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'ऑपरेशन भूमिहार' वालों तुम्हे 'पथरा इंग्लिश' नहीं दिखता (भों... के)?

संदर्भ- ऑपरेशन भूमिहार क्रियेट करने वाले पथरा इंग्लिश होने पर गांधी जी के तीन बंदर क्यों बन जाते है? भू-मंत्र की ज़मीनी पड़ताल और एबीपी न्यूज़ और उसके एंकर पत्रकार अभिसार शर्मा से एक बुनियादी सवाल-



लोकसभा चुनाव में जब तमाम प्रोपगेंडा के बावजूद मोदी लहर में बिहार से लेकर यूपी तक सब बह गए तो राजनीतिक दलों से ज्यादा परेशान माओवादी मीडिया हो गया कि आका सब हार गए अब 'ब्लैक' में बिस्किट कौन फेकेगा?सो बिहार विधानसभा का चुनाव आते ही माओवादी मीडिया भूमिहारों को सूंघने निकल पड़ा क्योंकि यही सबसे ज्यादा इसको टीआरपी मिलती है और आलू-भालू आका खुश होते हैं.सो सूंघते-सूंघते एबीपी नाम का एक पट्टाधारी एक यादव की सरपरस्ती में जहानाबाद पहुंचा और फिर हुआ 'ऑपरेशन भूमिहार'.

कहानी ये बनी कि दबंगों की वजह से जहानाबाद जिले के 'घोषी' विधानसभा क्षेत्र के दलित और पिछड़ी जातियों के मतदाता पिछले 67 वर्षों से मत नहीं डाल पा रहे.वाकई ये अफसोस की बात है और इसपर खबर बहुत पहले होनी चाहिए.पता नहीं नक्सली मीडिया ने किसके दवाब में अबतक इसे कवर क्यों नहीं किया? प्रजातंत्र में किसी के मतदान का अधिकार छिनने से बड़ा और जघन्य अपराध और क्या हो सकता है?लेकिन इसपर सबसे ज्यादा शर्म तो गरीब-गुरबों की राजनीति कर अमीरजादे बने नेताओं को आनी चाहिए.लालू-नीतिश और पासवान जैसों की घेराबंदी होनी चाहिए थी कि पिछले दो दशक से गरीब-गुरबों की राजनीति कर सत्ता हथियाने वालों गरीबों को मतदान का अधिकार तक नहीं दिला सके.

लेकिन स्टोरी के पहले ही जब स्टोरी का नामकरण 'ऑपरेशन भूमिहार' कर दिया गया हो तो आप स्टोरी की बदनीयती का पता आसानी से लगा सकते हैं.गौरतलब ये है कि पूरी रिपोर्ट के दौरान मतदान से वंचित जिन मतदाताओं की बाईट दिखाई, उसमें किसी ने भी भूमिहार जाति का उल्लेख नहीं किया.हां दबंग शब्द का प्रयोग जरूर किया जिसे पट्टेधारी माओवादी रिपोर्टर ने भूमिहार में तब्दील कर दिया.ख़ैर इसकी पूरी कहानी हम आपको अगले किसी पोस्ट में बताएँगे. यहाँ हम 'ऑपरेशन भूमिहार' का परिचय इसलिए दे रहे हैं ताकि आप पथरा इंग्लिश का मामला समझ सके. 

जहानाबाद में ऑपरेशन भूमिहार की कहानी दिल्ली से जाकर माओवादी रिपोर्टर ने तैयार की.लेकिन ठीक वैसी ही घटना जब नवादा(बिहार) के पथरा इंग्लिश गाँव में घटी तो ज़ी न्यूज़ को छोड़कर बाकी चैनलों को सांप सूंघ गया. न कोई स्टिंग हुआ और न चैनलों पर स्यापा.

पथरा इंग्लिश गाँव में भी दबंगों ने गाँववालों को मतदान करने से रोका. उससे भी बढ़कर उन्हें मारा-पीटा और गाँव में सेनारी नरसंहार तक रिपीट करने तक की धमकी दी गयी.औरतों के साथ छेड़खानी की गयी और बुरी तरह घायल भी किया गया.यानी आप निष्पक्ष तरीके से देखें तो पायेंगे कि इंग्लिश पथरा में घोषी विधानसभा क्षेत्र से भी ज्यादा मानवाधिकार का हनन हुआ.लेकिन यहाँ स्टोरी करने ना उस चैनल का वो पट्टेधारी पत्रकार आया और न उसका कोई दूसरा प्रतिनिधि.क्योंकि यहाँ जातिगत समीकरण बदल गए तो समस्या एक सी होते हुए भी माओवादी मीडिया का दृष्टिकोण बदल गया.

गौरतलब है कि पथरा इंग्लिश भूमिहार बहुल गाँव है और ये यादवों के गाँव से घिरा हुआ है सो यहाँ दबंग की भूमिका में यादव थे.इसलिए नक्सली मीडिया को इसमें स्टोरी का कोई एंगल नहीं दिखा.सो इसे ये पचा गए. ऐसे में ये सवाल तो पूछना जायज ही है ना कि ऑपरेशन भूमिहार वालों तुम्हे पथरा इंग्लिश नहीं दिखता (भों... के)?

अगली खबर: क्या है ऑपरेशन भूमिहार?

ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

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