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अमिताभ ठाकुर पर दुष्कर्म का मामला फर्जी साबित, समाजवादी पार्टी का घिनौना चेहरा सामने आया

अमिताभ ठाकुर को फंसाने की मुलायम यादव की चाल का पर्दाफास

amitabh thakur

महिला के साथ दुष्कर्म के झूठे मामले में आईपीएस अमिताभ ठाकुर को फंसाया गया था. भाजपा की सरकार आते ही सपा सरकार के इस झूठ का पर्दाफाश हो गया है. गौरतलब है कि अमिताभ ठाकुर ने 11 जुलाई, 2016 को मुलायम सिंह यादव के खिलाफ फोन पर धमकी देने का केस लिखवाया था. उसके बाद ठीक उसी दिन गाजियाबाद निवासी एक महिला ने अमिताभ व उनकी पत्नी के खिलाफ रेप का केस लिखवा दिया था.

लेकिन 8 महीने बाद पुलिस ने अपनी जांच में रेप की शिकायत को झूठा पाया.इस मामले की जांच कर रहे सीओ गोमतीनगर सत्यसेन यादव मामले में पीड़ित के बयानों में विरोधाभास पाते हुए मुकदमे को झूठा माना था.अब दुष्कर्म का फर्जी मुकदमा लिखवाने वाली महिला के खिलाफ गोमतीनगर पुलिस ने धारा 182 के तहत मामला दर्ज करके कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है.पुलिस ने मुकदमा लिखवाने वाली गाजियाबाद की महिला के खिलाफ धारा 182 आईपीसी में कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की है. कथित पीड़िता के मोबाइल कॉल डिटेल्स और इस प्रकरण में उपनिरीक्षक राम राज कुशवाहा की जांच से भी इस तरह की कोई घटना नहीं होनी पाई गई. वादिनी द्वारा झूठे और भ्रामक तथ्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसके लिए उसके खिलाफ धारा 182 आईपीसी में कार्यवाही करने की संस्तुति की गई. सिटी एसपी (ट्रांस गोमती) ने इस रिपोर्ट को न्यायालय स्पेशल कोर्ट, एससी एसटी एक्ट, लखनऊ को प्रेषित किया. 

इसी मुद्दे पर रिसर्च स्कॉलर 'अखंड प्रताप राय' सोशल मीडिया पर लिखते हैं - 

सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं हो सकता 

अमिताभ ठाकुर पर छेड़खानी के आरोप के मामले की जांच करने वाले डीएसपी "सत्यसेन यादव " ने अपनी जांच में आरोप लगाने वाली महिला की शिकायत को एक सिरे से खारिज कर के उस महिला पर ही झुठी शिकायत का मुकदमा दर्ज किया था सपा शासन काल में ही उसी मुकदमे की पैरवी के लिए लखनऊ आयी उस महिला ने कोर्ट के सामने अपने बयान में साफ-साफ कहा की वो अमिताभ ठाकुर को जानती तक नहीं है और ना ही उसने उनके खिलाफ कोई शिकायत की है , मुलायम सिंह पर धमकी देने का एफआईआर जब अमिताभ ठाकुर ने कराया था उसी दिन सपा के जिलाध्यक्ष ने उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर करवा के ये मनगढ़ंत एफआईआर अमिताभ ठाकुर के खिलाफ लिखवाया था धुर्त सपाई ये भूल गए थे कि " सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं हो सकता "

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