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Showing posts from November, 2016

भूमिहार को लेकर भाजपा की तरह कन्फ्यूजन में अमर उजाला

भाजपा ने दो राज्यों में अपने प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की घोषणा की तो अप्रत्याशित नाम उभरकर सामने आए. बिहार में जहाँ नित्यानंद राय को भाजपा अध्यक्ष बनाया गया तो दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष की कमान मनोज तिवारी को सौंप दी गयी. Nityanand Rai to be the next BJP state President of Bihar. — ANI (@ANI_news) November 30, 2016 बहरहाल नित्यानंद राय को लेकर बाहर की दुनिया में एक कन्फ्यूजन है. कन्फ्यूजन जाति को लेकर है और ये कन्फ्यूजन सिर्फ आम आदमी को नहीं बल्कि अमर उजाला जैसे अखबार को भी है. और इसी कन्फ्यूजन में उसने खबर की हेडलाइन बनाई - "बीजेपी ने बदले दो प्रदेश अध्यक्ष,ब्राह्मण और भूमिहार पर लगाया दांव" 
हालाँकि बाद में अपनी गलती का एहसास होते ही अमर उजाला ने शीर्षक बदल दिया लेकिन तबतक भू मंत्र की टीम स्क्रीन शॉट ले चुकी थी. 
दरअसल इसमें गलती बिहार प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय की जाति को लेकर है.दरअसल वे जाति से अहीर यानी यादव हैं लेकिन राय टाइटल की वजह से कुछ लोग और पत्रकार उन्हें भूमिहार समझ बैठे और अमर उजाला से ऐसी गलती हो गयी. 
उम्मीद करते हैं कि भाजपा में ऐसा कुछ कन्फ्यूजन नहीं …

कृष्णानंद राय के हत्यारों को मनोज सिन्हा की ललकार !

मुहम्मदाबाद(गाजीपुर).केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कल शहीद कृष्णानंद राय के हत्यारों को खुली चुनौती दी और कहा कि जबतक मेरे खून का एक-एक कतरा शरीर में रहेगा, तब तक मैं कृष्णानंद राय के हत्यारों को चैन से जीने नहीं दूँगा. वे स्वर्गीय कृष्णानंद राय की ग्यारहवीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे. 
कार्यक्रम में उन्हें मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था. इस मौके पर उन्होंने कृष्णानंद राय समेत सात और शहीदों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और आतंकवाद मुक्त उत्तरप्रदेश के लिए प्रदेश की जनता का आह्वावाहन किया. 
गौरतलब है कि ग्यारह साल पहले 29 नवंबर के दिन ही आतंकियों ने कृष्णानंद राय को गोलियों से छलनी कर दिया था. इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में मुख्तार अंसारी का नाम आया और उसी मामले में वो गिरफ्तार भी है. 
मनोज सिन्हा ने कहा कि कृष्णानंद राय का मामला दिल्ली के CBI कोर्ट में अंतिम दौर में चल रहा है और जल्द ही इस घटना के आरोपियों को सजा मिलेगी.उन्होंने कहा कि कृष्णानंद राय की हत्या आतंकवाद की देन थी जो तत्कालीन राज्य सरकार के सहयोग से संपन्न हुआ.

कृष्णानंद राय के हत्यारों को सबक सिखाइये, अंसारी बंधुओं की हैसियत मिटा डालिए

कृष्णानंद राय को सच्ची श्रद्धांजलि देनी है तो कातिल मुख्तार अंसारी की राजनीतिक हैसियत का खात्मा कीजिये :

आज कृष्णानंद राय की पुण्यतिथि है. मुझे नहीं लगता कि भू-समाज को उनका परिचय देने की जरूरत है. पूरा उत्तरप्रदेश उनके साहस और जीवटता से परिचित है कि कैसे उन्होंने अपनी संगठनात्मक शक्ति की बदौलत मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में खौफ का पर्याय बन चुके मुख्तार अंसारी और उसके भाइयों को नाको चने चबवा दिया. उनकी बादशाहत को चुनौती देते हुए दशकों की राजनीति पर पानी फेरते हुए अंसारी के भाई को चुनाव में परास्त किया और उन सबके घमंड के तार-तार कर दिया. कहते हैं कि उनपर गोलियों कि बौछार करते हुए हत्यारे चिल्ला रहे थे – “मारो इसे अफजल भाई, इसने मुख्तार भाई को बहुत तंग कर रखा है.” इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुख्तार अंसारी और उसके गुर्गे कृष्णानंद राय से किस कदर खौफ़जदा थे. इसलिए जब किसी भी तरह से वे पार न पा सके तो उनकी कायराना हत्या करवा दी.

लेकिन अब वक्त आ गया है जब पूरा भू समाज एकजुट होकर अंसारी बंधुओं से हिसाब चुकता करे. इस गुंडे को उसकी हैसियत दिखाते हुए उसकी राजनैतिक हस…

अमित शाह की राजनीति के आदर्श आचार्य चाणक्य

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लोकसभा चुनाव के पहले तक देश में उतने लोग नहीं जानते थे. हां उनके वामपंथी विरोधी उनकी ताकत से बखूबी वाकिफ थे और नाम सुनते ही नाक-भौं सिकोड़ने लगते थे.

स्वर्गीय कृष्णानंद राय की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजली सभा का आयोजन

आतंकवाद से लड़ते हुए शहादत को प्राप्त कृष्णानंद राय की 29 नवंबर को पुण्यतिथि है. 29 नवंबर 2005 को आतंकवादियों ने घात लगाकर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया था.

गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा का जन्मदिन,गिरिराज सिंह ने दी बधाई

गोवा की राज्यपाल और भू-समाज की शान मृदुला सिन्हा का आज जन्मदिन है. केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने उन्हें इस मौके पर बधाई देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा -

मोदी के नोटबंदी पर नीतिश के समर्थन से लालू यादव का ब्लड प्रेशर हाई

मोदी नीति पर नीतिश के बोल सुनकर लालू का माथा ठनका: नोटबंदी के मसले पर जब तकरीबन सभी विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार की घेराबंदी कर रही है तब नीतिश कुमार ने अप्रत्याशित रूप से समर्थन कर भाजपा और लालू दोनों को आश्चर्य में डाल दिया.

कन्हैया को 'वीसी' बंधक मामले में नोटिस

देशद्रोह का आरोप झेल रहे जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को जेएनयू के वीसी को बंधक बनाने वाले मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

26/11 पर हाफिज सईद के नाम भारत के ‘रणवीर’ का पैगाम

हाफ़िज़ सईद,  चीफ,  लश्करे-ए-तैयबा,  पाकिस्तान. 
सलाम वालेकुम हाफ़िज़. रणवीर का नाम तो सुना होगा. न न न वो रणवीर मुझे ना समझियो. हम सिल्वर स्क्रीन पर ठुमके लगाने वाले रणवीर नहीं, बल्कि तुम जैसे आतंकियों और तुम्हारे नक्सली भाइयों का काल हूँ जो बड़ी मुहब्बत से मुझे रणवीर कसाई कहते हैं.

टारगेट मत करो नही तो फिर कोई ब्रह्मेश्वर मुखिया पैदा हो जायेगा

-आनंद प्रकाश-

यह लेख पुराना है. लेकिन लेख की प्रासंगिकता अब भी बरकरार है. इसलिए भूमंत्र के पाठकों के लिए हम इसे दुबारा प्रकाशित कर रहे हैं - 

1990 के दौर में बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद जब पिछड़ी और दलित जातियों में राजनीतिक,सामाजिक चेतना का उदय हुआ तो उनमे आगे बढ़ने की छटपटाहट दिखी,इसका फायदा सत्ता में बैठे लोगों ने उठाया और उनके मन में समाज में अगड़ी कही जाने वाली जातियों के प्रति जमकर विषवमन किया,

लालू-नीतिश की दोस्ती पर गिरिराज का तंज

पटना. बिहार में राजद और जदयू के गठबंधन की सरकार है और इस गठबंधन के मुखिया लालू यादव और नीतिश कुमार हैं.

इसी पर आज केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने व्यंग्य करते हुए इसे स्वार्थ की दोस्ती करार दिया.

प्रधानमंत्री मोदी के लाइव पर दूरदर्शन के पत्रकार का सवालिया निशान ?

नोटबंदी के बाद से देश में हंगामा मचा हुआ है और इससे संबंधित रोज नए-नए तर्क-कुतर्क और चीजें आ रही है. अब इस मामले में आज प्रधानमंत्री मोदी पर एक नया आरोप लगा है. आरोप की सत्यता का तो पता नहीं, लेकिन आरोप दूरदर्शन के पत्रकार सत्येन्द्र मुरली ने लगाया है. मुरली का कहना है कि नोटबंदी वाले दिन मोदी के जिस भाषण को लाइव कहकर दिखाया गया, वो लाइव था ही नहीं. उसे पहले ही रेकॉर्डेड किया था जिसे उस दिन लाइव के नाम पर चलाया और ये एक तरह का छल है. इस संबंध में जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की गयी, वो इस तरीके से है -

सत्येन्द्र मुरली- नोटबंदी का एकतरफा निर्णय लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता को बरगलाने के लिए किया अचानक घोषणा वाला नाटक – 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ लाइव नहीं था, बल्कि पूर्व रिकॉर्डेड और एडिट किया हुआ था. – इस भाषण को लाइव कहकर चलाया जाना न सिर्फ अनैतिक था, बल्कि देश की जनता के साथ धोखा भी था. – 8 नवंबर 2016 को शाम 6 बजे आरबीआई का प्रस्ताव और शाम 7 बजे कैबिनेट को ब्रीफ किए जाने से कई दिनों पहले ही पीएम का ‘राष्ट्र के नाम सं…

बच्चा के पीछे काहे पड़ गए हैं चचा, गिरिराज सिंह के नाम 'रणवीर' का पैगाम।

आदरणीय  गिरिराज चचा,  सादर चरण स्पर्श।।
चचा आप तो बड़का मंत्री हो गए।। छाती फुल जाता है जब आपका अंग्रेजी ट्विटवा देखते हैं।। का...का बम आप फोड़ते हैं।। साला पुराना दिन याद आ जाता है।। कसम से बहुत मज्जा आता है।। अउर पाकिस्तान की .... चचा बहुत धोते हैं आप।।

पाकिस्तान के भूगोल को गोल कर देंगे गिरिराज सिंह

केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह पाकिस्तान पर अपने कड़े बयानों के लिए भी जाने जाते हैं.पाकिस्तान पर दिए उनके कई बयान पूर्व में भी सुर्खियाँ बटोर चुके हैं. अभी हाल में उन्होंने बिहार सरकार को आड़े लेते हुए कहा कि बिहार को पाकिस्तान बनाया जा रहा है. 
बहरहाल कल एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने पाकिस्तान को फिर जमकर लताड़ा और कहा कि यदि वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो भूगोल से उसका नाम मिट जाएगा और वो देश खोजने पर भी नहीं मिलेगा.वे बुधवार को कादीपुर के निरीक्षण गृह में परिवर्तन यात्रा के दौरान पत्रकारों से बात कर रहे थे. 
उन्होंने विपक्ष पर भी हल्ला बोलते हुए कहा कि विपक्ष की भूमिका अफजल प्रेमी की तरह है.इनके बयान सुनकर लगता है कि वे देशद्रोहियों के साथ खड़े हैं.
ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

'रणवीर' की खुली चिठ्ठी प्रधानमंत्री 'मोदी' के नाम

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,  प्रणाम। 
कई वर्षों से आपको पत्र लिखने की सोच रहा था,लेकिन फिर ये सोंचकर रुक जाता था कि पता नहीं आप मेरे बारे में क्या सोंचते होंगे। आप तो जानते ही हैं कि नक्सली मीडिया मुझे प्यार से 'कसाई' कहता आया है।।पर मैंने कभी उसका बुरा नहीं माना।।भोले-भाले किसानों पर अत्याचार करने वाले नक्सलियों के लिए हाँ मैं कसाई हूँ और इसपर मुझे गर्व है।।बाबा ने भी मुझे यही सिखाया और उन्हें भी मुझपर नाज था।।
मानता हूँ कि लड़कपन में मुझसे एकाध गलतियां अनजाने में हो गयी जिसकी सजा आज भी भुगत रहा हूँ।।कई वर्षों से मुझपर सरकारी प्रतिबंध लगा हुआ है और खुलकर मैं अपना पूरा नाम भी नहीं ले सकता.पूरी दुनिया में एक बाबा अपने थे उन्हें भी मुझसे चार साल पहले धोखे से छीन लिया गया।।मैं उस वक्त खुलकर रो भी नहीं पाया,क्योंकि रणवीर कभी रोता नहीं।।बाबा को भी मेरा रोना पसंद नहीं था।।
अभियान से लौटकर कई बार अपनी क्रूरता पर रोना आता था।।लेकिन बाबा कहते कि आंसुओं को अंदर ही समेट लो,तुम रोओगे तो किसानों के आंसू कौन पूछेगा?? जंगल के हिंसक जानवरों से जान-माल और फसल की रक्षा के लिए हिंसक बनना ही पड़ता है।।…

पंचतत्व में विलीन हो गये हिन्दी साहित्य जगत के विवेक

-नरेंद्र राय-

पंचतत्व में विलीन हो गये हिन्दी साहित्य जगत के विवेक -- विवेकी राय जी.! वाराणसी मणिकर्णिका घाट से उनकी अंत्येष्टि से अभी लौटा हूँ। हार्दिक श्रद्धांजलि "!



ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

डॉ.विवेकी राय पहले ऐसे साहित्यकार जिन्हें तीन-तीन राष्ट्रपतियों ने सम्मानित किया

-अर्पित गिरी- 

*डूब गया हिंदी साहित्य का एक चमकता सितारा*  *यश भारती और 3 बार राष्ट्रपति पुरस्कार से अलंकृत डॉक्टर विवेकी राय नही रहे* 
साहित्य विधा के मशहूर डॉक्टर विवेकी राय ने आज भोर में महमूरगंज स्थित एक निजी हॉस्पिटल में जिंदगी से हार गए। डॉक्टर विवेकी राय का जन्म ग़ाज़ीपुर में 1924 में हुआ था, उत्तर प्रदेश और बिहार का कोई भी ऐसा साहित्य का पुरस्कार नहीं था जो इनसे अछूता रहा हो.
इन्हें यश भारती पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था और यह पहले साहित्यकार थे जिन्हें 3 राष्ट्रपतियों द्वारा सम्मानित किया गया ! आज के दिन साहित्य जगत ने अपना एक बेशकीमती कोहिनूर खो दिया।
#स्रोत - सोशल मीडिया ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

पढ़िए डॉ.विवेकी राय पर यथावत पत्रिका में प्रकाशित आलेख

हिंदी में संभवतः विवेकी राय पहले स्तंभकार हैं जिनका स्तंभ लगातार किसी एक पत्र में तेरह सालों तक छपता रहा. विवेकी राय का ‘आज’ का मशहूर स्तंभ ‘मनबोध मास्टर की डायरी’ , रविवार में ‘गाँव की बात’ और जनसत्ता के मुंबई संस्करण में ‘अड़बड़ भइया की भोजपुरि चिठ्ठी’ अबतक उनके पुराने पाठकों को याद है. लेकिन उनकी पत्रकारिता का मूल्यांकन अभी बाकी है. पढ़िए डॉ.विवेकी राय पर यथावत पत्रिका में प्रकाशित उमेश चतुर्वेदी का आलेख -



डॉ. विवेकी राय जितने बड़े साहित्यकार थे,उससे भी बड़ा उनका व्यक्तित्व था : कृष्ण कुमार यादव

बेहद दुखद समाचार मिला कि हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विवेकी राय जी नहीं रहे। उनसे बातें तो कई बार हुई थीं, पर मुलाकात सिर्फ एक बार गाजीपुर में उनके निवास पर हुई थी। वे हिंदी के जितने बड़े साहित्यकार और विद्वान थे, उससे भी ज्यादा सहज उनका स्वभाव था। 
गाँव की माटी से जुड़े डॉ. विवेकी राय जी को कभी भी नगरीय तामझाम आकृष्ट नहीं कर पाये, वे अंत तक अपनी माटी से जुड़े रहे। पहली मुलाकात में ही उन्होंने हमारी पुस्तक "16 आने, 16 लोग" पर लेखनी चलाई थी और अपनी तमाम पुस्तकें भी सप्रेम भेंट की थीं। 
उनसे जब भी बात होती थी तो अगली बार मुलाकात का वादा भी रहता था, क्योंकि गाजीपुर हमारी ससुराल भी है ......... पर किसे पता था कि अगली मुलाकात तो सिर्फ एक वायदा बनकर रह जाएगी। डॉ. विवेकी राय जी का निधन बहुत कुछ अधूरा छोड़ गया। विनम्र श्रद्धांजलि !! #VivekiRai
ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

'विवेकी राय' के बिना गाजीपुर की धरती सूनी हो गई : उमेश चतुर्वेदी,पत्रकार

-उमेश चतुर्वेदी,वरिष्ठ पत्रकार- 
विवेकी राय जी नहीं रहे...हिंदी में भोजपुरी गंवईं गंध की देसज आवाज आज थम गई...गाजीपुर की धरती सूनी हो गई...ललाते सूरज के आगमन की जब प्राची के क्षितिज पर आहट हो रही थी...ठीक उसी वक्त हिंदी का एक सूरज काशी में डूब रहा था..आजादी के बाद हिंदी राजधानी की मुखापेक्षी हो गई...साहित्यकार भी राजधानियों में सिमटने लगे..ऐसे माहौल में भी गाजीपुर में बंसखट, पुअरा, खरिहान, सरेह में रहकर हिंदी की सेवा करते रहे विवेकी राय...ढेरों यादें हैं..उनके सहज जीवन के...साहित्य में लोक परंपरा की आवाज का थम जाना हिंदी का बड़ा नुकसान है..लेकिन नियति के आगे किसकी चली है..उन्होंने लंबा जीवन जिया..संघर्षभरा जीवन...लेकिन बेदाग..साहित्य को पूरी तरह समर्पित...संबंधों को बिना बनावट से निभाने वाले राय साहब का नहीं रहना दुखी कर गया..हार्दिक श्रद्धांजलि.लेकिन बेदाग..साहित्य को पूरी तरह समर्पित...संबंधों को बिना बनावट से निभाने वाले राय साहब का नहीं रहना दुखी कर गया..हार्दिक श्रद्धांजलि
ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

डॉ. विवेकी राय से न मिल पाने का अफ़सोस मुझे आजीवन रहेगा :शिखा वार्ष्णेय

-लंदन से शिखा वार्ष्णेय- एक बेहद दुखद सूचना अभी अभी मिली है कि प्रख्यात हिंदी साहित्यकार डॉ. विवेकी राय का आज सुबह पौने पांच बजे वाराणसी में निधन हो गया है। बीते 19 नवंबर को ही उन्होंने अपना 93वां जन्मदिन मनाया था. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यश भारती से भी सम्मानित विवेकी राय जी ने हिंदी में ललित निबंध,कथा साहित्य, उपन्यास के साथ साथ भोजपुरी साहित्य में भी एक आंचलिक उपन्यासकार के रूप में खूब ख्याति अर्जित की थी और उनकी रचनाएं मैंने ब्लॉग्स पर पढ़ीं थी. यूँ मैं विवेकी राय जी से कभी मिल नहीं पाई, परंतु मेरे जीवन में उनका एक विशेष स्थान है - मेरी पहली पुस्तक (समृतियों में रूस)पर पहली टिप्पणी स्वरुप उनके ही आशीर्वचन हैं. असल में मैंने अपने ब्लॉगर साथियों के उत्साह वर्धन पर पुस्तक लिख तो ली थी परंतु उसे प्रकाशित करवाने के लिए सशंकित थी. मुझे एक ईमानदार सलाह की जरुरत थी. तब मैंने एक मित्र के द्वारा पुस्तक की पाण्डुलिपि उन्हें भिजवाई कि यदि हो सके तो कुछ पन्ने पढ़कर ही सही वह यह बता सकें कि वह एक यात्रासंस्मरण के रूप में छपवाने लायक है भी या नहीं. वे अस्वस्थ थे, उनकी आँखों में तकलीफ रहती थी…

डॉ.विवेकी राय का शरीर नहीं रहा पर उनकी किताबें हमेशा रहेंगी

वरिष्ठ साहित्यकार विवेकी राय के निधन पर अपने उदगार व्यक्त करते हुए प्रमोद तिवारी लिखते हैं -

प्रमोद तिवारी: भोजपुरी - हिंदी के महत्वपूर्ण रचनाकार और अनेक विधाओं को सहजता से साधने वाले डॉ. विवेकी राय नहीं रहे। 1924 में जन्मे विवेकी राय को स्वनिर्मित व्यक्तित्व कहा जा सकता है। शरीर नहीं रहा पर उनकी किताबें हमारे बीच हैं और रहेंगी।

Bidesia Rang :  बीएचयू से निकलनेवाली एक पत्रिका को इस बार डॉ विवेकी राय पर निकलना था. उस पत्रिका के संपादक अपने भाई धीरेंद्र राय ने पिछले कई दिनों से डॉ विवेकी राय पर एक आलेख की मांग की थी. अभी उनके भोजपुरी पक्ष पर आलेख लिखने बैठा ही था कि Pramod भइया के वाल से सूचना मिली कि वे नहीं रहे. भोजपुरी हिंदी में डॉ विवेकी राय ने जो अहम ​काम किये हैं, वह हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा. हिंदी के मठ—सठ ऐसे लोगों को अपने समय में ज्यादा महत्व नहीं देते जो हिंदी के साथ लोकभाषाओं की दुनिया को भी समृद्ध करते चलते हैं. डॉ विवेकी राय उनमें एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे, दुर्लभ भी...उन्हें नमन, विनम्र श्रद्धांजली

कुछ और प्रतिक्रियाएं -

पंकज सिंह टाइगर : साहित्य के क्षितिज पर अपना अमिट हस्ताक्षर …

साहित्य शिरोमणि विवेकी राय को श्रद्धांजली देने पहुंचे रेलमंत्री मनोज सिन्हा

वरिष्ठ साहित्यकार विवेकी राय का आज तडके निधन हो गया. उनके निधन से साहित्यिक और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर फ़ैल गयी और उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया. इसी कड़ी में रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा भी बनारस पहुंचे और भावभीनी श्रद्धांजली अर्पित की. उनका आना ऐसे समय में हुआ जब कानपुर रेल दुर्घटना की वजह से रेल मंत्रालय में हड़कंप मचा हुआ है.

मनोज सिन्हा ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा - हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार डाक्टर विवेक़ी राय जी हमारे बीच नहीं रहें . ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और इस दुःख की घड़ी में परिवारजन को शक्ति दें . ॐ शांति..

ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

साहित्यकार विवेकी राय का निधन,भू समाज शोकाकुल

प्रख्यात साहित्यकार विवेकी राय का आज निधन हो गया. वे 93 वर्ष के थे. सांस लेने में दिक्कत की वजह से उन्हें वाराणसी के गैलेक्सी अस्पताल में भर्ती किया गया था जहाँ आज ब्रह्म मुहूर्त में वे इहलोक से परलोक चले गए. उनके निधन से पूरे साहित्यिक जगत में शोक की लहर फ़ैल फैल गयी. 
वे मूलतः उत्तर प्रदेश में गाजीपुर जिले के रहने वाले थे और अपनी साहित्यिक यात्रा के दौरान उन्होंने हिंदी और भोजपुरी भाषा में तकरीबन 50 किताबें लिखी.आंचलिक उपन्यासकार के रूप में उन्हें विशेष ख्याति मिली. 
साहित्य में उनके योगदान के उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारती सम्मान,महात्मा गांधी सम्मान और महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार भी मिल चुका है.वैसे उन्हें ललित निबंध और कथा साहित्य के लिए जाना जाता है. उनके द्वारा रचित 'मनबोध मास्टर की डायरी' और 'फिर बैतलवा डाल पर' उनके सबसे चर्चित निबंध संकलन हैं और सबसे लोकप्रिय उपन्यास 'सोनामाटी' है. उनके साथी उन्हें मनबोधवा भी कहते थे. 
उनके निधन पर साहित्यिक जगत के साथ-साथ भू-समाज भी शोकाकुल हो गया. भू-समाज के लिए तो ये व्यक्तिगत क्षति है. कलम के इस ज…

नक्सली मीडिया साबित करे कि नोटबंदी की वजह से ही हुई है आत्महत्या

मीडिया का नक्सलवाद किसी से छुपा नहीं है. वह एक खास एजेंडे से काम करता है जिसका काम देशहित के कामों में अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर रायता फैलाना है. नोटबंदी मसले पर भी ऐसा ही हुआ जब मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोट पर अचानक से पाबंदी लगा दी तो कालेधन वालों का मुंह वाकई में काला हो गया. कालेधन से चलने वाले और नक्सलियों और देशद्रोहियों का पक्षधर मीडिया भी इसका विरोधी हो गया और नोटबंदी के खिलाफ ख़बरें शुरू हो गयी. नीचता की हद तो तब हो गयी जब नक्सली मीडिया देश में हो रहे तमाम आत्महत्याओं को नोटबंदी से जोड़ कर दिखाने लगा. ये कितना हास्यापद लगता है कि लाइन में खड़े होने की वजह से किसी ने आत्महत्या कर ली. यदि ऐसा कोई करता है तो कोई शक नहीं कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं. एकाध वाकये सही हो भी सकते हैं. लेकिन हर आत्महत्या को एनडीटीवी और उस जैसे कई नक्सली मानसिकता वाले चैनलों द्वारा नोटबंदी से जोड़ देना घटियापन की परकाष्ठा है. 
हाल ही में जब एक चोर ने पकड़े जाने के भय से बैंक में आत्महत्या कर ली तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तत्काल ट्वीट करके इसे नोटबंदी से जोड़ दिया और सरकार…

पुराने कंडोम की तलाश में कॉमरेड कन्हैया !

कन्हैया को लोग जूनियर केजरीवाल यूं ही नहीं कहते.बेसिर-पैर का बयान देना उसका शगल बन गया है. सबसे बड़ी बात किसी भी मसले में जबरन पीएम मोदी का नाम घसीट लाना ताकि उनके बहाने लाइमलाईट में आ जाया जाए.हाल ही में ऐसा एक बयान फिर से कन्हैया ने दिया.

मामला जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के लापता छात्र नजीब अहमद से संबंधित था. आप जैसा कि जानते ही हैं कि जेएनयू का ये छात्र अचानक गायब हो गया और पुलिस/प्रशासन की कोशिशों के बावजूद उसे अबतक नहीं ढूँढा जा सका. इसके लिए जेनेयू में आंदोलन भी हुआ.

लेकिन नजीब गायब है और पुलिस तलाश करने में नाकाम है तो इसमें मोदी सरकार क्या करे? देशभर में हर दिन कितने बच्चे और लोग गायब हो जाते हैं.उनकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं होता. नजीब की तलाश तो कम-से-कम पुलिस कर ही रही है. सरकार इसमें क्या करे? सारे काम-धाम खोजकर नक्सली मीडिया,नेता और कन्हैया जैसों को खुश करने के लिए दिन-रात खोजता फिरे.फिर पुलिस और प्रशासन का क्या काम?
लेकिन कन्हैया जैसे लोग समझकर भी अनजान बनते हैं और जानबूझकर सुलगाने वाले बयान देते हैं. कन्हैया ने ऐसा ही एक बयान अपनी किताब ‘बिहार से तिहाड़’ के…

अरुण कुमार नीतिश कुमार की छाती तो नहीं तोड़ पाए, कुशवाहा ने उनकी जरूर तोड़ दी !

-रणवीर- 
राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (रालोसपा) के टिकट पर जहानाबाद से निर्वाचित सांसद डॉ.अरुण कुमार कुमार एक बार खूब विवादों में फंसे थे जब उन्होंने नीतिश कुमार की छाती तोड़ने वाली बात कही थी.राजनीतिक गलियारे में उनका बयान खूब गूंजा और शोर-शराबा भी ज़ोरदार हुआ. जदयू ने इसपर कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए इसे साहित्यिक आतंकवाद की संज्ञा तक दे डाली थी.बाकायदा इस बयान के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करवाया गया.दरअसल ये बयान विधायक अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद दिया गया था. अरुण कुमार का आरोप था कि विधायक अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बहाने एक विशिष्ट जाति (भूमिहार) को निशाना बनाया जा रहा है.उसी पर अरुण कुमार ने बयान दिया कि हमने भी चूड़ी नहीं पहन रखी है और हम अपने सम्मान को क्षति पहुंचाने वाले मुख्यमंत्री की छाती तोड़ देंगे.
बहरहाल बयान का मकसद छाती तोड़ने से ज्यादा भूमिहार वोटरों को रिझाने और हो-हंगामा करना था जो हुआ भी. नीतिश कुमार की छाती ना टूटनी थी और ना ही टूटी.लेकिन उलटे अरुण कुमार की छाती कुशवाहा ने तोड़ दी.ऐसा केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने अरुण कुमार को पार्टी से निकालकर की. हालाँकि अरुण …

मोदी के हनुमान बनेंगे उत्तरप्रदेश चुनाव में गिरिराज सिंह

गिरिराज सिंह बनेंगे उत्तरप्रदेश चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक : मोदी के प्रबल समर्थक और केंद्र सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह उत्तरप्रदेश चुनाव में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.अपनी खूबियों की वजह से उन्हें स्टार प्रचारक की भूमिका मिल सकती है. 
भाजपा के सूत्रों के मुताबिक़ उत्तरप्रदेश चुनाव चुकी भाजपा के लिए अग्नि परीक्षा की तरह है, इसलिए भाजपा वहां अपना सबकुछ झोंक देना चाहती है. इसी क्रम में गिरिराज सिंह को भी चुनाव प्रचार में झोंका जा सकता है. 
दरअसल उत्तरप्रदेश के संदर्भ में वे कई कसौटियों पर फिट भी बैठते हैं. एक तो वे मोदी के प्रबल समर्थक हैं और उनकी स्ट्रेटजी और प्लैनिंग को बखूबी समझते हैं.दूसरा कि उनकी छवि हमेशा से हिन्दुत्व के एजेंडे से मेल खाती है.पूर्व के उनके सारे बयान इसके उदाहरण है और जिसकी वजह से वे काफी विवादों में भी रहे और राष्ट्रीय मीडिया ने इस मुद्दे पर उनको निशाना भी बनाया.
गिरिराज सिंह का एक और प्लस पॉइंट उनका भूमिहार जाति से होना भी है क्योंकि सेंट्रल यूपी और पश्चिमी उत्तरप्रदेश में भूमिहार मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद है.ऐसे में इस समुदाय का वोट बैंक हासि…

ब्रहमेश्वर मुखिया की राह पर चलते तो देश से नक्सलवाद का नामोनिशान मिट गया होता

भारत नक्सलवाद की समस्या से लंबे समय से जूझ रहा है.पूरे देश में नक्सली समय-समय पर तांडव करते रहते हैं.कई जगहों पर इनकी समानांतर सरकार है.स्थानीय पुलिस तो इनके सामने बेबस है ही, सेना भी पूरी तरह से कारगर नहीं.लेकिन नब्बे के दशक में एक ऐसा शख्स बिहार की धरती पर अवतरित हुआ जो देखते-देखते नक्सलियों के लिए खौफ का पर्याय बन गया.नक्सली डाल-डाल तो वे पात-पात थे. उनकी दूरदर्शिता और योजना का अनुमान लगाना भी नक्सलियों के बूते की बात नहीं थी और संगठन शक्ति ऐसी बेमिसाल कि दुश्मन भी पानी मांगता. बाहुबल और चाणक्य नीति का ऐसा बेजोड़ इस्तेमाल वे करते कि सामने वाला चारो खाने चित्त. वे नक्सलियों के लिए काल पुरुष बन गए थे और ये शख्स कोई और नहीं बल्कि बाबा ब्रह्मेश्वर यानी ब्रह्मेश्वर सिंह मुखिया थे जिन्हें नक्सली मीडिया ने 'बिहार का कसाई' नाम से पुकारा और बदनाम करने में कोई कोर - कसर नहीं छोड़ी. 
लेकिन हकीकत ये है कि बाबा ब्रह्मेश्वर ने आजीवन नक्सलियों से लोहा लिया और किसानों की रक्षा करते-करते अपने जीवन का बलिदान कर दिया. वक्त उन्हें समझ नहीं पाया या फिर समझने की कोशिश ही नहीं की. मीडिया और छि…

नक्सलियों के नोट पर मोदी की चोट,जमींदोज हुए हजारों करोड़

नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले से आम लोगों को थोड़ी तकलीफ जरूर हो गयी है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट से नक्सलियों के हौसले पस्त हो गए हैं. अब वे अपने काले धन को कैसे खपायें, इस फेर में पड़ गए हैं और रास्ता नहीं सूझ रहा. नक्सलियों के नोट पर मोदी ने ऐसी चोट की है वे नक्सलवाद छोड़कर वसूली और देशद्रोहियों से मिले धन को ज़मीन के अंदर बंकरों में छिपाने में लग गए हैं. झारखण्ड पुलिस ने ये खुलासा किया है. पुलिस की रिपोर्ट कहती है कि झारखण्ड में नक्सलियों ने करीब 1000 करोड़ रुपये के पांच सौ और एक हज़ार करोड़ रुपये के नोट ज़मीन के बने बंकरों में दबा रखा है जिसे जनधन खातों के जरिए वे खपाने की फिराक में हैं. हिन्दुस्तान अखबार ने इस संबंध में आज फ्रंट पेज पर विस्तृत खबर छापी है. पढ़िए पूरी रिपोर्ट -

झारखंड में नक्सलियों ने करीब 1000 करोड़ रुपये के पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट जमीन के नीचे बने बंकरों में दबा रखे हैं। केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद नक्सली इस रकम को ग्रामीणों के जनधन खातों के जरिये बदलने की फिराक में हैं। इस संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र के बाद से राज्य पूरी तरह से सतर्क ह…

नरसंहार के बाद सेनारी आगे बढ़ चुका है,लेकिन एक पीढ़ी का बचपन छीन गया

नरसंहार होते हैं, फिर उसपर राजनीति और उस राजनीति के गर्भ से एक नए नरसंहार की भूमिका तैयार होती है. लेकिन इन सबके बीच बच्चों का बचपन बिखर जाता है. उसके कोमल मन पर नरसंहार की क्रूरता की ऐसी छाप पड़ती है कि उसका बचपन छिन्न-भिन्न हो जाता है. सेनारी नरसंहार के समय ऐसा ही हुआ. पढ़िए रिम्मी शर्मा की ज़ुबानी सेनारी के खोये हुए बचपन की कहानी- 

सेनारी नरसंहार को 17 साल बीत चुके हैं. मामले में 45 आरोपियों में से 16 को सजा भी सुना दी गई. इन 17 सालों में सभी का जीवन बदल चुका है. बहुत आगे बढ़ चुका है. एक पूरी नई पीढ़ी तैयार हो गई है. यहां तक की मेरे गांव सेनारी की तस्वीर भी बदल चुकी है. पहले जहां हमारे गांव में बिजली के सिर्फ खंभे दिखाई दिया करते थे. अब बिजली भी 18 घंटे रहने लगी है. पहले जहां हम उपहारा से सेनारी तक के 3 कोस का सफर पैदल या बैलगाड़ी से पूरा किया करते थे अब वहां पक्की सड़कें दिखाई देती हैं. कच्ची मिट्टी के मकानों की जगह पक्के सीमेंट के घर हैं, गलियों में खड़न्जा (ईंटे) बिछ गई हैं, पानी के लिए अब लोग चापाकल पर निर्भर नहीं हैं बल्कि अब मोटर लग गए हैं. एक लाइन में कहूं तो सुविधाएं आ गई ह…

दुखन कहार के दुःख का अंत करने आयेंगे यमराज कहार : सेनारी नरसंहार

सेनारी के कसाइयों में से एक कसाई दुखन कहार का फैसला भले बाद में हुआ लेकिन परिणाम यमराज के पक्ष में हुआ. अब दुखन कहार के दुःख के अंत करने लिए यमराज कहार स्वयं आयेंगे और गले में फंदा डालकर घसीट कर ले जायेंगे.

सेनारी नरसंहार मामले में दुखन कहार नाम के एक और आरोपी को जहानाबाद के कोर्ट ने फाँसी की सजा सुनाई है.

गौरतलब है कि सेनारी नरसंहार मामले में ये ग्यारहवीं मौत की सजा है. इसके पहले 15 नवंबर को कोर्ट ने 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी.

सत्रह साल पहले 18 मार्च 1999 की रात प्रतिबंधित नक्सली संगठन एमसीसी (माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर) के हथियारबंद दस्ते ने 34 किसानों की हत्या कर दी थी.


ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

खबरदार: पथरा इंग्लिश जैसी घटनाएं ना रुकी तो जाग जाएगा रणवीर!

-सौरभ शर्मा-  (इंग्लिश पथरा पर भूसमाज पर हुए जुल्म पर रोष प्रकट करते हुए लिखते हैं)

एक बार फिर से #रणवीर_सेना को #जागना पड़ेगा भूमिहार फिर हुआ जातिवादी हिंसा का शिकार... नवादा जिला के इंग्लिश पथरा (नवादा विधायक- राजबल्लभ यादव का गाँव) के भूमिहारों को पंचायत चुनाव में बूथ लुटे जाने का विरोध करना महंगा साबित हुआ। इनके अल्पसंख्यक होने का फायदा उठाते हुए लालू जी के स्वजातीय लगभग 20 गाँव के 3000 यादवों ने बड़े ही दरिंदगी के साथ 35 भूमिहार के घरों में घुस कर पुरुषों, महिलाओं और बच्चों पर लाठियां बरसाई। 50 से अधिक बुरी तरह से जख्मी।

पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बनी रही। घायलों को अस्पताल में भी घुस कर बेरहमी से पीटा गया। पूरे बिहार में हिंसा न छिड़ जाए, इसी कारण मीडिया कवरेज पर अघोषित पाबंदी थी। उसी समाज से ताल्लुक रखने वाले केंद्रीय मंत्री व नवादा सांसद गिरिराज सिंह जी से आश्वासन के अलावा और कोई उम्मीद नहीं की जा सकती। 
वरीय पुलिस पदाधिकारी श्रीमान वर्मन जी किसी प्रकार की कार्यवाई करने में लाचार दिख रहे। दशकों से समाज के नाम पर जीने वाले सभी क्षेत्रिय बाहुबलियों का पावर सीज हो चुका है। (स…