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परशुराम जयन्ती पर निकली भव्य शोभायात्रा

उदयपुर, २६ अप्रेल (कासं)। ब्राह्मणों के आराध्य देव भगवान परशुराम की जयंती पर ब्राह्मण समाज की ओर से शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। रविवार प्रात: फतेह स्कूल प्रांगण में ब्राह्मण समाज के महिला-पुरूष एकत्रित हुए। जहां से प्रात: ८।३० बजे शोभायात्रा रवाना हुई। शोभायात्रा फतह स्कूल से रवाना होकर सूरजपोल, अमल का कांटा, मुखर्जी चौक, बड़ा बाजार, घण्टाघर, मौती चौहट्टा, हाथीपोल, अश्विनी बाजार, देहलीगेट, बापूबाजार, सूरजपोल होते हुए पुन: फतह स्कूल पहुंची। शोभायात्रा में भगवान परशुराम के दो बड़े चित्र, भगवान परशुराम की सजीव झांकी, भगवान राम का दरबार शामिल था तथा अखण्ड रामायण पाठ भी किया जा रहा था। शोभायात्रा में उस्ताद दलपतसिंह राठौड़ के नेतृत्व में ब्राह्मण समाज के सैकड़ों बच्चे अखाड़ा प्रदर्शन कर रहे थे। शोभायात्रा के साथ चल रहे दो बैण्ड धार्मिक भजनों की स्वर लहरियां बिखेरते चल रहे थे। शोभायात्रा में शामिल पुरूषों ने सफेद धोती, कुर्ता, पगड़ी व उपरना धारण कर रखा था तथा महिलाओं ने केशरिया साड़ी पहन रखी थी। शोभायात्रा फतहस्कूल में पहुंच धर्मसभा के रूप में परिवर्तित हो गई। जहां पर ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ लोगों ने भगवान परशुराम के जीवन व्यक्तित्व के बारे में बताया । धर्म सभा के बाद भक्तजनों में प्रसाद वितरण किया गया। परशुराम जयंती पर निकली शोभायात्रा के अन्जुमन पहुंचने पर अन्जुमन कार्यकारिणी तथा अन्जुमन स्कूल स्टाफ द्वारा भव्य स्वागत किया गया। सदर शराफत खान, सचिव फारूख हुसैन, आबिद खान, मोहम्मद हुसैन, हाजी जंगदाद खान, डा. सैयदना खुर्शीद, अन्जुमन प्रधानाध्यापिका अन्जुम खान ने शोभायात्रा में शामिल भक्तों को ठण्डा पानी पिलाकर स्वागत किया। सूक्ष्म पुस्तिका निर्माता चन्दप्रकाश चित्तौड़ा द्वारा भगवान परशुराम जयंती पर बनाई गई सूक्ष्म परशुराम पुस्तिका का विमोचन महंत मुरलीमनोहर शरण शास्त्री ने किया। मेवाड़ पालीवाल ब्राह्मण सामूहिक विवाह समिति द्वारा परशुराम जयंती पर पालीवाल ब्राह्मणों का अधिवेशन सोमवार को बोहरा गणेशजी चौराहे पर िस्थत गणपति वाटिका में आयोजित होगा। प्रेमलता पालीवाल ने बताया कि अधिवेशन में सामूहिक विवाह के प्रति नकारात्मक सोच पर चिंतन एवं मनन किया जाएगा।

साभार - प्रात काल

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सभी 34 लोगों की हत्या गला रेत कर गाँव के मंदिर के द्वार पर की गयी थी. तब से आज तक उस मंदिर के द्वार बंद हैं. गांव के लोगों ने इस मंदिर में पूजा पाठ करना बंद कर दिया है. 
ग्रामीणों के मुताबिक भगवान के द्वार पर लोगों की हत्या कर दी गई है. लिहाजा मंदिर में पूजा करने का क्या फायदा ? अब पिछले 17 सालों में यह मंदिर वीरान पड़ा हुआ है.