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‘अभिसार शर्मा’ की ‘पीत पत्रकारिता’ के नाम ‘रणवीर’ का खुला खत।



डियर अभिसार,
(अभिसार शर्मा, एंकर, एबीपी न्यूज़) 

#OperationAbhisar: सुना है आजकल अंग्रेजी के राइटर हो गए हो।। बड़ी खतरनाक अंग्रेजी किताबे लिखते हो जिसपर अंग्रेजी के पत्रकार और असली उपन्यासकार हो-हो करके हँसते हैं।। याद है जब तुमने अपना पहला उपन्यास लिखा था तब पब्लिशर माथा पकड़ कर बैठ गया था।। तुम्हारी टूटी-फूटी हिंदी वाली अंग्रेजी को सलीकेदार अंग्रेजी में कन्वर्ट करने में बेचारे पब्लिशर को नानी याद आ गयी।। लेकिन तुम जुगाड़ू ठहरे, अंग्रेजी लेखक बनकर ही माने।। अब तो तुमने कई किताबें लिख दी।। पाकिस्तान-तालिबान और न जाने क्या-क्या? उम्मीद है ऑपरेशन भूमिहार पर भी लिख ही रहे होंगे।। हम हैं भी लिखने लायक ।। लिखो नक्सलियों में खूब बिकेगा।। ना बिके तो मुझे खत लिखना।। मैं खरीदकर मूंगफली खाने के काम लाऊंगा।। रणवीर इस मामले में दिलदार है।। 

ख़ैर तुमसे एक शिकायत है।। पिछली बार जब तुम जहानाबाद(बिहार) आये तो बताया भी नहीं।। चुपके से आये और चुपके से चले गए।। रिपोर्टर होकर ये चोरी-छिपे का काम क्यों करते हो? बताते तो हम खुद तुम्हे भूमिहारों के टोले में ले जाते।। खूब खातिरदारी करते और हमारी खातिरदारी के बारे में नक्सली मीडिया तो अच्छी तरह से जानता ही है।। तुम्हे तो पता ही होगा।। तुम्हारे अंदर तो उन्हीं का बीज पड़ा है ना।। बीबीसी से लेकर एनडीटीवी तक में यही तो सिखाया जाता है।। ख़ैर एनडीटीवी में रहते हुए तुमने एनडीटीवी का क्या फेवर किया था, जिसके एवज में सपरिवार विदेश यात्रा पर गए थे।। सच है क्या?? यार ऐसा मत किया करो, दर्शकों को बड़ी शर्मिंदगी होती है।। तुम्हारे नक्सली दोस्त तक शर्मसार हो जाते हैं।। पत्रकारिता की आड़ में दलाली करने वालों को जानते हो न कि क्या कहते हैं???


ख़ैर तुम्हारी आदत नहीं बदलने वाली।। बीबीसी के ज़माने से देख रहा हूँ।। लेकिन ये शिकायत रहेगी कि तुम यादव कैमरामैन के साथ चोरी-छिपे आये और चले गए।। फिर दिल्ली में जाकर चौड़े हो गए, साहसिक रिपोर्टिंग का दावा करने लगे, दिखाने लगे ‘ऑपरेशन भूमिहार’।। लेकिन टाइटल के सिवाए मुझे तुम्हारी स्टोरी में न कही साहस दिखा और न भूमिहारों का ऑपरेशन ।। वैसे तुम इतने बड़े डाक्टर भी नहीं जो भूमिहारों का ऑपरेशन कर सके।। यूँ तुम्हारी स्टोरी अच्छी लगी, बस तुम्हारा एजेंडा खटक गया और यही तुम भटक गए।। पहले से एजेंडा सेट करके स्टोरी करना पीत पत्रकारिता कहलाती है, बहरहाल तुमसे मैंने कभी पराग पत्रकारिता की अपेक्षा की भी नहीं. 

तुम तो जानते ही हो कि नक्सली मीडिया से मेरा संबंध कितना पुराना है।। ज्यादा नहीं तो कम-से-कम तुम्हारे येलो जर्नलिज्म के करियर से तो पुराना है ही।। तुम जैसे नक्सली मीडियावालों ने ही तो मेरे नाम के आगे ‘कसाई’ लगाया और मेरा नाम ‘रणवीर कसाई’ पड़ गया जो नक्सलियों और देशद्रोहियों की मुंडी मरोड़ने में पल भर भी देर नहीं लगाता और तुम बात करते हो, हिम्मत की।। अभी तुमने रणवीर की हिम्मत और उसकी ताकत देखी नहीं है।। 

समय प्रतिकूल हो तो सियार भी हुआ – हुआ करते हुए समझने लगता है कि वो शेर की चीड़-फाड़ तुम्हारे शब्दों में ‘ऑपरेशन’ कर सकता है।। लेकिन जब सियार का सामना वास्तविकता में शेर से होता है तो उसकी घिग्ही बंध जाती है और सामना करने की बजाए वो जान बचाने की फ़िक्र करता है।। जैसे 'भूमिहार मंत्र' के तीन ट्वीट से तुम्हे ऐसा बुखार आया कि संवाद करने की बजाए पीठ दिखाकर भाग लिए और अपने चैनल की गोद में जाकर बैठ में गए।।  ख़ैर मीडिया वालों को मुगालते में रहने की आदत है।। तुम #OperationBhumihar तो ढंग से नहीं कर पाए, मगर हम #OperationAbhisar जरूर करेंगे, जिसकी शुरुआत हो चुकी है।। 

सो संभल कर रहना, ग्राउंड रिपोर्टिंग करना रणवीर भी जानता है।। तुम्हे तुम्हारी कलम, बाईट और ग्राउंड रिपोर्टिंग से ही तुम्हारे गढ़ में मात देंगे।। ये एक रणवीर का वादा है।। और चिंता मत करना हम तुम्हारी तरह छुपकर नहीं आयेंगे।। छुपकर वार नहीं करेंगे।। विचारों के खुले मैदान में लाकर तुम्हे विचारों से छलनी कर देंगे।। रणवीर ने भले हथियार बदलकर उसकी जगह कलम थाम ली है, लेकिन उसका तेवर वही पुराना है जिससे नक्सली मीडिया और उसके आका अब भी सिहरते हैं।। बहरहाल डियर अभिसार अपना ख्याल रखना और अपनी हिम्मत संभाल कर रखना, क्योंकि हम करने जा रहे हैं #OperationAbhisar आपकी करतूत दुनिया के सामने लाने में 'रणवीर' भी अपना पूरा योगदान देगा.

(मैं बॉलीवुड का रणवीर नहीं बल्कि जहानाबाद(बिहार) का एक किसान हूँ जिसे नक्सली मीडिया रणवीर कसाई के नाम से पुकारता है.भारतीय नागरिक होने की वजह से भारतीय प्रजातंत्र में मेरी गहरी आस्था है,लेकिन मैं उस नक्सली मीडिया का विरोध करता हूँ जो मेरी जाति को बदनाम करने की साज़िश करता है और नाम रखता हैं #OperationBhumihar)

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