Skip to main content

भूमिहार प्रतिभा सम्मान किसे मिला, जानिए नाम


दिल्ली में पहले भूमिहार प्रतिभा सम्मान का आयोजन पिछले दिनों किया गया था जिसकी रिपोर्ट हमने 'भूमिहार मंत्र' पर प्रकाशित की थी.

उस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद कई पाठकों ने सम्मान प्राप्त प्रतिभाशाली भूबंधुओं का नाम जानना चाहा. तो आपकी मांग पर हाज़िर है उनके नाम.

ये सारे ऐसे प्रतिभाशाली भूबंधु हैं जिन्होंने अपने - अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है.

नाम और प्रोफाइल : 

राधे कृष्णा (आईएस - पूरे भारत में 52 वीं रैंकिंग)
दिव्यलोक कुमार (आईआरएस)
अभिषेक कुमार सिन्हा (आईआरएस)
अंजनी अंजन (आईपीएस)
शुभलक्ष्मी (सदस्य,भारतीय महिला क्रिकेट टीम)
चांदनी शर्मा (कबड्डी कोच)
विकास कुमार(सदस्य,अंडर19 क्रिकेट टीम)
दिल्ली में पहला भूमिहार प्रतिभा सम्मान


Comments

PINTU KUMAR said…
18 जून 2016 को आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह मे सम्मानित व्यक्तियो के संबंध मे जो आकड़ा प्रस्तुत किया गया है उसमे कुछ त्रुटियाँ है एक आयोजक सदस्य के नाते इसमे संशोॆधन करना चाहूँगा राधे कृष्ण ने भी सम्मान प्राप्त किया पर 52 रैंक वाले श्री रवि प्रकाश थे जिनको बिहार कैडर भी प्राप्त हुआ.... शैलेन्द्र कुमार

Popular posts from this blog

पिताजी के निधन पर गमगीन कन्हैया के चेहरे का नूर !

सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन तस्वीर है कि यकीन करने पर मजबूर करती है. आपको जैसा कि पता ही है कि छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आए कन्हैया के पिता का निधन हो गया था. इस दौरान उनकी तस्वीर भी न्यूज़ मीडिया में आयी थी जिसमें कि वे फूट-फूट कर रो रहे थे. समर्थक और विरोधी सबने दुःख की घड़ी में दुआ की और एक अच्छे इंसान की भी यही निशानी है कि वो ऐसे वक्त पर ऐसी ही संवेदना दिखाए.

बेगूसराय की इस भूमिपुत्री ने 18 साल की उम्र में कर दिया कमाल, पढेंगे तो इस बिटिया पर आपको भी होगा नाज!

प्रेरणादायक खबर : बेटियों पर नाज कीजिए, उन्हें यह खबर पढाईए
बेगूसराय. प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती. बेगूसराय के बिहटा की भूमिपुत्री प्रियंका ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. 18 साल की उम्र में प्रियंका इसरो की वैज्ञानिक बन गयी हैं. आप सोंच रहे होंगे कि वे किसी धनाढ्य और स्थापित परिवार से संबद्ध रखती हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. उनके पिता राजीव कुमार सिंह रेलवे में गार्ड की नौकरी करते हैं और मां प्रतिभा कुमारी शिक्षिका हैं. वे बिहटा के एक साधारण भूमिहार ब्राहमण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इस मायने में उनकी सफलता उल्लेखनीय है.  पढाई-लिखाई :  1-दसवी और 12वीं : वर्ष 2006 में 'डीएवी एचएफसी' से दसवीं और वर्ष 2008 में 12वीं  2-बीटेक : नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अगरतला  3-एमटेक : एमटेक की पढ़ाई इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गुवाहाटी से पूरा कर रही हैं  सफलताएं :  1- वर्ष 2009 में एआईईई की परीक्षा में 22419वां रैंक  2- वर्ष 2016 में गेट की परीक्षा में 1604वां रैंक  3- शोध पत्र 'वायरलेस इसीजी इन इंटरनेशनल' जर्नल ऑफ रिसर्च एंड साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग म…

सेनारी नरसंहार को देख जब भगवान भी काँप गए,17 साल से बंद है मंदिर

मंदिर भगवान का घर होता है लेकिन उस मंदिर में जाकर कोई कुकृत्य करे तो भगवान भी नाराज़ हो जाते हैं और अपने द्वार बंद कर देते हैं. 
बिहार के अरवल जिले के सेनारी गांव में 17 साल पहले ऐसा ही हुआ जब मंदिर रक्तरंजित हो गया और उस घटना को देख भगवान भी एक बार काँप गए होंगे.लेकिन प्रभु से ये मासूम जिज्ञासा भी है कि अपने सामने ऐसा अनर्थ उन्होंने होने कैसे दिया? 
सेनारी में 17 साल पहले गाँव के इसी मंदिर में चुन-चुनकर 34 भू-किसानों की हत्या एक के बाद एक कर हुई थी. ह्त्या का तरीका भी बेहद निर्मम और दिल दहलाने वाला था. 
सभी 34 लोगों की हत्या गला रेत कर गाँव के मंदिर के द्वार पर की गयी थी. तब से आज तक उस मंदिर के द्वार बंद हैं. गांव के लोगों ने इस मंदिर में पूजा पाठ करना बंद कर दिया है. 
ग्रामीणों के मुताबिक भगवान के द्वार पर लोगों की हत्या कर दी गई है. लिहाजा मंदिर में पूजा करने का क्या फायदा ? अब पिछले 17 सालों में यह मंदिर वीरान पड़ा हुआ है.