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साहित्यकार विवेकी राय का निधन,भू समाज शोकाकुल



प्रख्यात साहित्यकार विवेकी राय का आज निधन हो गया. वे 93 वर्ष के थे. सांस लेने में दिक्कत की वजह से उन्हें वाराणसी के गैलेक्सी अस्पताल में भर्ती किया गया था जहाँ आज ब्रह्म मुहूर्त में वे इहलोक से परलोक चले गए. उनके निधन से पूरे साहित्यिक जगत में शोक की लहर फ़ैल फैल गयी. 

वे मूलतः उत्तर प्रदेश में गाजीपुर जिले के रहने वाले थे और अपनी साहित्यिक यात्रा के दौरान उन्होंने हिंदी और भोजपुरी भाषा में तकरीबन 50 किताबें लिखी.आंचलिक उपन्यासकार के रूप में उन्हें विशेष ख्याति मिली. 

साहित्य में उनके योगदान के उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारती सम्मान,महात्मा गांधी सम्मान और महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार भी मिल चुका है.वैसे उन्हें ललित निबंध और कथा साहित्य के लिए जाना जाता है. उनके द्वारा रचित 'मनबोध मास्टर की डायरी' और 'फिर बैतलवा डाल पर' उनके सबसे चर्चित निबंध संकलन हैं और सबसे लोकप्रिय उपन्यास 'सोनामाटी' है. उनके साथी उन्हें मनबोधवा भी कहते थे. 

उनके निधन पर साहित्यिक जगत के साथ-साथ भू-समाज भी शोकाकुल हो गया. भू-समाज के लिए तो ये व्यक्तिगत क्षति है. कलम के इस जादूगर को भू-मंत्र नमन करता है. उनके निधन पर शोक प्रकट करते हुए 'चंचल' भू-समाज के चंचल सोशल मीडिया पर लिखते हैं - "विवेकी राय नही रहे । जब तक रहे , कलम से खरोंच खरोंच कर पूर्वी उत्तर प्रदेश की भाषा जो माटी में धँसी रही उसे चमका कर देश को दिखाते रहे । भाषा दरिया है , वह रवानी से बहती है देखना हो , महसूस करना हो तो विवेकी राय के आंगन में चले जाइए अनगिनत पन्ने बिखरे मिलेंगे । सादर नमन दद्दा"

उनकी साहित्यिक कृतियाँ : 

ललितनिबंध : मनबोध मास्टर की डायरी गंवाई गंध गुलाब फिर बैतलवा डाल पर आस्था और चिंतन जुलूस रुका है उठ जाग मुसाफ़िर

कथा साहित्य : मंगल भवन नममी ग्रामम् देहरी के पार सर्कस सोनमती कलातीत गूंगा जहाज पुरुष पुरान समर शेष है आम रास्ता नहीं है आंगन के बंधनवार आस्था और चिंतन अतिथि बबूल जीवन अज्ञान का गणित है लौटकर देखना लोकरिन मेरे शुद्ध श्रद्धेय मेरी तेरह कहानियाँ सवालों के सामने श्वेत पत्र ये जो है गायत्री

काव्य : दीक्षा साहित्य समालोचना कल्पना और हिन्दी साहित्य, अनिल प्रकाशन, १९९९ नरेन्द्र कोहली अप्रतिम कथा यात्री

अन्य: मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनायें, १९८४

भोजपुरी निबंध एवं कविता: भोजपुरी निबंध निकुंज: भोजपुरी के तैन्तालिस गो चुनाल निम्बंध, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, १९७७ गंगा, यमुना, सरवस्ती: भोजपुरी कहानी, निबंध, संस्मरण, भोजपुरी संस्थान, १९९२ जनता के पोखरा: तीनि गो भोजपुरी कविता, भोजपुरी साहित्य संस्थान, १९८४ विवेकी राय... के व्याख्यान,भोजपुरी अकादमी, पटना, तिसरका वार्षिकोत्सव समारोहा, रविवारा, २ मई १९८२, के अवसर पर आयोजित व्याख्यानमाला में भोजपुरी कथा साहित्य के विकास विषय पर दो। भोजपुरी अकादमी, १९८२

उपन्यास अमंगलहारी, भोजपुरी संस्थान, १९९८ के कहला चुनरी रंगा ला, भोजपुरी संसाद, १९६८ गुरु-गृह गयौ पढ़ान रघुराय, १९९२

ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

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