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Showing posts from November, 2014

स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर मुखिया का आखिरी इंटरव्यू

दुबले-पतले से एक किसान को देखते-देखते कैसे खौफ का पर्याय बना दिया गया.ब्रह्मेश्वर मुखिया के जीवित रहते और उनके जाने के बाद भी नक्सलियों और माओवादियों के दिल्ली में बैठे वामपंथी आका उन्हें कसाई कहते रहे है.उग्रवादी का ठप्पा लगाने की हर संभव कोशिश करते रहे.लेकिन ये भी सच है कि इस दुबले-पतले किसान ने ऐसी फिजा बनाई कि उनके सामने अच्छों-अच्छों का पसीना निकल जाता था.ये बात और है कि पीठ पीछे तो कोई भी किसी को लेकर डींग हांक सकता है.लेकिन अपने समाज और नक्सलियों के आतंक से पीड़ित किसानों के लिए वे भगवान से किसी तरह से कम नहीं थे.तभी तो हम उन्हें आधुनिक परशुराम कहते हैं.

स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर की कायराना हत्या के बाद उनका एक इंटरव्यू सामने आया जिसे सवर्ण विरोधी मानसिकता वाली पत्रिका 'फॉरवर्ड' प्रेस के 'नवल किशोर' ने लिया था. यह मुखिया जी का बड़प्पन और उदार हृदय था कि जानते-समझते हुए भी ऐसी पत्रिका को इंटरव्यू देना उन्होंने स्वीकार किया. बहरहाल इंटरव्यू लेते समय इंटरव्यू लेने वाले की हकलाहट आप साफ़-साफ़ महसूस कर सकते हैं.लेकिन उनकी हत्या के बाद इसी इंटरव्यू को ऐसे पेश किया गया जैसे…

Upcoming Event : स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर मुखिया की याद में स्मृति भवन का शिलान्यास

सूचना / इवेंट : दिनांक 30/01/15 को स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर नाथ मुखिया जी की याद में हमारे ग्राम खोपिरा में उनके स्मृति भवन का शिलान्यास का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। 

आप सभी सादर आमंत्रित हैं। आपकी गरिमामय उपस्थिति हमस भी राष्ट्रवादी किसान संगठन के अनुयाइयों को उनके कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा प्रदान करेगी।


निवेदक


अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन

जब श्रीबाबू को जेपी ने पत्र लिख कर कहा -‘यू हैव टर्न्ड बिहार इन टू भूमिहार राज।’

लोकनायक जयप्रकाश नारायण और बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने एक-दूसरे को ‘जातिवादी’ कहा था। भले ही इलजाम के तौर पर नहीं, बल्कि कटाक्ष के रूप में। इनके ये पत्रचार कभी सार्वजनिक नहीं हुए, लेकिन अभिलेखागार में मौजूद हैं। चर्चित संघ विचारक प्रो. राकेश सिन्हा ने उन पत्रों को जनवरी में प्रकाशित हो रही अपनी पुस्तक में शामिल किया है। उनकी यह किताब बिहार की राजनीति के कई अनछुए पहलुओं को उजागर करने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका पर केंद्रित है।
भारतीय नीति प्रतिष्ठान के निदेशक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राकेश सिन्हा पिछले दिनों पुस्तक मेला में भाग लेने पटना आए थे। वहां  उन्होंने कहा कि औद्योगिकीकरण का नहीं होना बिहार के लिए बहुत दुखद रहा है। इसी के कारण प्रदेश में जातिवाद भी जारी है। अब तो जात-पात की समस्या यहां संस्थागत रूप ले चुकी है। पूंजी का यहां प्रवेश हुआ होता तो जातिवाद खत्म हो चुका होता। जेपी ने 1974 में देश भर में इतना बड़ा आंदोलन खड़ा किया, सभी को साथ लेकर चले। उन्होंने कभी जात-पात की राजनीति नहीं की। वैसे ही श्रीबाबू (श्रीकृष्ण सिंह) ने जाति देख कर स…

Bhumihar Star - UdayShankar ranked no.25 in the @IndiaToday Power List for 2015

Bhumihar Star - UdayShankar ranked no.25 in the @IndiaToday Power List for 2015.....


श्रीकृष्ण सिंह जयंती और कैलाशपति मिश्र की पुण्यतिथि पर सामने आया बिहार बीजेपी का ‘भूमिहार’ फैक्टर

सुशांत झा  बेगूसराय से सांसद और बिहार बीजेपी के वरिष्ट नेता डॉ भोला प्रसाद सिंह ने कहा कि उन्हें ‘पोसुआ’(पालतू) न समझा जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘हम कैलाशपति मिश्रा की संतान है और हमारे हाथ में कलम भी है और तलवार भी। हम पार्टी के लिए मरते-खपते हैं लेकिन जब लाभ लेने की बारी आती है तो कोई और ले जाता है’।
इस बयान की तल्खी समझनी हो तो हाल ही में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह जयंती के उपलक्ष्य में भी नेताओं के बयान देखे जा सकते हैं। वहां भी भोला सिंह आक्रामक थे और भूमिहार समाज के अन्य नेता भी। दरअसल, बिहार बीजेपी में जो खिचड़ी पक रही है उसके कई संदेश हैं जिसके आनेवाले समय में दूरगामी नतीजे हो सकते हैं।
3 नवंबर को बिहार बीजेपी ने अपने भीष्मपितामह कैलाशपति मिश्र की दूसरी पूण्यतिथि मनाई थी जिसमें लगभग पूरी प्रदेश इकाई उपस्थित था। कैलाशपति मिश्रा जनसंघ के जमाने से ही पहले जनसंघ और बाद में जनसंघ के मुख्य कर्ता-धर्ता थे और वस्तुत: पूरी बिहार बीजेपी ही उनके हाथों गढी गई थी। आपातकाल से पूर्व भी जेपी और गोलवलकर को नजदीक लाने में उनकी अहम भूमिका थी। दो साल पहले जब उनका निधन हुआ तो खुद …

भूमिहारी दाँव से गिरिराज ने सबको कर दिया चित्त

प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट का विस्तार किया तो भूमिहार नेता गिरिराज सिंह को भी उसमें शामिल किया. गिरिराज सिंह को शामिल कर मोदी ने उन पर एहसान नहीं किया है, बल्कि पिछले चार वर्षों से गिरिराज द्वारा मोदी फैंस क्लब चलाने के लिए उनके कर्ज को उतारा है। 

गुजरात दंगे के संदर्भ में मोदी का नाम लेने से जब सब डरते थे, तब गिरिराज मजबूती से ना केवल इस बात को दोहराते थे कि मोदी पर प्रचार के लिए पाबंदी खत्म की जानी चाहिए। बल्कि बाद के दिनों में मोदी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार हो उसकी वकालत बिना उसके परिणाम की चिंता किए हुए जमकर किया करते थे।

प्रधानमंत्री मोदी के जेहन में ये बात थी. शायद इसलिए प्रधानमंत्री बनने के बाद जब मोदी ने कैबिनेट में 75 वर्ष से ज्यादा उम्र के नेताओं को शामिल नहीं करने की घोषणा की तो गिरिराज सिंह के मंत्रिमंडल में प्रवेश का मार्ग आसान हो गया।

दरअसल गिरिराज चूँकि बिहार के भूमिहार जाति से आते हैं और उस जाति से दो और दिग्गज डॉ. सीपी ठाकुर और भोला सिंह भी कतार में थे, लेकिन दोनों की उम्र 75 साल से अधिक थी। तो ऐसे में प्रधानमंत्री के इस घोषणा के बाद गिरिराज के प्रवेश को चुनौती देने …

भूमिहार नेताओं ने जीतन राम मांझी पर बोला,लेकिन नीतिश कुमार घाघ की तरह क्यों चुप रहे?

12 नवंबर को वाल्मिकीनगर की सभा में सवर्ण विदेशी वाला जो बयान बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने दिया था उस पर नीतीश ने एक लाइन की सफाई नहीं दी. नीतीश ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें अपना काम करने दीजिए. मांझी के इस बयान को लेकर जेडीयू के भूमिहार व दूसरे सवर्ण विधायकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. अनंत सिंह, सुनील पांडे, नीरज कुमार सिंह, संजय झा जैसे नेता मांझी के खिलाफ खुलकर मीडिया में बोलने लगे हैं . लेकिन मांझी कैबिनेट की शोभा बढ़ा रहे एक भी सवर्ण मंत्री ने एक शब्द कुछ नहीं कहा है.

गिरिराज सिंह के बहाने भूमिहारों को साधने की मोदी की कवायद

बिहार चुनाव होने में अभी तकरीबन एक साल का समय है लेकिन सभी दल जातीय समीकरण बनाने में जुट गए हैं. आगामी चुनाव के मद्देनज़र भूमिहार वोट का भी बिहार की राजनीति में खासा महत्व है और इसी महत्व को समझते हुए एक तरफ जहाँ भूमिहारों को रिझाने के लिए नीतिश कुमार दिल्ली आकर श्रीकृष्ण जयंती समारोह में शिरकत कर रहे हैं तो दूसरी तरफ नहला पर दहला मारते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भूमिहार नेता गिरिराज सिंह को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया.

भूमिहार नेताओं ने खोला बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के खिलाफ मोर्चा

मुख्‍यमंत्री जीतनराम मांझी के खिलाफ जदयू के भूमिहार सांसद व विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। बेतिया में सीएम के दिए गए विवादास्‍पद बयान के बाद मामला तुल पकड़ता जा रहा है। जदयू के भूमिहार सांसद केसी त्‍यागी ने सीएम को संयमित भाषा का इस्‍तेमाल करने की नसीहत दी है। विधायकों ने जहां मांझी के खिलाफ आक्रमक व अपमानजनक भाषा का इस्‍तेमाल किया, वहीं केसी त्‍यागी मर्यादित भाषा का इस्‍तेमाल किया।

Minister of State Shri Giriraj Singh assumes charge of the Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises

The Minister of State Shri Giriraj Singh assumed the charge of the Ministry of Micro, Small & Medium Enterpirses here today.

Welcoming Shri Giriraj Singh, the Union Minister for MSME Shri Kalraj Mishra said that he firmly believed that the Ministry of MSME through its various schemes will motivate and empower the common person. And added that he was confident that the Ministry will greatly benefit from the experience of Shri Giriraj Singh who had been a Minister in the Bihar Government in promoting the programmes of the Ministry.

राज्‍य मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्रालय का प्रभार संभाला

केन्‍द्रीय एमएसएमई मंत्री श्री कलराज मिश्र ने श्री गिरिराज सिंह का स्‍वागत करते हुए कहा कि उनका यह दृढ़ विश्‍वास है कि एमएसएमई मंत्रालय अपनी विभिन्‍न योजनाओं के जरिये आम आदमी को प्रेरित करेगा और सशक्‍त बनायेगा। उन्‍होंने कहा कि मंत्रालय इस तरफ आगे बढ़ रहा है और इसी क्रम में बिहार सरकार में मंत्री रहते हुए अपनी विशिष्‍टता स्‍थापित करने वाले श्री गिरिराज सिंह जी के अनुभव व योग्‍यता का लाभ लिया जायेगा।

गिरिराज सिंह संभल कर,आपके समर्थक कहीं आपकी नाक न कटवा दे

बिहार चुनाव के मद्देनज़र भूमिहार कोटे से गिरिराज सिंह को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिल गयी है. यह गिरिराज सिंह के लिए बड़ी कामयाबी है. कट्टर और ठेठ छवि के बावजूद राज्यमंत्री बन जाना किसी करिश्मे से कम नहीं. और वह भी ऐसे समय में जब आप विरोधियों के खास निशाने पर हो.

लेकिन अब जरूरत है कि गिरिराज सिंह अपने पुराने दायरे से बाहर निकालकर एक विशाल व व्यापक दायरा बनाये और उन समर्थकों के जाल से निकले जो आने वाले दिनों में उनके लिए जी का जंजाल बन सकता है. क्योंकि सोशल मीडिया के ज़माने में आपकी छोटी-से-छोटी बातें भी लीक होकर तुल पकड़ सकती है.

गिरिराज सिंह के राज्यमंत्री बनने पर कांग्रेस में खलबली

गिरिराज सिंह के मोदी मंत्रिमंडल में शामिल मे शामिल होने पर एक ओर भूमिहार समुदाय और तमाम बिहारी खुश हैं वही कांग्रेस को ये बात हजम नहीं हो रही है और वह धर्मनिरपेक्षता का हवाला देकर आक्रमण की मुद्रा में आ गयी है. पढ़िए एबीपी न्यूज़ की एक रिपोर्ट - 
नई दिल्ली: कांग्रेस ने आज नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद के विस्तार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा नेता गिरिराज सिंह को मंत्री बनाकर प्रधानमंत्री ने धर्मनिरपेक्षता को ‘‘करारा तमाचा’’ जड़ा है .
पार्टी ने कहा कि ज्यादा विस्तार तो जाति, भूगोल के आधार पर हुआ न कि प्रतिभा के आधार पर .

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गिरिराज सिंह को मंत्री बनाकर ‘‘मोदी ने धर्मनिरपेक्षता

Giriraj Singh, a fiery leader

PTI New Delhi: Giriraj Singh, who is known for his fiery and at times controversial statements, has found a berth in the Narendra Modi ministry as a representative of Bhumihars, who backed the party in Bihar and felt let down due to lack of representation in the Council of Ministers.

गिरिराज सिंह को सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्योग

ब्रेकिंग न्यूज़ : मोदी मंत्रिमंडल का आज विस्तार हुआ. 21 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गयी.
नए मंत्रियो में भूमिहार जाति से ताल्लुक रखने वाले 'गिरिराज सिंह' को  भी शामिल किया गया.
शपथ ग्रहण समारोह के कुछ घंटों बाद मंत्रियो के विभागों का भी बंटवारा  हो गया.
अभी-अभी आयी सूचना के मुताबिक गिरिराज सिंह को सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय का राज्यमंत्री बनाया गया है.

मोदी के मंत्रीमंडल में भूमिहार नेता गिरिराज सिंह

अच्छी खबर : भूमिहार समुदाय के लिए एक अच्छी खबर है. भूमिहार समाज से ताल्लुक रखने वाले 'गिरिराज सिंह' को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रीमंडल में जगह मिली है और आज उन्होंने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली.  वैसे ये पहले से तय था कि बिहार चुनाव के मद्देनज़र एक भूमिहार चेहरे को मोदी मंत्रीमंडल में निश्चित तौर पर जगह मिलेगी.लेकिन नाम पर सस्पेंस था जो कि आज जाकर खत्म हुआ. गिरिराज सिंह प्रधानमंत्री मोदी के नजदीकी और प्रबल समर्थक माने जाते हैं. नरेंद्र मोदी के सबसे शुरूआती समर्थकों में गिरिराज सिंह को माना जाता है. गिरिराज सिंह को राज्यमंत्री बनने पर भूमिहार मंत्र की तरफ से बधाई. जय परशुराम.