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लीजिए छठी मैया से भी राबड़ी देवी कर रही हैं सौदेबाजी

प्रधानमंत्री एक तरफ छठ को राष्ट्रीय पर्व बना रहे हैं तो छठ पर्व की शुरुआत करने वाले राज्य बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी 'छठ मैया' से सौदेबाजी कर रही हैं. छठ मैया ने राजपाट वापस दे दिया और क्या चाहिए? अब क्या देश का पीएम भी बनना चाहती हैं राबड़ी? पढ़िए छठी मैया से उनकी सौदेबाजी पर  लेख (परशुराम)-



कहते हैं कि भगवान जब भी देता है तो छप्पर फाड़ के देता है. रसातल में जा रहे लालू यादव परिवार के साथ भी ऐसा ही हुआ. लालू यादव चारा घोटाले में फंसे थे, लोकसभा में मोदी लहर में पार्टी का बेड़ा गर्क हो गया. माने हर तरफ से मुसीबत ही मुसीबत. आशा की कोई किरण नहीं. लेकिन छठी मैया के प्रताप से अचानक से लालू-राबड़ी के परिवार में खुशियों की बहार आ गयी. छठी मैया ने छप्पड़ फाड़ कर दे दिया. 

नीतिश की बुद्धि ऐसी भरमाई कि वे लालू यादव के राजनीतिक वापसी के वाहक बन गए. दोनों में गठबंधन हो गया और चुनाव परिणाम पक्ष में आ गए. लालू यादव की पार्टी को नीतिश कुमार की पार्टी से ज्यादा मत आए और दस साल के वनवास के बाद बिहार की सत्ता में वापसी हो गयी. सत्ता में वापसी भी उसी नीतिश कुमार ने करवायी जिसने कभी इन्हें बेदखल किया था. दोनों बेटे मंत्री बन गए और उनका राजनीतिक करियर भी लालू यादव ने अपने जीते जी एस्टैब्लिश कर दिया. इससे ज्यादा छठी मैया किसी और को क्या दे सकती हैं. 

लेकिन राबड़ी देवी इससे संतुष्ट नहीं, उन्हें और चाहिए. इसलिए अब छठी मैया से वे सौदेबाजी पर उतर गयी हैं. गौरतलब है कि न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक़ वे इस दफे छठ पर्व नहीं कर रही. आजतक की खबर के मुताबिक जब कुछ मीडिया कर्मियों ने राबड़ी देवी से सवाल किया कि अब उनके दोनों बेटे तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव राजनीति में अपना पैर जमा चुके हैं और दोनों बिहार सरकार में मंत्री भी है फिर फिर भी राबड़ी देवी आखिर क्यों छठ पर्व नहीं मना रही हैं तो इस पर राबड़ी देवी ने कहा कि वह छठ अब तब मनाएंगी जब उनके दोनों बेटों की शादी हो जाएगी. 

अब इसे सौदेबाजी नहीं तो क्या कहेंगे? उम्मीद है कि 'मनता' और 'सौदेबाजी' के बीच का अंतर आप जरूर समझते होंगे और इस आधार पर ये सौदेबाजी प्रतीत होता है. छठी मैया ने पूरा राजपाट दे दिया, लेकिन इंसान है कि उसका मन भी ही नहीं भरता. 

बहरहाल हम तो छठी मैया से कहेंगे कि राबड़ी देवी को अच्छी बहुएं मिले जो छठ की परंपरा को कायम रखे और कोई सौदेबाजी न करें.वैसे राबड़ी देवी को बहुओं की इतनी चिंता क्यों ? उनके सुपुत्र (तेजस्वी यादव) को व्हाट्सअप पर चालीस हज़ार शादी के प्रस्ताव मिल चुके हैं. उसमें से कौनो छांट लीजिए. बूझली की ना...... धत्त बुरबक.


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