Skip to main content

‘भूमिहार जनता पार्टी’ को ‘भारतीय जनता पार्टी’ से है खतरा !

bhumihar

भूमिहारों की अपनी पार्टी के संदर्भ में विचार मंथन का दौर अब उसकी चुनौतियों और समस्याओं पर आ टिका है. इस संदर्भ में चित्रांश शर्मा ने अपने लेख में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया. उन्होंने लिखा – 

“पार्टी बनाने के बाद विरोधियों द्वारा उस पर कठोर हमले किये जायेंगे। सबसे कड़ा हमला होगा भाजपा की ओर से जिसका भूमिहार समाज अभी समर्थन कर रहा है। विरोध करना भी लाज़मी है क्योंकि भूमिहार ब्राह्मण भाजपा का ठोस वोट बैंक है जिसे किसी भी हालत में वह खोना नहीं चाहेगी। बेबुनियाद दुष्प्रचार किये जायेंगे वो भी सामने से नहीं दलालों के माध्यम से। आम जनता भी अपनी परंपरागत राजनीतिक पार्टी को इतनी आसानी से छोड़ना नहीं चाहेगी।इसलिए जल्दबाजी में लिया गया निर्णय आत्मघाती होगा।“ 

चित्रांस द्वारा कही गयी बात में दम है. दरअसल भूमिहार पार्टी बनाने का मतलब होगा भाजपा को सीधी टक्कर देना और उस वोट बैंक को उससे छीन लेना जिसपर उसका सीधा नियंत्रण है. इससे यदि ‘भूमिहार जनता पार्टी’ खड़ी हो जाती है तो फिर उस वोट बैंक के लिए भाजपा को भूमिहार पार्टी के सामने हाथ फैलाना पड़ेगा और समझौता भी करना पड़ेगा. वहां भाजपा की स्थिति कमजोर होगी और भूमिहार पार्टी समाज के हित को ध्यान में रखते हुए उनसे ज्यादा-से-ज्यादा बार्गेन कर सकते हैं. 

भाजपा ऐसी स्थिति पैदा होना नहीं देना चाहेगी और भूमिहार पार्टी की राह में रोड़ा अटकाएगी। वह नहीं चाहेगी कि ऐसी कोई पार्टी बने और उसका परंपरागत वोट बैंक टूटे। इसके लिए वो साम,दाम,दंड,भेद सारी नीतियों को अपनाएगी। सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इसके लिए भूमिहारों को ही आगे किया जाएगा। ये एक खतरनाक स्थिति होगी और आरोप-प्रत्यारोपों के जाल में उलझाकर भूमिहार समुदाय की पार्टी को बनने से पहले ही तोड़ने का षड्यंत्र रचा जाएगा. 

भाजपा के अलावा कुछ दूसरी बड़ी पार्टियाँ भी ऐसा कर सकती है. हालाँकि उनके खतरे से निपटना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा. लेकिन ‘भूमिहार जनता पार्टी’ को असल चुनौती ‘भारतीय जनता पार्टी’ से ही मिलेगी. उसकी राह का वही सबसे बड़ा रोड़ा है.लेकिन यदि एक बार पार्टी खड़ी हो गयी तो फिर भारतीय जनता पार्टी ही भूमिहार जनता पार्टी से गठबंधन के लिए लालायित हो जायेगी. लेकिन एक बार टकराव जरुर होगा और उस चोट को पार्टी ने झेल लिया तो फिर जीत मुठ्ठी में. जारी.......  (भारतीय जनता पार्टी को भूमिहार जनता पार्टी ही तो करना है : क्रमशः )

Community Journalism With Courage

ज़मीन से ज़मीन की बात 

भूमंत्र

Comments

Popular posts from this blog

पिताजी के निधन पर गमगीन कन्हैया के चेहरे का नूर !

सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन तस्वीर है कि यकीन करने पर मजबूर करती है. आपको जैसा कि पता ही है कि छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आए कन्हैया के पिता का निधन हो गया था. इस दौरान उनकी तस्वीर भी न्यूज़ मीडिया में आयी थी जिसमें कि वे फूट-फूट कर रो रहे थे. समर्थक और विरोधी सबने दुःख की घड़ी में दुआ की और एक अच्छे इंसान की भी यही निशानी है कि वो ऐसे वक्त पर ऐसी ही संवेदना दिखाए.

बेगूसराय की इस भूमिपुत्री ने 18 साल की उम्र में कर दिया कमाल, पढेंगे तो इस बिटिया पर आपको भी होगा नाज!

प्रेरणादायक खबर : बेटियों पर नाज कीजिए, उन्हें यह खबर पढाईए
बेगूसराय. प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती. बेगूसराय के बिहटा की भूमिपुत्री प्रियंका ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. 18 साल की उम्र में प्रियंका इसरो की वैज्ञानिक बन गयी हैं. आप सोंच रहे होंगे कि वे किसी धनाढ्य और स्थापित परिवार से संबद्ध रखती हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके पिता राजीव कुमार सिंह रेलवे में गार्ड की नौकरी करते हैं और मां प्रतिभा कुमारी शिक्षिका हैं. वे बिहटा के एक साधारण भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इस मायने में उनकी सफलता उल्लेखनीय है.  पढाई-लिखाई :  1-दसवी और 12वीं : वर्ष 2006 में 'डीएवी एचएफसी' से दसवीं और वर्ष 2008 में 12वीं  2-बीटेक : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अगरतला  3-एमटेक : एमटेक की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी से पूरा कर रही हैं  सफलताएं :  1- वर्ष 2009 में एआईईई की परीक्षा में 22419वां रैंक  2- वर्ष 2016 में गेट की परीक्षा में 1604वां रैंक  3- शोध पत्र 'वायरलेस इसीजी इन इंटरनेशनल' जर्नल ऑफ रिसर्च एंड साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग म…

सेनारी नरसंहार को देख जब भगवान भी काँप गए,17 साल से बंद है मंदिर

मंदिर भगवान का घर होता है लेकिन उस मंदिर में जाकर कोई कुकृत्य करे तो भगवान भी नाराज़ हो जाते हैं और अपने द्वार बंद कर देते हैं. 
बिहार के अरवल जिले के सेनारी गांव में 17 साल पहले ऐसा ही हुआ जब मंदिर रक्तरंजित हो गया और उस घटना को देख भगवान भी एक बार काँप गए होंगे.लेकिन प्रभु से ये मासूम जिज्ञासा भी है कि अपने सामने ऐसा अनर्थ उन्होंने होने कैसे दिया? 
सेनारी में 17 साल पहले गाँव के इसी मंदिर में चुन-चुनकर 34 भू-किसानों की हत्या एक के बाद एक कर हुई थी. ह्त्या का तरीका भी बेहद निर्मम और दिल दहलाने वाला था. 
सभी 34 लोगों की हत्या गला रेत कर गाँव के मंदिर के द्वार पर की गयी थी. तब से आज तक उस मंदिर के द्वार बंद हैं. गांव के लोगों ने इस मंदिर में पूजा पाठ करना बंद कर दिया है. 
ग्रामीणों के मुताबिक भगवान के द्वार पर लोगों की हत्या कर दी गई है. लिहाजा मंदिर में पूजा करने का क्या फायदा ? अब पिछले 17 सालों में यह मंदिर वीरान पड़ा हुआ है.