Skip to main content

#ऑपरेशन_अभिसार_शर्मा से सुलग गए भाई, ब्लॉक करके नौ दो ग्यारह !

अभिसार शर्मा की कायरता देखिए, दो ट्वीट में ही धैर्य जवाब दे गया


समाचार चैनलों में बैठे कई एंकर/रिपोर्टर अपने आप को खुदा नहीं तो खुदा से कम भी नहीं समझते. ग्राउंड रिपोर्टिंग के नाम पर पहले से तय 'एजेंडा' को थोपना इनका शगल है. अपनी बाते तो कहते हैं लेकिन दर्शकों को सुनने में इनकी नानी मरती है. दिन - रात अधकचरा ज्ञान देने वाले को जब आप ज्ञान देंगे तो वे भाग खड़े होंगे. उन्हें जवाब नहीं सूझता. ऐसे ही पत्रकारों में से एक हैं एबीपी न्यूज़ के एंकर अभिसार शर्मा. आपको पता ही है कि कल ट्विटर पर जब मर्यादित ढंग से हमने उनको उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग को लेकर 'कोट' किया तो उन्होंने ट्विटर के अंदरखाने आकर उकसाने का प्रयास किया ताकि संयम खोकर हम उन्हें मनानुसार जवाब दे. उन्होंने लिखा - 

@abhisar_sharma - भाई आपकी इतनी क्यों सुलग रही है है ऑपरेशन भूमिहार के नाम से? अगर इतनी प्रॉब्लम थी तो कोर्ट में केस क्यों नहीं किये? डर गए थे सब के सब? हिम्मत नहीं थी? क्यों? (Bhai aapki itni kyon sulag rahi hai operation bhumihar ke naam se ? Agar itni problem thee to court me case kyon nahin kiye ? Darr gaye thee sab ke sab ? Himmat nahin thee ? Kyon ?)


इसपर हमने भी अभिसार को मर्यादित तरीके से जवाब देना चाहा,लेकिन जवाब जा नहीं पाया. फिर पूरा वाकया हमने लिखकर भू-मंत्र डॉट कॉम के पास भेज दिया.खबर का शीर्षक दिया - "भूमिहारों की हिम्मत देखना चाहते हैं अभिसार शर्मा,पगले को उदय शंकर नहीं दिखता?" 

रात में ही खबर को पोस्ट कर इसे ट्विटर पर भी शेयर कर दिया गया.इसमें अभिसार शर्मा, एबीपी न्यूज़ के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर,इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम,आजतक चैनल के चैनल हेड सुप्रिय प्रसाद और वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह को टैग किया गया. 

बस फिर क्या था, दांव उल्टा पड़ता देख, अभिसार बाबू ने मेरे ट्विटर हेंडल @BhumiharMantra को ब्लॉक कर दिया और नौ दो ग्यारह हो गए. सच सुनने की आदत जो नहीं. ऑपरेशन करने वाले अपना ऑपरेशन शुरू होने के पहले ही भाग खड़े हुए और हमसे हिम्मत की बात करते हैं. आप ही बताइए सुलगी किसकी? एक भूमिहार का तीन ट्वीट तक बर्दाश्त नहीं कर पाए और जनाब चले हैं 'ऑपरेशन भूमिहार' करने. डरपोक! वैसे एनडीटीवी के प्रख्यात पत्रकार रवीश कुमार का सवाल अभिसार से पूछने का दिल कर रहा है - कौन जात हो भाई!
ज़मीन से ज़मीन की बात 
 www.bhumantra.com

Comments

Popular posts from this blog

अंतर्जातीय विवाह की त्रासदी सुहैब इलियासी-अंजू मर्डर केस, सच्चाई जानेंगे तो चौंक जायेंगे

पत्नी अंजू की हत्या के मामले में सुहैब इलियासी दोषी,मिली उम्रकैद की सजा  खुलेपन के नाम पर अंतर्जातीय विवाह आम बात है. भूमिहार समाज भी इससे अछूता नहीं. लड़के और लड़कियां आधुनिकीकरण के नाम पर धर्म और जाति की दीवार को गिराकर अंतर्जातीय विवाह कर रहे हैं. लेकिन नासमझी और हड़बड़ी में की गयी ऐसी शादियों का हश्र कई बार बहुत भयानक होता है. उसी की बानगी पेश करता है अंजू मर्डर केस जिसमें 17साल के बाद कोर्ट का फैसला आया है और अंजू के पति सुहैब इलियासी को उम्र कैद की सजा का हुक्म कोर्ट ने दिया है. गौरतलब है कि अंजू इलियासी कभी अंजू सिंह हुआ करती थी और एक प्रतिष्ठित भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती थी.
सुहैब इलियासी और अंजू की कहानी - अंजू की मां रुकमा सिंह के मुताबिक़ सुहैब और अंजू की पहली मुलाकात 1989 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई थी. धीरे-धीरे दोनों अच्छे दोस्त बन गए और बात शादी तक जा पहुंची. अंजू के पिता डॉ. केपी सिंह को जब इस रिश्ते का पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया. लेकिन इसके बावजूद अंजू और सुहैब ने 1993 में लंदन जाकर स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर ली. इसके बाद अं…

पिताजी के निधन पर गमगीन कन्हैया के चेहरे का नूर !

सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन तस्वीर है कि यकीन करने पर मजबूर करती है. आपको जैसा कि पता ही है कि छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आए कन्हैया के पिता का निधन हो गया था. इस दौरान उनकी तस्वीर भी न्यूज़ मीडिया में आयी थी जिसमें कि वे फूट-फूट कर रो रहे थे. समर्थक और विरोधी सबने दुःख की घड़ी में दुआ की और एक अच्छे इंसान की भी यही निशानी है कि वो ऐसे वक्त पर ऐसी ही संवेदना दिखाए.

बेगूसराय की इस भूमिपुत्री ने 18 साल की उम्र में कर दिया कमाल, पढेंगे तो इस बिटिया पर आपको भी होगा नाज!

प्रेरणादायक खबर : बेटियों पर नाज कीजिए, उन्हें यह खबर पढाईए
बेगूसराय. प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती. बेगूसराय के बिहटा की भूमिपुत्री प्रियंका ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. 18 साल की उम्र में प्रियंका इसरो की वैज्ञानिक बन गयी हैं. आप सोंच रहे होंगे कि वे किसी धनाढ्य और स्थापित परिवार से संबद्ध रखती हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके पिता राजीव कुमार सिंह रेलवे में गार्ड की नौकरी करते हैं और मां प्रतिभा कुमारी शिक्षिका हैं. वे बिहटा के एक साधारण भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इस मायने में उनकी सफलता उल्लेखनीय है.  पढाई-लिखाई :  1-दसवी और 12वीं : वर्ष 2006 में 'डीएवी एचएफसी' से दसवीं और वर्ष 2008 में 12वीं  2-बीटेक : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अगरतला  3-एमटेक : एमटेक की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी से पूरा कर रही हैं  सफलताएं :  1- वर्ष 2009 में एआईईई की परीक्षा में 22419वां रैंक  2- वर्ष 2016 में गेट की परीक्षा में 1604वां रैंक  3- शोध पत्र 'वायरलेस इसीजी इन इंटरनेशनल' जर्नल ऑफ रिसर्च एंड साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग म…