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सुकमा में अपने भूमिपुत्र ने भी दिया बलिदान, इस रणवीर की दास्तान सुनकर रो पड़ेंगे आप

sukma abhay kumar
सुकमा में शहीद 25 जवानों में भूमिपुत्र अभय कुमार चौधरी भी हैं. वे बिहार के वैशाली जिले के जंदाहा के लोमा गाँव के हैं. उनकी शहादत की खबर सुनकर शोकाकुल परिवार के साथ पूरा गाँव सन्नाटे में है. न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दिन पहले ही वे अपने पैतृक गाँव आये थे और वहां हंसी-ख़ुशी वक़्त बिताया था.अभय कुमार के गांव और उनके रिश्तेदारों को इस खबर पर विश्वास नहीं हो रहा है. अभी कुछ ही पहले अभय छुट्टी मनाकर वापस ड्यूटी पर लौटे थे. लेकिन 25 दिन बाद ही उनके शहीद होने की खबर आई. 

अभय की एक साल पहले ही शादी हुई थी. उनकी शादी मार्च 2016 में मुजफ्फरपुर जिला के सोनवर्षा महमदपुर की तान्या के साथ हुई थी. पति के शहीद होने की खबर के बाद पत्नी बार बार बेहोश हो जा रही हैं और जब भी होश आता है तो फिर रोने लगती हैं.अभय के दो और भाई तिब्बत सेना और सीआरपीएफ में तैनात हैं.

2010 में अभय ने सीआरपीएफ ज्वाइंन किया था. पिता की मौत के बाद परिवार के जिम्मेदारी अभय के कंधों पर दी थी. अभय के पिता का नाम विश्वनाथ चौधरी है जो किसान थे जिनकी वर्ष 1991 में गांव में हत्या कर दी गई थी. छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है. पूरे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है. गांव वालों ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक सरकार नक्सलियों के हाथों अपने जवानों को शहीद कराती रहेगी. कड़े कदम उठाने चाहिए. 

पूरे घटनाक्रम पर रूद्र सेना के आलोक कुमार प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखते हैं -

2019 के चुनाव में क्या बोलेंगे मोदी जी , उरी याद है , पठानकोट याद है , सुकमा याद है । 

बिहार वैशाली का लाल अभय कुमार शहीद हो गया , बड़ा भाई भी था फ़ौज में वो भी शहीद हो चूका है । पिता की हत्या बचपन में ही कर दी गयी थी । अब इनके जैसे सैनिकों के परिवार का कौन रखवाला होगा ?? कल परसो तक राज्य और केंद्र सरकार 2-2 लाख रूपये की भीख की घोषणा कर देंगे । और इनकी विधवाएं पेंसन और भीख के पैसे के लिए ऑफिस ऑफिस भटकेगी । हम भारतवासी सरकार से मांग करते हैं कि हर शहीद के परिवार को 1करोड़ रुपया दिया जाय और यही राशि हर शहीद के लिए लागू कर दी जाए । सरकार खिलाडियों के लिए करोडो के तोहफे देती है लेकिन जो हमारी रक्षा करता है उसके लिए भीख । अगर सरकार ऐसा नही करती है तो हर क्षेत्र के विधायक और सांसद को भारत के नागरिक अपने अपने क्षेत्र में बंदी बना लेंगे । और सरकार के मुह पर कालिख पोत देंगे ।

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ज़मीन से ज़मीन की बात 
भूमंत्र 

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