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चूके हुए नेताओं की बदौलत राष्ट्रीय राजनीति में ‘भूमिहार’

रौशन कुमार सिंह 
राष्ट्रीय राजनीति में भूमिहारों की हैसियत न के बराबर, भूमिहारों की राजनीति का सच,रौशन कुमार की टिप्पणी 


राष्ट्रीय राजनीति में भूमिहार अपनी पहचान को मोहताज हैं।। यह और बात है कि राज्य स्तर पर भी निर्णय लेने की क्षमता, अपने-अपने दल में मांगे मनवा लेने की हैसियत, नये-नये युवाओं को स्थापित करने के अधिकार........ना सी पी ठाकुर के पास है,,,,,ना गिरीराज सिंह के पास है,,,,ना रबिंद्र राय के पास है,,,,ना अखिलेश सिंह के पास है........।। 

घुमा फिरा कर कांग्रेस और भाजपा के झोला,,,,,झंडा,,,,,झाड़ू......उठाने वाले कार्यकर्ताओं का भविष्य धूमिल नजर आता है.......पर अगर राजनीति ही कार्यकर्ताओं का कैरियर है तो मुझे बहुत निराशा होती है।।। 

कांग्रेसी काल में भी राष्ट्रीय राजनीति में हमारी पहचान ले देकर कल्पनाथ राय और एल पी शाही.....तक ही सिमटी रही थी......इनके बाद तो हमें दिल्ली के आंगन में पैर पसारने का जगह ही नहीं मिला।। वजहें ढूंढने चलता हूं तो आज के दौर से यह बात स्पष्ट निकलती है कि.......राष्ट्रीय राजनीति लायक ज्ञान,,,,क्षमता ,,,,प्रभावी,,,,,संघर्षशील......वाला नेता ना अराजनीतिक ठाकुरजी है,,,,ना महज पाकिस्तान-मुसलमान वाले गिरीराज सिंह हैं.........हमको तो आभास होता है कि बेचारे उपरोक्त चेहरे भी दिल्ली की राजनीति में अपने राजनीतिक बुढ़ापे में अपने लिए गॉड फादर तलाश रहे।।। 

इसके अलावा कुछ शक्तियां व ताकतवर जातीय समूह भी है जो दिल्ली में भूमिहारों का राजनीतिक पैर जमने नहीं देना चाहती है,,,,,,कोई जमने भी कैसे देगा,,,,,आखिर हमारे भी समर्थन से इतरातेे,,,,इठलाते और मौज......करते जातियां हमारा पैर क्यों जमने देगा??




गलतियाँ भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और कांग्रेस के आलाकमान से भी हुयी है जो हमें हर बार कमतर आंकने की गुस्ताखी करती है। दरअसल जबतक दिल्ली में अपना एक दरबार नहीं होगा, राजनीतिक सशक्तिकरण संभव नहीं। आप और हम प्रखंड स्तर से लेकर जिला स्तर तक के कमेटियों में ही अपना जवानी खपा देंगे। एकाध मौंके देरसबेर मिलेंगे भी तो उनको जो भूमिहार होकर भी भूमिहार को अपमानित करने का काम करेगा कभी सूमो के इशारे पर तो कभी नीतिश के इशारे पर.......।। 

चंद्रमोहन राय के अपमानजनक रिटायरमेंट,, सी पी ठाकुर के 87वें साल में प्रवेश,गिरिराज सिंह के चरमोत्कर्ष, कांग्रेसी अखिलेश सिंह के लगातार हार के बाद जुझारु//संघर्षशील/बौद्धिक स्तर के नये लोगों को ना भाजपा आगे कर रही है और ना ही कांग्रेस मौका दे रही है।। यही है भूमिहारों की राजनीति का सच।। जारी ........ (शाह,बादशाह और राजनाथ के खेल में हाशिए पर भूमिहार)




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