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सेनारी मामले में भू-मंत्र की रिपोर्ट पर दैनिक जागरण का ठप्पा




भू-मंत्र लगातार सेनारी नरसंहार को सत्ता प्रायोजित नरसंहार कहता आया है और ज़मीनी हकीकत जानने वाले शायद ही किसी निष्पक्ष व्यक्ति को इस बात पर संदेह होगा. इस संदर्भ में जहानाबाद से आयी आनंद प्रकाश की रिपोर्ट में सेनारी हत्याकांड में सरकारी हाथ होने और किसानों का मनोबल तोड़ने की बात का जिक्र प्रमुखता से किया गया था. अब इसी पर जागरण ने भी अपनी मुहर लगाते हुए बकायदा इसपर रिपोर्ट की है.पढ़िए रिपोर्ट - 

तत्कालीन सरकार की मंशा ठीक नहीं,सेनारी मामले में जागरण की रिपोर्ट : 
अरवल। बहुचर्चित सेनारी नरसंहार के पीड़ितों ने फैसले पर असंतोष जाहिर करते हुए इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन लोगों का कहना है कि जिस शासन में यहां नरसंहार की घटना हुई थी आज वह सरकार का घटक दल बना हुआ है। 

सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन के लोगों ने न्यायालय के समक्ष पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया। पीड़ित व पूर्व मुखिया कमलेश शर्मा, सौरव कुमार, मुकेश कुमार, शिवराम शर्मा सहित अन्य लोगों ने कहा कि 34 लोगों की गला रेतकर नृशंस हत्या की गई थी। इस घटना को अंजाम देने में सिर्फ 15 लोग हीं नहीं हो सकते हैं। इनलोगों ने कहा कि सरकार की मंशा ठीक नहीं रहने के कारण घटना में शामिल कई लोगों को लाभ मिला है। 

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि 150 घर के गांव को घेर कर इस घटना का अंजाम दिया गया था। क्या पंद्रह लोग पूरे गांव को घेर सकते हैं। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि घटना को अंजाम देने में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। उन लोगों के टार्च की रोशनी से पूरा गांव प्रकाशित हो गया था।

ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

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