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Showing posts from September, 2010

भूमिहार समाज दलबदलू नेताओं से परेशान

कहावत है कि मेढकों को तराजू में नहीं तौला जा सकता। राजनीति में भी यह कहावत लागू होती है. और बात जब भूमिहार नेताओं की आती है तो यह अक्षरश: साबित होती है. नेताओं में मेढकों की तरह उछल-कूद की प्रवृत्ति से भूमिहार समाज हैरान-परेशान है. ऐसा करने वाले नामों की फेहरिस्त लंबी है. इनमें पूर्व सांसद अरुण कुमार, विधान पार्षद नीरज कुमार, पूर्व मंत्री वीणा शाही, श्यामसुंदर सिंह धीरज, रामजतन सिन्हा, जहानाबाद के सांसद जगदीश शर्मा, लालगंज के विधायक मुन्ना शुक्ला एवं पूर्व सांसद सूरजभान आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं.

ताजा मामला जहानाबाद के पूर्व सांसद अरुण कुमार का है. वह भी नीतीश कुमार का नेतृत्व कबूल करने के लिए तैयार हो गए हैं, जबकि जदयू द्वारा राज्यसभा में भेजे गए उपेंद्र कुशवाहा ने सवर्णों को काफी भला-बुरा कहा था. पटना में आयोजित जगदेव प्रसाद जयंती समारोह में उपेंद्र कुशवाहा ने सरेआम कहा था कि पिछड़े गालियां बर्दाश्त नहीं करेंगे. यदि कोई पिछड़ों को गाली देगा तो उनके हाथ गाली देने वालों की गर्दनों तक पहुंच जाएंगे. अपने राजनीतिक वनवास के समापन को बेचैन अरुण कुमार समाज के अपमान को भूल गए.

परशुराम जी की कहानी एनिमेशन के माध्यम से ....

परशुरामजीपरआधारितएनिमेशनफिल्म. इसमेंपरशुरामजीकेपरशुरामबननेकीकथाकोसंक्षिप्तरूपमेंदिखायागयाहै. वीडियोदेखनेकेलिएरीडमोरकेऑप्शनपरक्लिककरे...