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Showing posts from March, 2017

बिहार के बाभनों का विनाश करेंगे सिनेमाई लौंडे, देखिये तो इन पोस्टरबाजों को?

फिल्म 'चौहर' में 'बाभन' शब्द का आपत्तिजनक प्रयोग
भूमिहार ब्राह्मणों के मान-मर्दन की असफल कोशिशें लंबे समय से चल रही है. राजनीति के मैदान में उठा-पटक के अलावा मीडिया,साहित्य और सिनेमा के माध्यम से भी लगातार हमले होते रहे हैं. इसमें भूमिहार ब्राह्मणों (बाभन) को नकरात्मक तरीके से पेश किया जाता रहा है. इसी की अगली कड़ी है बचकानी फिल्म - "चौहर". इसमें बाभन लड़की और पासवान लड़के के प्रेम प्रसंग को दिखाया गया.फिल्म के ट्रेलर में बाभन शब्द का प्रयोग किया गया है और अहंकार तोड़ने का संवाद भी है.कोई शक नहीं कि घटिया सोंच के साथ बनायीं गयी ये एक बकवास मूवी है और इसे ज्यादा तूल देना फिल्म को हाईलाईट करना होगा. लेकिन बाभनों को लेकर किस तरह की साजिशें चल रही है उसका परदाफाश करने के लिए भू-मंत्र पर ये खबर डाली जा रही है. कहने का मतलब है कि जिन बाभनों का विनाश 15 साल में पूरी ताकत भी झोंककर सरकार नहीं कर पायी, वो काम अब सिनेमाई लौंडे करेंगे, आश्चर्य! 
फिल्म का ट्रेलर -

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VIDEO - NEWS24 से जानिये कि मनोज सिन्हा में स्पेशल क्या है?

उत्तरप्रदेश चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत मिला तो मुख्यमंत्री के रूप में सबसे ज्यादा नाम केन्द्रीय मंत्री 'मनोज सिन्हा' का ही लिया गया.इसी क्रम में चैनलों पर उन्हें लेकर कई ख़बरें की गयी जिसमें उनकी खासियत बताई गयी. ऐसी ही एक खबर हिंदी न्यूज़ चैनल न्यूज़24 पर भी की गयी. उसी स्टोरी को भू-मंत्र पर हम पेश कर रहे हैं. देखिये मनोज सिन्हा में क्या है स्पेशल?
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चीन को जवाब देंगे रेल मंत्री मनोज सिन्हा!

केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्‍हा और किरण रिजिजू तवांग जायेंगे, रेल नेटवर्क की संभावनाएं तलाशेंगे
अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन और भारत में लंबे समय से तनातनी है.चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना हक़ लंबे समय से जताता रहा है और उसे जब भी मौका मिलता है तो अतिक्रमण से चूकता नहीं. इसी के मद्देनज़र भारत सरकार ने इस क्षेत्र को रेल लाइन से जोड़ने की योजना बनायी है और तवांग तक रेल नेटवर्क तैयार करने का ब्‍लू प्रिंट तैयार किया गया है और इसकी संभावना तलाशने की जिम्‍मेदारी केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्‍हा और किरण रिजिजू को सौंपी गई है.
गौरतलब है कि तवांग रेल नेटवर्क का रणनीतिक और सामरिक महत्व भी है. रेल नेटवर्क की संभावनाएं तलाशने के लिए शनिवार को दोनों मंत्री अरुणाचल प्रदेश जाएंगे. मौजूदा समय में असम के आखिरी रेलवे स्‍टेशन भालूखपोंग से लेकर तवांग तक बनने वाली रेलवे लाइन के लिए यहां संभावना तलाशी जाएगी. इन दोनों के बीच करीब 378 किमी की दूरी है.सड़क मार्ग से इस दूरी को पूरा करने में करीब 18 घंटे का समय लगता है. यहां का सबसे नजदीक और बड़ा स्‍टेशन गुवाहाटी है. लिहाजा किसी तरह की इमरजेंसी में यहां के लोगों को इस प…

रामजन्म भूमि मामले में उच्चतम न्यायालय की सुब्रमण्यम स्वामी को खरी-खरी

रामजन्म भूमि मामले में जल्दी सुनवाई से उच्चतम न्यायालय का इंकार
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने आज रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में जल्दी सुनवाई से इंकार कर दिया. इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एक याचिका दायर की थी.उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्वामी की जल्दी सुनवाई की याचिका से इन्कार करते हुए उन्हें पक्षकार न मानने के साथ ही समय की कमी बताते हुए जल्द सुनवाई के अनुरोध से इन्कार कर दिया .न्यायालय में सुनवाई के दौरान इस मामले के पक्षकारों की दलील थी कि स्वामी इस मुकदमें में पक्ष नहीं है, न्यायालय ने स्वामी से कहा कि हमें अापने यह जानकारी नहीं दी कि आप मुख्य मुकदमे में पक्ष नहीं है. Community Journalism With Courage ज़मीन से ज़मीन की बात

भाजपा के भरोसे कब तक रहेंगे भूमिहार,बनाते क्यों नहीं अपनी पार्टी?

एक ज़माना पहले भूमिहार समाज और बिहार की राजनीति एक-दूसरे के पर्याय थे. लेकिन फिर एक आंधी आयी और उसमें सबकुछ उड़ता चला गया.जब गुबार छंटा तो भूमिहार ब्राह्मण राजनीति में हाशिये पर जा चुके थे. जानिये 'शैलेन्द्र' की जुबानी पूरी कहानी (परशुराम)
1977 तक बिहार की राजनीति में भूमिहारों का वर्चस्व - भूमिहार समाज आज राजनीति में हाशिये पर है.लेकिन एक वक़्त था जब भूमिहार ब्राह्मणों की राजनीति में तूती बोलती थी.भारत की आज़ादी के बाद बिहार जैसे प्रदेश में तो पूरी राजनीति ही भूमिहारों के इर्द-गिर्द ही घूमती रही . यही वजह रही कि बिहार की राजनीति में 1977 तक श्रीकृष्ण बाबू के रूप में सिर्फ एक मुख्यमंत्री बनने के बावजूद भूमिहार विधायकों की संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा रही. 
भूमिहारों ने की ऐतिहासिक भूल - लेकिन 1977 के बाद से स्थितियां बदलने लगी. बिहार की राजनीति बदलने लगी. भूमिहारों के खिलाफ कई दूसरी जातियां लामबंद होने लगी.फिर भी भूमिहार विधायकों की संख्या में कोई ख़ास कमी नहीं आयी. लेकिन इसी दौरान एक ऐसा मोड़ आया जिसने पूरी सियासत का रूख पलट दिया. भू-समाज ने एक ऐतिहासिक गलती की. 1992 में कांग्रेस को …

वोडाफोन और आइडिया को दूरसंचार नियमों का पालन करना होगा - मनोज सिन्हा

वोडाफोन और आइडिया को विलय के दौरान नियमों का अनुपालन करना है. कोई विशेष व्यवहार नहीं होगा. - मनोज सिन्हा,दूरसंचार मंत्री
जियो के आने के बाद दूरसंचार क्षेत्र की पूरी तस्वीर ही बदल गयी. मजबूरन में इस क्षेत्र में मौजूद कई कंपनियों को अपना वजूद बचाने के लिए नए सिरे से सोंचना पड़ा. इसी कड़ी में वोडाफोन और आइडिया ने आपस में विलय का फैसला लिया. इस विलय के बाद ये देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बन जायेगी. लेकिन सरकार ने आगाह किया है कि इन्हें पूरी तरह से नियमों का पालन करना होगा. इसमें कोई रियायत नहीं मिलेगी.कंपनियों को स्पेक्ट्रम, ग्राहक और आय सीमा के संदर्भ में मौजूदा नियमों का पालन करना होगा. 
दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा, ‘उन्हें नियमों का अनुपालन करना है. कोई विशेष व्यवहार नहीं होगा.’ उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में विलय और अधिग्रहण से दूरसंचार क्षेत्र में साठगांठ की आशंका नहीं है. 
सिन्हा ने कहा, ‘विलय-अधिग्रहण के बाद प्रत्येक सेवा क्षेत्र में 5-6 कंपनियां होंगी. इसीलिए साठगांठ की कोई संभावना नहीं है. साथ ही आय सीमा, ग्राहक सीमा तथा स्पेक्ट्रम सीमा को लेकर दिशा निर्देश हैं जिससे स…

यादवों के ट्रांसफर को लेकर हंगामा करने वालों नूतन ठाकुर का ये आरटीआई पढो

आरटीआई: अखिलेश राज में 2454 आईपीएस के तबादले
उत्तर प्रदेश में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अफसरों की कुल संख्या 407 है. इसके विपरीत अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री काल में मार्च 2012 से मार्च 2017 की अवधि में उत्तर प्रदेश में कुल 2454 आईपीएस अधिकारियों के तबादले हुए थे. यह तथ्य आरटीआई कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर को आईजी कार्मिक, उत्तर प्रदेश पी सी मीना द्वारा दी गयी सूचना से सामने आया है. 
आरटीआई सूचना के अनुसार यूपी में 78 आईपीएस अफसर ऐसे हैं जिनका इस 5 साल की अवधि में 10 या उससे अधिक बार तबादला हुआ. इनमे उमेश कुमार श्रीवास्तव के सर्वाधिक 20 तबादले हुए जबकि अनीस अहमद अंसारी का 18, राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय का 17 तथा दिलीप कुमार का 16 बार तबादला हुआ. हाल में निलंबित हुए हिमांशु कुमार सहित 05 आईपीएस अफसरों का 5 वर्षों में 15 बार तबादला हुआ. अखिलेश राज में 215 आईपीएस अफसरों का 05 या उससे अधिक बार तबादला हुआ. इस अवधि में सबसे कम तबादला होने वालों में संजय तरडे (एक बार सीबी-सीआईडी) और कमल सक्सेना (एक बार गृह विभाग) रहे जिनका पूरे काल में एक ही बार तबादला हुआ. 
आरटीआई सूचना के अनुसार इस अवध…

अमिताभ ठाकुर पर दुष्कर्म का मामला फर्जी साबित, समाजवादी पार्टी का घिनौना चेहरा सामने आया

अमिताभ ठाकुर को फंसाने की मुलायम यादव की चाल का पर्दाफास
महिला के साथ दुष्कर्मके झूठे मामले में आईपीएस अमिताभ ठाकुर को फंसाया गया था. भाजपा की सरकार आते ही सपा सरकार के इस झूठ का पर्दाफाश हो गया है. गौरतलब है कि अमिताभ ठाकुर ने 11 जुलाई, 2016 को मुलायम सिंह यादव के खिलाफ फोन पर धमकी देने का केस लिखवाया था. उसके बाद ठीक उसी दिन गाजियाबाद निवासी एक महिला ने अमिताभ व उनकी पत्नी के खिलाफ रेप का केस लिखवा दिया था.
लेकिन 8 महीने बाद पुलिस ने अपनी जांच में रेप की शिकायत को झूठा पाया.इस मामले की जांच कर रहे सीओ गोमतीनगर सत्यसेन यादव मामले में पीड़ित के बयानों में विरोधाभास पाते हुए मुकदमे को झूठा माना था.अब दुष्कर्म का फर्जी मुकदमा लिखवाने वाली महिला के खिलाफ गोमतीनगर पुलिस ने धारा 182 के तहत मामला दर्ज करके कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है.पुलिस ने मुकदमा लिखवाने वाली गाजियाबाद की महिला के खिलाफ धारा 182 आईपीसी में कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की है. कथित पीड़िता के मोबाइल कॉल डिटेल्स और इस प्रकरण में उपनिरीक्षक राम राज कुशवाहा की जांच से भी इस तरह की कोई घटना नहीं होनी पाई गई. वाद…

नेहा शर्मा की चाहत चुनौतीपूर्ण किरदार

मुबारकां में नेहा शर्मा
लंबे अरसे के बाद नेहा शर्मा फिर से बॉलीवुड के रूपपहले परदे पर दिखाई देने वाली हैं.वो आखिरी बार फिल्म तुम बिन-2 में नजर आयी थीं.लेकिन अब वह जल्द ही अनीस बज्मी की फिल्म ‘मुबारकां’ में एक विशेष रोल में नजर आयेंगी.'मुबारकां' में अनिल कपूर, अर्जुन कपूर, इलियाना डी क्रूज और आथिया शेट्टी मुख्य भूमिकाओं में होंगे. 
पत्रकारों से बात करते हुए नेहा ने कहा कि वह फिल्मों में चुनौतीपूर्ण किरदार निभाना चाहती है.इसलिए कहानी के चयन में बहुत सावधानी बरतती हैं.दिलचस्प और छू लेने वाले रोल को ही करना वे पसंद करती हैं.इसलिए विकल्प सीमित हो जाते हैं.लेकिन जल्द ही वे कुछ करने जा रही हैं जिसपर बाद में बात करेंगी. 
नेहा ने अबतक इन हिंदी फिल्मों में काम किया है - क्रूक,तेरी मेरी कहानी,क्या सुपर कूल हैं हम,जयंता भाई की लव स्टॉरी,यमला पगला दीवाना,यंगिस्तान,हेरा-फेरी 3, कृति,तुम बिन 2 

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VIDEO : योगी के एक्शन से आफत में यूपी के माफिया डॉन

उत्तरप्रदेश की सियासत में माफिया सरगनाओं का दखल रहा है. यही वजह है कि इनका अबतक कोई भी बाल-बांका नहीं कर पाया. इनकी पहुँच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जेल को भी ये अपने दूसरे ठिकाने की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं. लेकिन योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही हवा का रुख बदलने लगा है और माफिया डॉन अपने आप को आफत में महसूस कर रहा है. देखिये इंडिया टीवी की एक रिपोर्ट -

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डॉन तुम्हारा ये डर मनोज सिन्हा के प्रजातंत्र को अच्छा लगा !

मुख्तार अंसारी को मनोज सिन्हा से लगता है डर
कुख्यात मुख्तार अंसारी एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. हालाँकि इस बार न उसने कोई कारनामा किया है और न ही राजनीति में कोई पासा फेंका है जिसकी वजह से वह सुर्ख़ियों में आये. इस बार अपने डर की वजह से वो ख़बरों में है. उसे डर है अपनी मौत का. उसे ये डर है कि उसकी कहीं हत्या न कर दी जाए. तो दूसरों को डराने वाला पहली बार खुद डरा हुआ है और डॉन का ये डर दुनिया को अच्छा लग रहा है.
तभी सोशल मीडिया पर पवन गोपाल लिखते हैं - "कोई माने न माने आज मैं गर्व से कह सकता हूँ कि वे लोग जो किसी को कभी भी कही भी मार दिया करते थे आज वो डरते है." 
वही सोशल मीडिया पर विनोद राय नाम के एक यूजर लिखते हैं -  "अरे साहब,आप तो बहुत बहादुर रहे है,सुना था कि आपके हाथ ईश्वर से भी लम्बे है ये कानून क्या चीज है?मौत के वारंट पर आपही के दस्तखत होते थे और ये क्या सुन रहा हू?अभी तो पहली झांकी है अभी तिहाड़ जाना" 
वही BM आईडी से लिखा गया -  "मनोज सिन्हा अपने वायदे के पक्के हैं. उन्होंने कहा था कि कृष्णानंद राय के हत्यारों को चैन से जीने नहीं दूंगा.देखिये मुख्तार अ…

VIDEO : मुख्तार अंसारी का मनोज सिन्हा पर आरोप

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डॉन को मनोज सिन्हा से लगता है डर, 'योगी' से मांगे पनाह

मुख्तार अंसारी का आरोप, पुलिस कस्टडी में हो सकती है उसकी हत्या
सियासत बदलते ही मुख्तार अंसारी नाम के डॉन को भी पसीना आ गया. सपा और बसपा की सरकार में जेल में मूंछ पर ताव देने वाले मुख्तार अंसारी को आज जान का डर सता रहा है. जान का डर भी किससे ? सुनेंगे तो हंस पड़ेंगे? उसे जान का खतरा है केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा से. हंसी आयी न :) आनी भी चाहिए. मनोज सिन्हा जैसे साफ़-सुथरी और पढ़े-लिखे राजनेता से डॉन का डरना प्रजातंत्र की जीत है.वर्ना तो पुलिस महकमा और सरकार भी ऐसे कुख्यात अपराधियों के आगे पनाह मांगती है. 
बहरहाल आज मउ से विधायक मुख्तार अंसारी ने आरोप लगाया कि, 'मनोज सिन्हा और बाहुबली बृजेश सिंह उनकी हत्या कराना चाहते हैं. इन दोनों को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का संरक्षण प्राप्त है.इसी साजिश के तहत मेरा ट्रांसफर लखनऊ से आगरा जेल किया जा रहा है.'आज विधानसभा में शपथ लेने के लिए अंसारी को लाया गया था.उसी वक़्त टीवी चैनल से बात करते हुए मुख्तार ने कही. 
मुख्तार ने कहा कि पेशी के दौरान उन्हें आने जाने में काफी दूरी का सामना करना पड़ेगा. जिसका पूरा फायदा ये लोग उठा सकते हैं. इन …

भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री बने भू-समाज के भारतेंदु कुमार

भारतेंदु कुमार को भाजपा जनता युवा मोर्चा में अहम् ज़िम्मेदारी
नयी दिल्ली.राजनीति में जब भू-समाज हाशिए पर जा रहे हैं तो कुछ युवा अब भी अलख जगा रहे हैं. ऐसे ही एक युवा हैं भारतेंदु कुमार. उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है. ये सूची भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम महाजन ने मंगलवार देर रात जारी की.इस सूची में राष्ट्रीय मंत्री के रूप में भारतेंदु कुमार का नाम भी शामिल हैं. भारतेंदु मूलतः बिहार मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं. भू-समाज की तरफ से उन्हें ढेरों बधाई.
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सरदार वल्लभभाई पटेल विश्व मानवता के प्रेरणास्त्रोत : डॉ.अरुण कुमार

सरदार वल्लभभाई पटेल के कार्यक्रम में जहानाबाद के सांसद अरुण कुमार सरदार वल्लभ भाई पटेल को लौह पुरुष माना जाता है. समय के साथ उनकी प्रासंगिकता और भी अधिक बढती ही जा रही है. इसी विषय पर विश्व युवक केंद्र ने दिनांक 21 मार्च, 2017 को एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया. सेमिनार का विषय "SARDAR VALLABH BHAI PATEL : IRON MAN OF INDIA" रखा गया था. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जहानाबाद के सांसद और वरिष्ठ नेता डॉ.अरुण कुमार भी शामिल हुए. 
डॉ.अरुण कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि,सरदार वल्लभभाई पटेल विश्व मानवता के प्रेरणास्त्रोत रहे है. सरदार पटेल जी ने जो विश्व पटल पर इंसानियत की महफूजियत का जो खाका बनाया उसी के आस पास भारत की सभ्यता , संस्कृति फल फुल रही है. 
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भू-समाज के अलग-अलग ग्रुप का मतलब अलगाव और टकराव नहीं है

अलग अलग ग्रुप होने का अर्थ समाज का विखण्डन मत लगाईय़े 
राजधानी दिल्ली समेत देश भर में भू-समाज के कार्यक्रम चलते रहते हैं. ऐसे ढेरों कार्यक्रम होते हैं जिसमें समाज की ऐसी विभूतियों को याद किया जाता है जिन्होंने देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है.लेकिन कई बार एक ही विभूति पर केंद्रित कार्यक्रम एक ही शहर में दो-दो बार मनाया जाता है. मसलन हाल ही में किसानों के नायक स्वामी सहजानंद सरस्वती को लेकर राजधानी दिल्ली में तीन दिन में दो-दो कार्यक्रम हुए. ये दोनों दो अलग-अलग संस्थानों ने आयोजित किया था.ऐसे में एक यक्ष प्रश्न है कि क्या ऐसा करने से समाज की एकता तो कहीं विखंडित नहीं होती. इसी मसले पर भू-समाज के 'शैलेन्द्र कुमार' ने अपनी बात रखी है. उनका कहना है विविध संगठनों और कार्यक्रमों से समाज का विखंडन नहीं होता, बल्की ताकत और बढ़ती है.पढ़िए उनकी पूरी टिप्पणी :
शैलेन्द्र कुमार- दिल्ली में भू-समाज के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते ही रहते हैं. मसलन कभी राष्ट्रकवि दिनकर जी की जयंती तो कभी विश्वप्रसिद्द लंगट सिंह कॉलेज के संस्थापक 'लंगट सिंह' की जयंती तो कभी नक्सलियों के…

देश-प्रदेश में भू-समाज के प्रतिनिधि, जानिये भूमिहार मंत्री,सांसद और विधायकों के नाम

भूमिहार सांसद,मंत्री और विधायकों के नामों की सूची
राष्ट्रीय राजनीति में भू-समाज की अपनी एक अलग पहचान रही है. कम संख्या के बावजूद समाज ने देश-प्रदेश की राजनीति में अपनी एक अलग छाप छोड़ी. हालांकि हाल के के कुछेक वर्षों में जातीय राजनीति की वजह से भू-समुदाय की पकड राजनीति में कमजोर पड़ी है.लेकिन इसके बावजूद देश भर के दलों में भूमिहार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. इसी संदर्भ में 'अभिषेक सावरण' ने हमें एक सूची भेजी है जिसमें भू-समाज के देश भर में मौजूदा सांसद,मंत्री और विधायकों के नाम है जो इस तरह से है. (परशुराम) उत्तरप्रदेश के भूमिहार विधायक :  (1) कुँवर उज्जवल रमन सिंह (सपा) - करछना (इलाहाबाद)  (2) डॉ. सूर्यप्रताप शाही (बीजेपी) - पत्थरदेवा (देवरिया) (3) श्री उपेंद्र तिवारी (बीजेपी) - फेफना (बलिया)  (4) श्रीमती अलका राय (बीजेपी)- मोहम्दाबाद (गाज़ीपुर)  (5) डॉ.अवधेश सिंह(बीजेपी)-पिंडरा(बनारस)  (6) श्री सुरेन्द्र नारायण सिंह (बीजेपी)- रोहनिया (बनारस) 
(7)सत्यवीर त्यागी (भाजपा)- किठौर(मेरठ)
(8) अजीत पाल त्यागी (भाजपा) - मुरादनगर (गाजियाबाद)  झारखण्ड के भूमिहार विधायक : (1) श्री …

मुंबई महानगरपालिका के चुनाव में भू-समाज का दो सीटों पर कब्ज़ा

मुंबई महानगरपालिका के चुनाव में दो भूमिहार जीते
मुंबई महानगरपालिका का चुनाव पिछले दिनों संपन्न हुआ. ये चुनाव शिवसेना और भाजपा के आपसी प्रतिद्वंदिता और वर्चस्व की लड़ाई के वजह से और भी अधिक मीडिया के लिए आकर्षण का केंद्र बना. अंततः जब चुनाव परिणाम आये तो मामला बराबरी पर छूटा. 
बहरहाल इसी महानगरपालिका चुनाव के संदर्भ में हमें एक सूचना प्राप्त हुई है जिसे आप शेयर कर रहे हैं. मुम्बई महानगरपालिका के चुनाव में भूमिहार समाज के दो प्रत्याशी जीत कर आये हैं. ये दो महानुभाव हैं - 
1- श्री दीपक ठाकुर और  2-सुषमा कमलेश राय। 
भूमिहार समाज की ओर से उन्हें हार्दिक बधाई और उनके उज्जवल भविष्य के लिए भगवान परशुराम से प्रार्थना।
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योगी आदित्यनाथ जी, अब पलटिये मत, बन्द बूचड़खानों में गौ शालाएं संचालित हो

बूचड़खाना बनाम गोशाला : योगी आदित्यनाथ की सियासत गिरीश पंकज- 
योगी आदित्यनाथ जी, अब पलटिये मत !! वैध और अवैध बूचड़खाना क्या होता है? बूचड़खाना बूचड़खाना है, जहां बेचारे पशु कटते हैं। ये कैसा समाज बना लिया है हमने कि मनुष्यों के स्वाद-शौक के लिए पशुओं को मार कर खाया जाए? 
फिर चाहे भैस हो, चाहे बीमार बता कर चालाकी से काटे जाने वाली गाय हो अथवा अन्य कोई जीव. उत्तरप्रदेश में अभी अवैध बूचड़खाने बन्द हो रहे हैं। इसके बाद ''वैध'' भी बन्द होने चाहिए। 
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सार्वजानिक सभा में तो यही कहा था. भूल गए क्या? 
योगी जी, अगर आप सचमुच योगी हैं तो उत्तर प्रदेश में - मनुषय की क्रूरता के प्रतीक बन चुके - सभी 'तथाकथित वैध' बूचड़खाने भी बन्द होने चाहिए। मैंने सुझाव दिया था कि बन्द बूचड़खानों में गौ शालाएं संचालित हो. जहाँ देसी गाय भी पले और भैसे आदि भी। 
 (लेखक की यह टिप्पणी उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल से ली गयी है.)
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भारतीय मुसलमानों के मन को समझने के लिए एक काफ़िर के 11 सवाल

सी.पी.सिंह, मीडिया शिक्षक, आईपी यूनिवर्सिटी - भारत के मुसलमानों के मन को समझने के लिए हम काफ़िरों को निम्न सवालों के उत्तर खोजने की कोशिश करनी चाहिए:

1. कश्मीर से हिंदुओं के जातिनाश का विरोध कश्मीर और शेष भारत के मुसलमानों ने कब, कितना और कहाँ किया?

2. मुसलमानों के नायक कौन हैं:
● जावेद अख़्तर या ज़ाकिर नाइक ?
● दाऊद इब्राहिम या अज़ीम प्रेमजी?
● याकूब मेमन या अब्दुल कलाम?
● ओवैसी या आरिफ़ मोहम्मद ख़ान?
● औरंगज़ेब या दारा शिकोह?
● संत कबीर या सिकंदर लोदी?
● बाबा बुल्लेशाह या अहमद शाह अब्दाली?
● अब्दुल बिन क़ासिम या अकबर?

3. हिन्दू-बहुल हिन्दुस्तान में दो दशकों से बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख़ ख़ान, आमिर ख़ान और सलमान ख़ान क्यों हैं? दुनियाभर में और कहाँ-कहाँ ऐसे उदाहरण हैं?

4. क्या यह सच है कि 1947 से लेकर अबतक हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगों में ज़्यादातर की शुरुआत मुसलमानों ने की? अगर हाँ तो क्यों?

5. दंगों के बाद कितने हिन्दू-बहुल इलाक़ों से मुसलमानों को हमेशा के लिए अपना घर-बार छोड़कर जाना पड़ा?

6. देश में कितने मुस्लिम बहुल इलाक़ों में हिन्दू और दूसरे गैरमुसलमान ससम्मान रह रहे हैं?

7. जिस गुजरात में दंगा …

मुंबई में भू-समाज का होली मिलन समारोह, देखिये तस्वीरें

होली भले ही खत्म हो गया है लेकिन समाज में होली के रंग अब भी मौजूद है. कुछ ऐसा ही रंग मुंबई में दिखाई दिया जब होली मिलन समारोह के बहाने भू-समाज इकठ्ठा हुआ. कार्यक्रम 26 मार्च को हुआ जिसे 'भूमिहार सेवा समिति' ने आयोजित किया था.कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पारसनाथ सिंह थे जबकि अनिल कुमार सिंह और अशोक कुमार सिंह विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे. भूमिहार सेवा समिति के चंद्रशेखर राय,शिवशंकर सिंह,धीरज नारायण सिंह और राकेश कुमार एल सिंह के संयुक्त प्रयास से इस भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया. तस्वीरों में होली मिलन समारोह - (तस्वीर :सौजन्य - धीरज नारायण सिंह)
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यूपी के यादवों के साथ बिहार का भूमिहार - ओह माय गॉड !

लखनऊ/पटना. उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी के बाद हंगामा बरपा हुआ है. प्रशासनिक फेर-बदल हो रहे हैं और लगभग हरेक महकमे में हडकंप मचा हुआ है. लेकिन सबसे ज्यादा हंगामा पुलिस विभाग में मचा हुआ है. ख़बरों के मुताबिक़ तकरीबन सौ से अधिक पुलिसवाले अबतक सस्पेंड हो चुके हैं. बहरहाल जब कोई नया मुख्यमंत्री या नयी सरकार आती है तो ये सब तो होता ही है. सपा-बसपा सरकार के आने - जाने के वक़्त यूपी की जनता इस खेल को देख चुकी है. बहरहाल इस बार भी ऐसा ही हो रहा है लेकिन एक आईपीएस अधिकारी के ट्वीट के बाद हंगामा मच गया और पूरे देश की मीडिया का ध्यान बरबस उस बयान पर टिक गया. दरअसल यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी हिमांशु कुमार ने 22 मार्च को ट्वीट कर कहा था कि ”कुछ वरिष्‍ठ अधिकारियों में उन सभी पुलिस कर्मचारियों को सस्‍पेंड/लाइन हाजिर करने की जल्‍दी है जिनके नाम में ‘यादव’ है।” उसके बाद ही हंगामा शुरू हो गया और बाद में अधिकारी ने अपना ट्वीट हटा भी दिया. लेकिन तबतक लोग उसका स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया पर वायरल कर चुके थे. हालाँकि बाद में हिमांशु कुमार ने सफाई भी दी,लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. अब तो …

गिरिराज सिंह के इस बयान से फिर मचा हंगामा, उपेन्द्र कुशवाहा खफा

केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह मीडिया और सोशल मीडिया में अपने बयानों से सुर्ख़ियों में छाये रहते हैं. इसी कड़ी में उनका एक बयान फिर सुर्ख़ियों में है.कहा है कि हिंदू और मुसलमानों का डीएनए एक है और दोनों मिलकर राम मंदिर बनाएंगे। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनेगा. उनका कहना था कि मुसलमान भी हमारे ही वंशज है. दोनों के पूर्वज एक ही हैं भले ही धर्म अलग हैं और इबादत अलग है लेकिन दोनों का डीएनए एक है. राम मंदिर में उनकी भी अस्था है और अपने पूर्वजों की याद में हम मिलकर इसे बनाएंगे. 
उनके इस बयान का जहाँ साक्षी महाराज ने समर्थन किया तो उनकी ही पार्टी के सहयोगी दल के नेता उपेन्द्र कुशवाहा ने इसपर ऐतराज जताया है.रालोसपा नेता और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने गिरिराज को सलाह दी कि इस तरह के बयानों को छोड़ कर सिर्फ विकास के मुद्दे पर ध्यान दें तो जनता का भी भला होगा.
कांग्रेस के वरीय नेता सदानंद सिंह ने विरोध जताते हुए कहा कि गिरिराज कट्टर हिंदूवादी हैं और वो हमेशा धर्मनिरपेक्षता के विपरित काम करते हैं और बयान देते हैं. गिरिराज के बयान पर जदयू ने भी आपत्ति जतायी. पार्टी नेता श्याम रजक ने गिरिराज क…

मायावती जी, दलित चेतना का मतलब सवर्ण का अपमान नहीं होता

बसपा की सबसे बड़ी कमी है कि बसपा सुप्रीमो मायावती जी कृत्रिम नेता हैं न कि प्राकृतिक अगर मायावती मैडम के पास पांच प्रतिशत भी राजनीतिक समझ होती तो सत्ता में रहते हुए वो बसपा के चार पांच और अनुषांगिक संगठन बना लेती ताकि सत्ता में न रहने पर भी संगठन में सक्रियता बनी रहे भाजपा कांग्रेस सपा जैसे संगठन की मुख्य ताकत यही अनुषांगिक संगठन है मगर मायावती ने अपना कद बढाने के चक्कर में उत्तरप्रदेश में किसी अन्य दलित संगठन को विकसित नहीं होने दिया और जो दो चार गैर राजनीतिक गुमनाम टाइप के दलित संगठन जैसे कि वामसेफ , बिरसा मुंडा सेना जैसे है भी उनके कर्ता धर्ता तो मनुवाद और महिषासुर को मउसा बनाने की दंतकथाओं में ही दलित उत्थान के रहस्य खोजने में खुद भी परेसान रहते हैं और बसपा की नीव भी कमजोर करते रहते हैं दलित चेतना का मतलब सवर्ण का अपमान नहीं होता है मगर दुर्भाग्य से दलित नेताओं का चिंतन इसके आगे न तो विकसित है और ना ही वो करना चाहते हैं तुलनात्मक रूप से हमको सपा बसपा की तुलना में बसपा , सौ गुना बेहतर लगती है क्योकी मायावती की सबसे बड़ी खासियत है कि वो अपने सरकार में किसी को गुंडा नहीं बनने दे…

दैनिक भास्कर के इंडिया प्राइड अवार्ड में केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा

केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा प्रतिष्ठित दैनिक भास्कर इंडिया प्राइड अवार्ड के कार्यक्रम में पहुंचे और कईयों को सम्मानित भी किया. उसके बाद उन्होंने अपना अभिभाषण दिया. देखिये तीन तस्वीरें - ज़मीन से ज़मीन की बात   www.bhumantra.com

मनोज सिन्हा की इस तस्वीर का वायरल सच जानिए !

केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा हाल में सुर्ख़ियों में रहे. चुकी उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर उनका नाम सबसे आगे चल रहा था तो लगातार समाचार चैनलों पर वे छाए रहे. भले बाद में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री घोषित कर दिया गया हो लेकिन मनोज सिन्हा को जो मीडिया अटेंशन मिला, उससे उनकी लोकप्रियता में चार चाँद लग गए. क्योंकि मीडिया ने अपनी कवरेज में मनोज सिन्हा की सकरात्मक छवि पेश की और खूबियाँ ही खूबियाँ गिनाई. मीडिया ने उन्हें सबका साथ, सबका विकास के पीएम मोदी के नारे को ज़मीन पर उतारने के लिए सबसे उपयुक्त माना. बहरहाल उनकी लोकप्रियता में अचानक आए इस उछाल से उनके कई छुपे-अनछुपे दुश्मन पैदा हो गए हैं जिन्होंने सोशल मीडिया पर प्रोपगेंडा भी शुरू कर दिया. हाल में जब योगी आदित्यनाथ ने गुटखा-तंबाकू पर प्रतिबंध लगाया तो अचानक सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हुई जिसमें मनोज सिन्हा को गुटखा खाते हुए प्रोजेक्ट किया गया. भू-मंत्र डॉट कॉम ने इस तस्वीर का वायरल सच जानना चाहा और फिर हमारी पड़ताल शुरू हुई. पड़ताल में हमें पता चला कि केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा तो गुटखा/तंबाकू खाते ही नहीं है.वे सि…

जानिये केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने क्यों खरीदा ई-रिक्शा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में एक दिन के लिए पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल न करने की अपील की थी. उसके बाद मोदी सरकार के मंत्रियों में पेट्रोल-डीजल को बचाने की मुहिम की होड़ लग गयी. केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी इस मुहिम में जुटे हैं. लगातार वे सोशल मीडिया के माध्यम से इसके लिए अपील कर रहे हैं. इसी कड़ी में आज उन्होंने एक नया प्रयोग किया. उन्होंने संकल्प लिया है कि वे एक दिन अपने दफ्तर कार के बिना जायेंगे. अपने इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने एक ई-रिक्शा खरीदा है.उनके आवास पर आज ये रिक्शा पहुंचा जिसे उन्होंने खुद चलाया भी.अब देखने वाली बात होगी कि वे कब संसद या अपने दफ्तर अपनी इस नयी सवारी से पहुँचते है. ई-रिक्शा में पहली बार कोई सांसद/मंत्री संसद जाएगा.मीडिया को भी बेसब्री से इसका इंतजार है.वैसे ट्विटर पर अपने ई-रिक्शा की तस्वीर डालते हुए 'गिरिराज सिंह' लिखते हैं - " सम्माननीय श्री @narendramodi जी के सप्ताह में एक दिन पेट्रोल/डीज़ल न इस्तेमाल करने के आह्वान पर हमने काम शुरू कर दिया है ..आप भी करे ।" ज़मीन से ज़मीन की बात 
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मीडिया ने दरभंगा से मुंह मोड़ लिया क्योंकि पीड़ित ब्राह्मण है

पंकज प्रसून-
कल दरभंगा तमाम राष्ट्रीय चैनलों की सुर्खियां बन सकता था...कल दरभंगा पर तमाम राष्ट्रीय चैनलों पर प्राइम टाइम में डिबेट चल सकता था...कल दरभंगा तमाम बड़े-बड़े हिंदी अखबार और अंग्रेजी अखबार के पहले पन्ने पर जगह पा सकता था...कल दरभंगा की घटना को लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, विपक्षी नेता, ट्विट दाग सकते थे। कल दरभंगा में जो कुछ हुआ उसके बाद बड़े-बड़े नेताओं का अमला जल्द से जल्द दरभंगा कूच कर सकता था...लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को मिला...तमाम मसाला था...दिन दहाड़े एक युवक को जिंदा जलाने का प्रयास किया गया...जमीन विवाद का मामला था...दबंगों ने जमीन विवाद में एक युवक को जिंदा जलाने का प्रयास किया...मगर जानते हैं ये सब कुछ देखने को क्यों नहीं मिला...क्योंकि कसूर इनकी जाति का है...ब्राम्हण हैं मनोज चौधरी और इसलिए मीडिया ने मुंह मोड़ लिया...नेताओं को ये इंटरेस्टिंग टॉपिक नहीं लगा....तमाम बौद्धिक, प्रखर पत्रकारों को ये मुद्दा सोशल मीडिया के लिए शायद इसलिए तर्क संगत नहीं लगा...लानत है ऐसी भ्रष्ट सोच पर....हमारे देश में जाति ही सबसे बड़ी पहचान है...और इस हमाम में सभी राजनीतिक दल...तमाम म…

विस्तार से पढ़िए प्रधानमंत्री के मन की बात: 26 मार्च, 2017

आकाशवाणी के मन की बात कार्यक्रम में 26 मार्च, 2017 को प्रधानमंत्री द्वारा कही गयी बातें :
मेरे प्यारे देशवासियो, आप सबको नमस्कार। देश के हर कोने में ज़्यादातर परिवार अपने बच्चों की exam में जुटे हुए होंगे, जिनके exam ख़त्म हो गए होंगे, वहाँ कुछ relief का माहौल होगा और जहाँ exam चलते होंगे, उन परिवारों में अभी भी थोड़ा-बहुत तो pressure होगा ही होगा। लेकिन ऐसे समय मैं यही कहूँगा कि पिछली बार मैंने जो ‘मन की बात’ में विद्यार्थियों से जो-जो बातें की हैं, उसे दोबारा सुन लीजिए, परीक्षा के समय वो बातें ज़रूर आपको काम आएँगी। आज 26 मार्च है, 26 मार्च बांग्लादेश का स्वतंत्रता का दिवस है। अन्याय के ख़िलाफ़ एक ऐतिहासिक लड़ाई, बंग-बन्धु के नेतृत्व में बांग्लादेश की जनता की अभूतपूर्व विजय। आज के इस महत्वपूर्ण दिवस पर मैं बांग्लादेश के नागरिक भाइयों-बहनों को स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनायें देता हूँ। और यह कामना करता हूँ कि बांग्लादेश आगे बढ़े, विकास करे और बांग्लादेशवासियों को भी मैं विश्वास दिलाता हूँ कि भारत बांग्लादेश का एक मज़बूत साथी है, एक अच्छा मित्र है और हम कंधे-से-कंधा मिला करके इस पूरे…

लालमुनी चौबे की पुण्यतिथि पर एक मंच पर जुटे भू-समाज के तीन दिग्गज

बक्सर. बक्सर के पूर्व सांसद दिवगंत लालमुनी चौबे की पहली पुण्यतिथि पर बक्सर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय के साथ-साथ केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिंहा और सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री गिरीराज सिंह ने भी शिरकत की. 
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने कहा कि लालमुनि चौबे नहीं होते, तो बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदू शब्द समाप्त हो जाता. 1965 में संसद में एक अध्यादेश पारित किया गया, जिसमें बनारस हिंदू विश्व विद्यालय से हिंदू शब्द हटाने को लेकर चौबे ने जोरदार आंदोलन खड़ा किया, जिसका सपोर्ट मार्क्सवादी व अन्य विचारधारावाले लोगों को भी करना पड़ा. ऐसा व्यक्तित्व था लालमुनि चौबे का. मैं मानता हूं कि उन्होंने पोथी नहीं पढ़ी, डिग्री नहीं हासिल की. उन्होंने अपने जीवनी से ऐसी पोथी बनायी जो यह श्रद्धांजलि है. यह चौबे जी का परिवार है, जिसमें उनको नहीं जाननेवाले, पहचाननेवाले और न माननेवाले सभी शामिल हैं. 
कार्यक्रम में रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने उनके सादगी से भरे व्यक्तित्व की चर्चा के साथ ही राज्यसभा सांसद आरके स…

मगध में नक्सल का प्रमुख टारगेट भूमिहार जाति ही क्यों ? - बाबू झूलन सिंह : तीसरी किश्त

बाबू अंबुज शर्मा-
पिछले अकों में आप नक्सल का मगध में पार्दापण , राजनैतिक परिदृश्य और सामाजिक ताने बाने में कम्युनिस्ट रूपी विष घुल जाना , चीनी षड्यंत्र तक पढ चुके हैं अब आगे। 
मित्रों आरंभ से सत्ता किसी की रही हो किन्तु ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की धुरी भूमिहार रहे हैं साथ ही ग्रामीण सांस्कृतिक और सामाजिक ताना बाना बाभनों के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं। भले ही कोर्ट प्रशासन राष्ट्र में हों किन्तु हमारे गाँवों के फैसले भुमिहारों के अध्यक्षता में आपसी सुलह और समझ से होते रहे हैं , यहीं से गाँधी ने पंचायती राज व्यवस्था का महत्व समझा था और पंचायती राज का सुझाव दिया था। यही व्यवस्था हमारे मजबूत सामाजिक एकता की नींव थी। इसका एक मामला सन् १९७६ का है जब पाईबिगहा थाने में एक दरोगा आये थे इनका नाम अगले खण्डों में उजागर करूंगा। उनका स्टेटमेन्ट था ये कैसा इलाका है जहाँ कोई मामला ही पुलिस तक नही आता ।मैं इस क्षेत्र को समझना चाहता हूँ ,। उन्ही ने बारीकि से अध्ययन के बाद बाभनों की ओर कृतज्ञता व्यक्त करते हुए युग के प्रादेशिक पृष्ठ जुलाई १९७८ अंक में लिखा था गर भूमिहार जैसे सम भाव वाले सामापिक पंचायत…