Skip to main content

दैनिक जागरण का खुलासा, सेनारी में भू-महिलाओं का हुआ था अपमान




बिहार के जहानाबाद के सेनारी गाँव में न केवल निहत्थे किसानों की नक्सलियों ने निर्मम हत्या की, बल्कि बाद में भू-महिलाओं का सरकार के इशारे पर पुलिस द्वारा अपमान भी हुआ था. दैनिक जागरण ने अपनी एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है. 

दैनिक जागरण ने अपनी रिपोर्ट में लिखा - 

अरवल जिले के वंशी थाना क्षेत्र के सेनारी गांव के नरसंहार पीड़ितों को पुलिस की ज्यादती का भी शिकार होना पड़ा था। नरसंहार की घटना के एक साल बाद यानि वर्ष 2000 में बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी रणवीर सेना समर्थकों को पकड़े जाने के उद्देश्य से सेनारी गांव पहुंचे थे। 

पुलिस टीम का नेतृत्व तत्कालीन डीएसपी संजय रंजन ¨सह कर रहे थे। जब वहां की महिलाओं ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया था तो उनलोगों की बेरहमी के साथ पिटाई की गई थी। पुलिस की पिटाई के कारण दर्जनों महिलाएं जख्मी हो गई थी। सभी जख्मी महिलाओं को स्थानीय सदर अस्पताल में दाखिल कराया गया था। इस घटना को लेकर पूरे देश में बवाल मचा था। इस घटना को न सिर्फ संसद में उठाया गया था बल्कि दिल्ली में पुतला दहन कर इसका पुरजोर विरोध किया गया था। दैनिक जागरण ने इस घटना को प्राथमिकता से प्रकाशित किया था जिसपे उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया था। 

उच्च न्यायालय द्वारा जहानाबाद व्यवहार न्यायालय के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश कन्हैया प्रसाद वर्मा को इस घटना की जांच का निर्देश दिया गया था। तकरीबन एक सप्ताह तक पूरे जिले में आंदोलन हुआ था। बड़ी संख्या में महिलाएं भी सड़क पर उतरी थी। सरकार द्वारा आरोपी डीएसपी का स्थानांतरण किया गया था। घटना के एक सप्ताह बाद पुलिस की सुरक्षा के बीच जख्मी महिलाओं को गांव भेजा गया था।



Comments

Popular posts from this blog

पिताजी के निधन पर गमगीन कन्हैया के चेहरे का नूर !

सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन तस्वीर है कि यकीन करने पर मजबूर करती है. आपको जैसा कि पता ही है कि छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आए कन्हैया के पिता का निधन हो गया था. इस दौरान उनकी तस्वीर भी न्यूज़ मीडिया में आयी थी जिसमें कि वे फूट-फूट कर रो रहे थे. समर्थक और विरोधी सबने दुःख की घड़ी में दुआ की और एक अच्छे इंसान की भी यही निशानी है कि वो ऐसे वक्त पर ऐसी ही संवेदना दिखाए.

बेगूसराय की इस भूमिपुत्री ने 18 साल की उम्र में कर दिया कमाल, पढेंगे तो इस बिटिया पर आपको भी होगा नाज!

प्रेरणादायक खबर : बेटियों पर नाज कीजिए, उन्हें यह खबर पढाईए
बेगूसराय. प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती. बेगूसराय के बिहटा की भूमिपुत्री प्रियंका ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. 18 साल की उम्र में प्रियंका इसरो की वैज्ञानिक बन गयी हैं. आप सोंच रहे होंगे कि वे किसी धनाढ्य और स्थापित परिवार से संबद्ध रखती हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके पिता राजीव कुमार सिंह रेलवे में गार्ड की नौकरी करते हैं और मां प्रतिभा कुमारी शिक्षिका हैं. वे बिहटा के एक साधारण भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इस मायने में उनकी सफलता उल्लेखनीय है.  पढाई-लिखाई :  1-दसवी और 12वीं : वर्ष 2006 में 'डीएवी एचएफसी' से दसवीं और वर्ष 2008 में 12वीं  2-बीटेक : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अगरतला  3-एमटेक : एमटेक की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी से पूरा कर रही हैं  सफलताएं :  1- वर्ष 2009 में एआईईई की परीक्षा में 22419वां रैंक  2- वर्ष 2016 में गेट की परीक्षा में 1604वां रैंक  3- शोध पत्र 'वायरलेस इसीजी इन इंटरनेशनल' जर्नल ऑफ रिसर्च एंड साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग म…

सेनारी नरसंहार को देख जब भगवान भी काँप गए,17 साल से बंद है मंदिर

मंदिर भगवान का घर होता है लेकिन उस मंदिर में जाकर कोई कुकृत्य करे तो भगवान भी नाराज़ हो जाते हैं और अपने द्वार बंद कर देते हैं. 
बिहार के अरवल जिले के सेनारी गांव में 17 साल पहले ऐसा ही हुआ जब मंदिर रक्तरंजित हो गया और उस घटना को देख भगवान भी एक बार काँप गए होंगे.लेकिन प्रभु से ये मासूम जिज्ञासा भी है कि अपने सामने ऐसा अनर्थ उन्होंने होने कैसे दिया? 
सेनारी में 17 साल पहले गाँव के इसी मंदिर में चुन-चुनकर 34 भू-किसानों की हत्या एक के बाद एक कर हुई थी. ह्त्या का तरीका भी बेहद निर्मम और दिल दहलाने वाला था. 
सभी 34 लोगों की हत्या गला रेत कर गाँव के मंदिर के द्वार पर की गयी थी. तब से आज तक उस मंदिर के द्वार बंद हैं. गांव के लोगों ने इस मंदिर में पूजा पाठ करना बंद कर दिया है. 
ग्रामीणों के मुताबिक भगवान के द्वार पर लोगों की हत्या कर दी गई है. लिहाजा मंदिर में पूजा करने का क्या फायदा ? अब पिछले 17 सालों में यह मंदिर वीरान पड़ा हुआ है.