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अजीत अंजुम ने कहा कैश क्रांति के पहले ही हो गयी गुलाबी क्रांति



कैश क्रांति के पहले काले धन वाले भाई लोग 'गुलाबी क्रांति' करने में जुटे हैं ..दो करोड़ -चार करोड़ -दस करोड़-बीस करोड़ ..सब गुलाबी हो गया जी...2 करोड़ के नए नए गुलाबी नोट फिर पकड़े गए..ये कहना है इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम का.उन्होंने नोटबंदी पर ताबड़तोड़ कई ट्वीट किये और उसकी विफलता पर तंज भी कसा.पढ़िए नोटबंदी पर उन्होंने और क्या-क्या कहा? उनके चुनिंदा ट्वीट : 

-हज़ारों बैंकों के कर्मचारी काले धन को गुलाबी करके मालामाल हो गए,अब इनकम-टैक्स की बारी है..पकड़ेंगे और खाएँगे 

-जिन्हें लग रहा है कि सभी कालेधन वाले पकड़े जा रहे हैं वो बहुत भोले हैं..इतने पकड़े जा रहे है तो कितनों ने खेल किया होगा,आप सोच भी नहीं सकते 

-सर्द रात में भी देश के हज़ारों एटीएम के बाहर कैश के लिए लोग लाइन में थे ..लेकिन कालेधन वालों तो करोड़ों के गुलाबी नोट कैसे मिल गए? 

-दो दो हज़ार के लिए लाइन में लगे इस देश में काले धन वालों को करोड़ों के गुलाबी नोट मिलने में कोई दिक़्क़त नहीं ..जो पकड़े गए अनाड़ी हैं 

-32 करोड़ के नए नोट बरामद... जो बैंक क़तार में लगे लोगों को ख़ाली हाथ लौटा रहा है,वही चोरों को नोट सप्लाई कर रहा है 

-एक दिन में 32 करोड़ के गुलाबी नोट बरामद .. ज़रा सोचिए ..किस लेवल पर बैंकों ने नोटबंदी को पलीता लगाया है लूट लो..लूट लो..की तर्ज़ पर लूट लिया 

-पहले बैंक वालों ने अरबों के वारे-न्यारे किए , अब इनकम टैक्स वाले करेंगे..जनता का क्या ? वो तो है ही लाइन में ..नोटबंदी को पलीता लगा दिया 

-देश को अब तक दिन लोगों ने लूटा है..वो अब भी लूट का माल ठिकाने लगाने में लगे हैं ..काश ! ये सब पकड़े जाते ..तीन -चार लाख करोड़ तो आते 

-अब तक क़रीब तीन सौ करोड़ के नए -पुराने नोट पकड़े गए है ..ये तो रेजगारी भी नहीं ..काश! बैंकों से ये खेल न होता ..नोटबंदी को पलीता न लगता 

-देशभक्त बैंकों को सलाम करते रहे और बैंक अपना 'काम' करते रहे .. -मैं पहले दिन से कह रहा था कि बैंकों से करोड़ों के गुलाबी नोट निकल रहे है लेकिन उन्हें सलाम करने का ऐसा माहौल बना दिया गया कि ... 

-अब एक बात साफ़ है..कैश की क़िल्लत सिर्फ़ क़तार में लगे लोगों के लिए है..कालेधन को कमीशन पर बदलने वालों के लिए नहीं.. 

- पकड़ते रहो अब ..कितनों को पकडेंगे..तीन-चार लाख करोड़ पकड़ लेंगे क्या ? काश ! ऐसा हो जाए तो देश का भला हो जाए..उम्मीद अभी बाक़ी है

ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

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