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छोटे सरकार की रिहाई के रास्ते में रुकावट डालने के लिए बड़े सरकार ने झोंक दी पूरी ताकत !

अनंत सिंह की रिहाई पर ग्रहण के बादल, तत्काल नहीं हो पायेंगे रिहा

प्रतीकात्मक तस्वीर - फ़ाइल फूटेज
उनका उपनाम भले छोटे सरकार हो, लेकिन वे बड़े सरकार के भी सरकार हैं. इसलिए छोटे सरकार को देखते ही बड़े सरकार को पसीना आ जाता है. जी हाँ हम बात कर रहे हैं बिहार के टाल क्षेत्र के किसानों के मसीहा और मोकामा के निर्दलीय विधायक 'अनंत सिंह' की. 

जैसा कि आप जानते ही हैं कि अनंत सिंह पर बिहार सरकार ने सीसीए लगाया था जिसे पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. उसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ़ हो गया और उम्मीद जताई जा रही थी कि शुक्रवार तक उनकी रिहाई हो जायेगी. इस खबर से एक तरफ समर्थकों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गयी तो दूसरी तरफ बिहार की सियासत में हडकंप मच गया. महाबली को निकलते देख बिहार सरकार को पसीना आ गया. 

फिर क्या था शुरू हो गया साजिशों का दौर. बिहार सरकार ने अपने पूरे तंत्र को महाबली का रास्ता काटने की मुहिम में लगा दिया. फिर भी जब रोक नहीं पाए तो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी का एक गडा मुर्दा उखाड़ लाये जिससे अनंत सिंह की रिहाई रूक जाए. 

दरअसल ये मामला पुराना है और तब का है जब जीतन राम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री थे तब अनंत सिंह टेलीविजन पर बेख़ौफ़ अंदाज़ में जीतन राम मांझी को पीटने की धमकी दी थी और कहा था कि जीतनराम मांझी सीएम के लायक व्यक्ति नहीं है और पार्टी से गलती हो गयी. उस समय वे जेडीयू में ही थे. उसके बाद वर्ष 2015 में जीतनराम मांझी के भांजे ने उपेंद्र मांझी ने खिजरसराय थाने में अनंत सिंह के खिलाफ धारा 506, एससी-एसटी एक्ट आदि के तहत एफआईआर दर्ज (33/15) कराई थी. आरोप लगाया था कि 11 फरवरी 2015 को न्यूज चैनल पर अनंत सिंह ने उनके मामा जीतन राम मांझी के खिलाफ जातिसूचक शब्द, गाली गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी.

उसी मामले में अब बिहार पुलिस अनंत सिंह को रिमांड में लेने की तैयारी कर रही है ताकि उनकी रिहाई का रास्ता बंद हो सके.मतलब साफ़ है कि छोटे सरकार की रिहाई के रास्ते में रुकावट डालने के लिए बिहार के 'बड़े सरकार' ने पूरी ताकत झोंक दी है! लेकिन आंधी,पानी और महाबली को कोई अबतक रोक पाया है जो अब रोक पायेगा. सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं. पढ़िए इस संदर्भ में हिन्दुस्तान में छपी खबर -
anant singh

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