Skip to main content

नरेंद्र मोदी ने बनाया छठ को राष्ट्रीय पर्व

मन की बात में छठ पर्व पर बात करते प्रधानमंत्री मोदी 


बिहार और झारखण्ड का छठ पर्व अब किसी परिचय का मोहताज नहीं. फैलते-फैलते अब छठ लगभग देश के तमाम राज्यों में पूरी श्रद्धा से मनाया जाता है. न्यूज़ चैनलों पर दिखाया जाता है. तमाम राजनीतिक पार्टियां इसपर राजनीति भी करती है. वाकई में ये पर्व अपने -आप में अनोखा है भी क्योंकि इसमें बिना किसी बाह्रय आडंबर के प्रकृति की पूजा की जाती है और सूर्यदेव को अर्क दिया जाता है. 

लेकिन तमाम बातों के बावजूद मन की बात में छठ के महत्व पर खास तौर पर बोलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रीय पर्व का दर्ज दिलवाया है और इस कारण वे तारीफ़ के हकदार भी हैं. छठी मैया की उनपर कृपा जरूर बरसेगी. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार के अपने मन की बात में कहा कि दुनिया भर में लोग उगते सूर्य की पूजा करते हैं, लेकिन छठ एकमात्र ऐसा त्योहार है, जिसमें लोग अस्त होते सूर्य की भी अराधना करते हैं, जो एक बड़ा सामाजिक संदेश देता है.

उन्होंने आगे कहा, छठ पूर्वी भारत का बड़ा त्योहार है और यह पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह चार दिनों तक चलता है. कहा कि छठ पूजा सूर्य को धन्यवाद अदा करने के लिए किया जाता है, जिन्हें ऊर्जा का भगवान माना जाता है। सूर्य की पूजा स्वास्थ्य, समृद्धि और प्रगति के लिए की जाती है।


ज़मीन से ज़मीन की बात - भू-मंत्र

Comments

Sonu singh said…
Absolutely right...statements..
Ram Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद मोदीजी के इस कदम के लिए।
Ranjan Kumar said…
Ab please sir ise rastriya parv ghosit kar k is din rastriya chhutti bhi ghosit kre
manoj kumar jha said…
आदरणीय मोदी जी आपको कोटी-कोटी धन्यवाद |
Unknown said…
Great job modi ji
Vinni Sharma said…
Can't find any news regarding this on google though. Is Chath going to be a National Holiday from 2016 onwards..
Dharma Roy said…
Modi Ji ye baat Hume bhi achha laga
SAURABH RAJ said…
Modi jee...aap...mhan..hn...
Mukesh Singh said…
छठी मैया की जय हो
Unknown said…
To kya us din govt. Holiday hoga?
Chhat Puja ko national level par promote karne me liye him sabhi purvi waasi tahe dilse aapko dhanyabad karte hai
Ram Kumar Singh said…
Every Festival of every relegion is always for good motive and well wishes for the humanity and chath puja is also belongs to the same spritual customes. I heartfully Thank our PM Shri Modi ji for sharing his beautiful thougths on national platform on Our Mahaparva Chath Puja.
Vikash Kumar said…
हमारी पहचान ही हमारी परंपरा है जय छट्ठी मईया
rishi kashwani said…
Ye hamari nature ki puja jai, n sun is our natural god, thanks sir ji
rishi kashwani said…
Ye hamari nature ki puja hai and sun is our natural god, thanks sir ji
MaNoJ said…
हमारे देश के विभिन्न पारम्परिक त्यौहार ही देश की पहचान है।

इस पर्व में लोग सम्प्रदाय से ऊपर उठकर मिलजुल कर पूजा को सफल बनाने हेतु प्रयासरत रहते हैं। क्योंकि ये पर्व शक्ति प्रदर्शन का नहीं अपितु आत्म शक्ति के आह्वान का होता है। इस पर्व में इंसान की जीवटता दिखती है।

इस पर्व में आस्था और भाईचारे के साथ शांतिपूर्ण प्रेम प्रदर्शन का अनूठा समायोजन है।
ABHAY KUMAR said…
Thanks ,Chhath is the biggest festival of Hindu, but not a National Festival. Right decision to make it a National Festival.
Brajesh Prashar said…
Jabardast modi jee
Thanks
Unknown said…
incredible modi ji
Rishi Singh said…
Modi Ji Thanks for saying in Mann Ki Baat.
Unknown said…
Respected P.m ji ,Thank you For Comment About Chath Pooja is National holiday Alounce By You This is So Great Full Disigion.
ROHIT KUMAR said…
Bahut achha kiye modi jee jo aap kiye wo sayed koi karta
Vijay Dwivedi said…
बहुत सुन्दर बात है।
एक प्रेरणा है।ऐसा प्रधानमंत्री भारत के लिए एक रत्न है।भारत की पहचान हमारी संस्कृति और हमारा धर्म है।छठ एक पवित्र और महान पर्व है जिसका मनुष्य के जीवन में गहरा प्रभाव है।
JanVitran Bihar said…
मोदी जी ने सही कहा कि छठ पर्व ही दुनिया में एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डुबते सुरज की पूजा पहले की जाती है । मोदी जी जैसे जन नेता को ईसके लिये बहुत बहूत धऩ्यवाद ।
Congratulation deshwasiyon.
जय हो मोदी जी जब तक सूरज चाँद रहेगा तब तक छठ मैया का आशीर्वाद रहेगा
जय छठी मैया
Raj said…
मोदी जी आपको बहुत बहुत धन्यवाद....... जय हो छठी मईया......
Unknown said…
माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी को छठ को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने के लिए बिहार वासियों की ओर से कोटि कोटि धन्यवाद ।

Popular posts from this blog

पिताजी के निधन पर गमगीन कन्हैया के चेहरे का नूर !

सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन तस्वीर है कि यकीन करने पर मजबूर करती है. आपको जैसा कि पता ही है कि छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आए कन्हैया के पिता का निधन हो गया था. इस दौरान उनकी तस्वीर भी न्यूज़ मीडिया में आयी थी जिसमें कि वे फूट-फूट कर रो रहे थे. समर्थक और विरोधी सबने दुःख की घड़ी में दुआ की और एक अच्छे इंसान की भी यही निशानी है कि वो ऐसे वक्त पर ऐसी ही संवेदना दिखाए.

बेगूसराय की इस भूमिपुत्री ने 18 साल की उम्र में कर दिया कमाल, पढेंगे तो इस बिटिया पर आपको भी होगा नाज!

प्रेरणादायक खबर : बेटियों पर नाज कीजिए, उन्हें यह खबर पढाईए
बेगूसराय. प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती. बेगूसराय के बिहटा की भूमिपुत्री प्रियंका ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. 18 साल की उम्र में प्रियंका इसरो की वैज्ञानिक बन गयी हैं. आप सोंच रहे होंगे कि वे किसी धनाढ्य और स्थापित परिवार से संबद्ध रखती हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके पिता राजीव कुमार सिंह रेलवे में गार्ड की नौकरी करते हैं और मां प्रतिभा कुमारी शिक्षिका हैं. वे बिहटा के एक साधारण भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इस मायने में उनकी सफलता उल्लेखनीय है.  पढाई-लिखाई :  1-दसवी और 12वीं : वर्ष 2006 में 'डीएवी एचएफसी' से दसवीं और वर्ष 2008 में 12वीं  2-बीटेक : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अगरतला  3-एमटेक : एमटेक की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी से पूरा कर रही हैं  सफलताएं :  1- वर्ष 2009 में एआईईई की परीक्षा में 22419वां रैंक  2- वर्ष 2016 में गेट की परीक्षा में 1604वां रैंक  3- शोध पत्र 'वायरलेस इसीजी इन इंटरनेशनल' जर्नल ऑफ रिसर्च एंड साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग म…

भाजपा के भरोसे कब तक रहेंगे भूमिहार,बनाते क्यों नहीं अपनी पार्टी?

एक ज़माना पहले भूमिहार समाज और बिहार की राजनीति एक-दूसरे के पर्याय थे. लेकिन फिर एक आंधी आयी और उसमें सबकुछ उड़ता चला गया.जब गुबार छंटा तो भूमिहार ब्राह्मण राजनीति में हाशिये पर जा चुके थे. जानिये 'शैलेन्द्र' की जुबानी पूरी कहानी (परशुराम)
1977 तक बिहार की राजनीति में भूमिहारों का वर्चस्व - भूमिहार समाज आज राजनीति में हाशिये पर है.लेकिन एक वक़्त था जब भूमिहार ब्राह्मणों की राजनीति में तूती बोलती थी.भारत की आज़ादी के बाद बिहार जैसे प्रदेश में तो पूरी राजनीति ही भूमिहारों के इर्द-गिर्द ही घूमती रही . यही वजह रही कि बिहार की राजनीति में 1977 तक श्रीकृष्ण बाबू के रूप में सिर्फ एक मुख्यमंत्री बनने के बावजूद भूमिहार विधायकों की संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा रही. 
भूमिहारों ने की ऐतिहासिक भूल - लेकिन 1977 के बाद से स्थितियां बदलने लगी. बिहार की राजनीति बदलने लगी. भूमिहारों के खिलाफ कई दूसरी जातियां लामबंद होने लगी.फिर भी भूमिहार विधायकों की संख्या में कोई ख़ास कमी नहीं आयी. लेकिन इसी दौरान एक ऐसा मोड़ आया जिसने पूरी सियासत का रूख पलट दिया. भू-समाज ने एक ऐतिहासिक गलती की. 1992 में कांग्रेस को …