिंह ने विमर्श को नयी दिशा देते हुए भूमिहार की पार्टी के नेतृत्व का मसला उठाया.इसपर अब 'शैलेन्द्र' ने अपनी बात रखी है. पढ़िए गौरव कुमार सिंह के सवाल 'भूमिहार पार्टी तो बना लेंगे, नेता कहाँ से लायेंगे?' पर 'शैलेन्द्र' का जवाब - भाजपा के भरोसे कब तक रहेंगे भूमिहार,बनाते क्यों नहीं अपनी पार्टी? (पार्ट-2)
bhumihar


शैलेन्द्र -

 भूमिहार पार्टी का मकसद जीतना नहीं,बल्कि राजनीतिक दलों को सबक सिखाना है 

गौरव कुमार सिंह जी का आलेख पढ़ा, भूमिहार पार्टी तो बना लेगा, नेता कहाँ से लाओगे? पढ़कर अच्छा लगा| उनका सवाल भी सही है | लेकिन मेरा मानना है कि नेता टपकेगा नही, नेता पैदा करना पड़ेगा| ये नेता जीतने के लिये नहीं, पटकनी देने के लिये चाहिए| दरअसल मेरे आलेख का तात्पर्य बिहार, उत्तरप्रदेश या केन्द्र की सत्ता पर काबिज होना नहीं है| चुनाव जीतना भी उद्देश्य नहीं है| हमारा एक मात्र उद्देश्य वैसे राजनीतिक पार्टियों को जगाना है जो भूमिहार वोट बैंक को अपनी  बपौती वोट समझते हैं और भूमिहारों को अपना मजबूर वोटर मानते हैं. तभी तो कभी गिरिराज सिंह को विरोध के बाद मंत्री बनाना, मनोज सिंहा का नाम C. M. के लिये उछालकर फिर C. M. न बनाना, पटना मे सुधीर शर्मा को बेईज्जत करना और भूमिहार को रावण कहना आदि उदाहरण सामने है.

फूट डालो और शासन करो की कूटनीति अपनानी होगी

दूसरी तरफ अन्य पार्टियां भी हम पर इसलिये आक्रमण करते हैं कि वो हमे भाजपा का वोटर मानते है| किन्तु जब हमलोगो, कुटनीति का उपयोग कर खुद संगठित होकर पार्टी बनाएंगे तो  दूसरे गठबंधन में दरार डालकर बिहार और यूपी में दंगल मचा सकते हैं| उसके लिए रणनीति के तहत हमें दूसरी जातियों को जोड़ने का प्रयास करना होगा.साथ ही जंगलराज व गुंडागर्दी आदि के मसले पर यादवों पर हमला भी करना पड़ेगा| साथ में राजनीतिक तापमान बढ़ाने के लिए कुछ शिगूफे भी छोड़ने पड़ेंगे| मसलन बिहार में 'चिराग पासवान' को मुख्यमंत्री बनाया जाए, जैसे मुद्दे उठाकर और उसका समर्थन करके दलित-पिछड़ा आदि करने वाले कई नेताओं और दलों की नींद हराम कर सकते हैं. फिर मौका मिलने पर पटखनी भी दे सकते हैं|

पार्टी और नेता खड़ा करने के लिए ग्रासरूट लेवल पर काम करने की जरूरत 

गौरव जी से इस बात पर सहमत हैं कि ग्रास रूट लेवल पर हमें काम करने की जरुरत है| इसके लिए पंचायत स्तर पर हम उम्मीदवारों को तैयार कर सकते हैं. वे उम्मीदवार अपने क्षेत्र के लोगों के दुःख-सुख में शामिल होकर जनता से जुड़ना अभी से शुरू कर दें| इसके लिये योग्यता के आधार पर युवाओं को आगे करना पड़ेगा जिसको हमारे समाज के बड़े वृक्ष (सांसद या उद्योगपति) संरक्षण दे और अगर वो संरक्षण नही देते है तो उनका भी विरोध करे | 

केंद्रीय नेतृत्व चुनाव न लड़कर युवाओं को चुनाव लड़ने में मदद करे 

दूसरी तरफ एक ऐसी केंद्रीय नेतृत्व हो जो तमाम निर्णय तो ले, लेकिन खुद चुनाव न लडे. ऐसा सत्ता और पद के मोहपाश से दूर रखने के लिए जरुरी है ताकि वे समाज और पार्टी के हित में सही समय पर सही निर्णय ले सके और व्यक्तिगत हित आड़े न आये| यह केंद्रीय नेतृत्व का समूह नए संभावनाशील युवा नेताओं को छांटे और चुनाव जीतने में उनकी मदद करे| तभी भविष्य में पार्टी खड़ी हो सकती है| अच्छी फसल के लिए पहले खेत में खाद-पानी देकर उन्नत बीज लगाना पड़ता है तभी अच्छी फसल की आशा की जा सकती है. बीज उन्नत किस्म के न हो तो चाहे कितना भी खाद-पानी कर लें, अपेक्षाकृत अच्छी फसल नहीं आएगी|

 भूमिहारों को बनाना होगा जातियों का राजनीतिक समीकरण  

आप देखियेगा कि जिस दिन भूमिहार सभी सवर्णो, मुस्लिम,पासवान आदि जातियों का समीकरण खड़ा करके चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर देगा, उसी दिन से भाजपा समेत तमाम दल आपके सामने घुटनों के बल आ जायेंगे. खासकर भारतीय जनता पार्टी आपको सुनने लगेगा. ऐसे भी अखिलेश और मायावती साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं तो ऐसे मे भाजपा कभी नही चाहेगा कि फारवर्ड वोट भी खिसक जाय| यादवों का वोट तो उन्हें बिहार और यूपी में वैसे भी नहीं मिलने वाला है, क्योंकि करिश्मा हर बार नहीं होता|

चाणक्य की नीति और करो या मरो रणनीति से ही भूमिहारों की नैय्या पार होगी

राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से हाल के वर्षों में सवर्ण समाज और उसमें भी खासकर भूमिहार समुदाय अपना बहुत कुछ खो चुका है| लेकिन अब वक़्त आ गया है जब चाणक्य की कूटनीति और करो या मरो की रणनीति पर चलकर इतिहास रचा जाए और अपने हक़ और सम्मान की लड़ाई की अमली जामा पहनाया जाए. क्योंकि अब नहीं तो फिर कभी नहीं. बाकी सारी बातें एक लेख में तो कही नहीं जा सकती और न कही जानी चाहिए, क्योंकि राजनीति में कुछ एजेंडे गुप्त ही रहने चाहिए और उनका खुलासा तभी हो जब उसे अमली जामा पहनाया जा चुका हो. इसलिए विमर्श का दौर जारी रहना चाहिए. पार्टी का रास्ता और पार्टी का नेता विमर्श की गलियों से ही निकलेगा. अंत में यही कि भूमिहारों की पार्टी आएगी तो भूमिहारों का नेता भी खड़ा हो जाएगा बाबूजी! चिंता नको| ✴स्टार विल बॉर्न✴

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ज़मीन से ज़मीन की बात 

भूमंत्र

Comments

Unknown said…
Apna party banane se thik hoga ki bihar me congress ko majboot kare kyon ki 1984 ke baad bihar me congress kamjor hai,dusre party ke aarop lagane se congress musalmaan ki party nahi ban jaygi.1984 me bihar ke mp ki list dekh lijiye pata chal jayega ki jab se bihar me congress kamjor hua tab se hum apni political power kho chuke hai,bihar me hi nahi desh me bhi jab jab bjp ki sarkar bani tab tab reservation ka badhaya jana 1991 me mandal commission k tahat 27 percent increasing in cental and state both level 1999 me reservation in promotion and minimum no type and other types of reservational benefits and in 2014 you can see easily condition of civil war of reservation and sc st act bycot the decision of honour supreme court lakin phir bhi hum kyo nahi samajh paa rahe hai ki hamare puruwaj kyon congress ko hi support karte rahe aur congress kyo itne saal tak raaj kiya? Is per sochne ki jarurat hai? Why bhumihar support bjp jdu when only congress party is always giving him honour?
Unknown said…
phir bhi agar aapko lagta hai ki congress is not better then then you can also support your caste from your constituency like other community yadav and rajput cast their vote to his caste for saving his political infulance.in 2014 bjp gives only 2 ticket to bhumihar community rjd dont give ticket to bhumihar.so ham ko yah nahi bhulna chahiye ki hum ko mp and mla chunne ka power hai pm and cm chun ne power hai so vote yah soch kar de ki politics me hamara political infulance bana rahe chahae sarkar kisi ki bhi kyo na ho.pd.jawaharlal nehru ne na jane kitni bar kasi naresh k family ko politics me aane ke liye request kiya per raj parivaar iske raji nahi hua.1st cm of bihar sri krishna singh aane wale dino ko dekh ye decision liya ki bhumihar ko harijan me rakh de lakin na jane kyo ham ko yah bhi manjoor na ho saka hame lagta tha ki yah hamare status per parega aur aaj dekhiye upper caste demanding reservation for each and every parts of country.pahle jab bihar and jharkhand ek tha tab hamari population only 2.9 percent of bihar populatin but after breaking jharkhand the bhumihar population grows up 6 percent of bihar population lakin hum tub politically majboot rahe due to unity and congress but aaj kamjor ho gaye due to losing our unity and political power,aab yahan tak ki koi bhi party bhumihar bahul area me bhumihar ko ticket nahi dena chahti ,congress ke alawa? Yeh sochne ka vissay?phir bhi wah party jeetne me safal ho rahi hai? Kyo hum apna vote barbad kar rahe hai kabhi hindu party ke naam par to kabhi hindutwa ke naam per ham ko ye kabhi nahi bhulna hai ki what we are... And what we now?
Unknown said…
Neta ki Kami nhi hai

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