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नरसंहारों के बाद पत्रकारों और नेताओं का मेला ?




बिहार में नरसंहारों का अपना एक इतिहास रहा है. 90 के दशक में तो ऐसे नरसंहारों का सिलसिला ही चल पड़ा. किसानों और नक्सलियों के बीच इस संघर्ष को बाद में जातीय और राजनीतिक रंग दे दिया गया और कई नरसंहार राजनीतिक फायदे के लिए सत्ता प्रायोजित भी हुए. पहले नरसंहार के लिए उकसाना और फिर राजनैतिक ड्रामेबाजी करना उस वक्त आम हो गया था. पीड़ित परिवार भी इसे बखूबी समझता था कि पत्रकारों और राजनीतिज्ञों का ये मेला क्यों लगा है? टेलीग्राफ ने सेनारी हत्याकांड में बाकायदा अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है. सेनारी हत्याकांड के एक दिन बाद टेलीग्राफ में फैजान अहमद की छपी रिपोर्ट में ये लाइनें लिखी गयी - 

 "As always, the massacre yesterday had been followed by the mela today. Police reinforcements, paramilitary forces, politicians from across the board, bureaucrats and the media hotfooted it to this remote village at the conjunction of Jehanabad, Gaya and Aurangabad." 

सेनारी हत्याकांड के बाद टेलीग्राफ में छपी पूरी रिपोर्ट -

BIHAR WAR ZONE BRACES FOR MASSACRE REPRISAL

FROM FAIZAN AHMAD Senari (Jehanabad), March 19 A day after Naxalites declared open war on the Ranbir Sena by matching ? almost killing for killing ? the landlord-militia?s massacres at Narayanpur and Shankerbigha, a seething Senari swore revenge.Last evening, about 1,000 activists of the Maoist Communist Centre (MCC) swooped on the Bhumihar-dominated, prosperous village, dragged out 34 men from their homes, took them to the nearby fields in groups of three or four and hacked them to death. Thirty-three Dalits had been killed by the Ranbir Sena in Narayanpur and Shankerbigha on January 25 and February 10.

The victims of last night?s attack today lay outside the village temple. Angry relatives and friends hovered in clusters, sending back the doctor who had come to conduct the autopsy.

The MCC had stuck hand-written posters on the wall of the temple. ?If the poor are killed, the rich will also be annihilated. This carnage is in reply to the massacre of Dalits by the Ranbir Sena,? one of the posters read.

As always, the massacre yesterday had been followed by themela today. Police reinforcements, paramilitary forces, politicians from across the board, bureaucrats and the media hotfooted it to this remote village at the conjunction of Jehanabad, Gaya and Aurangabad.

Nobody was spared by the villagers. The bureaucrats warily sat in their cars, Congress leader Jagdish Sharma was assaulted, the district magistrate and superintendent of police mocked and heckled. Defence minister George Fernandes, railway minister Nitish Sharma and BJP MP Shatrughan Sinha flew in and ? almost as quickly ? flew out, sensing the mood.

?We will let the bodies rot but we will not allow the administration to touch them,? said a village youth, Vinod Sharma.

His anger was not without reason. The marauders had cordoned off the village yesterday. They had posed as policemen, saying they had come to look for Ranbir Sena men who had taken shelter in the village.

All but two of the victims were between 25 and 40 years old. All were Bhumihars. A Yadav had been picked up but was let off once he had revealed his caste. One of the victims had been married only a week ago. The men were taken to the fields, tied and stabbed repeatedly and finally had their throats slit.

While trying to break open the door of Birender Kumar Singh?s house ? the most fortified in the village ? the Naxalites used dynamite.

Temple priest Mahant Parmanand, who was an eyewitness, said: ?I could hear their screams as they were being stabbed. Then I went inside the temple and put my hands over my ears.? The priest said the attackers also tried to break the lock of the temple, but changed their minds.

Police said another group of extremists attacked the nearby police picket in Saharsa, less than a kilometre away from Senari, at the same time to deflect the attention of the forces and keep them busy there.

But the villagers were not buying this story. ?The picket was not attacked. The police were just scared. They did not come here in the night. They arrived only in the morning,? said Ranbir Sharma, a village youth.

Inspector-general of police (central range) Neelmani said the police were combing villages suspected to be Naxalite strongholds. He said 20 persons, including a self-styled MCC commander, had been arrested.The villagers, though, are not listening. Instead, they are swearing retaliation. ?We will take up guns. We will take revenge,? said a villager, Mahesh Sharma.    

ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र





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