Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2009

धनुर्विद्या के गुरु थे परशुराम

भिलाई। हाल ही में महेंद्रगिरी के पर्वत पर एक धनुष मिला था। उस धनुष का वजन नब्बे किलो था। किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि ये धनुष किसका। वो कौन होगा जो नब्बे किलो का धनुष अपने कंधे पर लेकर चलता होगा।
पौराणिक कथा में वर्णित है कि महेंद्रगिरी पर्वत भगवान परशुराम की तप की जगह थी। इसलिए बात सहज गले से उतरने लगी कि शायद धनुष परशुराम का ही होगा।
परशुराम इस धरती पर ऐसे महापुरुष हुए हैं जिनकी धनुर्विद्या की कोई पौराणिक मिसाल नहीं है। पितामह भीष्म, द्रोणाचार्य और खुद कर्ण ने भी परशुराम से ही धनुर्विद्या की शिक्षा ली थी। बेशक इस मामले में कर्ण थोड़े अभागे रहे थे। क्योंकि अंत में परशुराम ने उनसे ब्रह्मास्त्र ज्ञान वापस ले लिया था।
महाभारत के मुताबिक अर्जुन धनुर्विद्या में प्रखर थे। अर्जुन साधना के बल पर पानी में देखकर घूमती हुई मछली की आंख को वेध दिया था।
शास्त्रों के अनुसार चार वेद हैं और तरह चार उपवेद हैं। इन उपवेदों में पहला आयुर्वेद है। दूसरा शिल्प वेद है। तीसरा गंधर्व वेद और चौथा धनुर्वेद है। इस धनुर्वेद में धनुर्विद्या का सारा रहस्य मौजूद है। ये अलग बात है कि अब ये धनुर्वेद अपने मूल स्वरु…

परशुराम पुस्तक का विमोचन

भगवान श्री परशुराम सर्वब्राह्म समाज समिति एवं सुखवाल समाज के तत्वावधान में निम्बार्क महाविद्यालय के सभागार में भगवान परशुराम की पुस्तक का विमोचन भानुकुमार शास्त्री ने किया। समिति के गजेन्द्र चौबीसा ने बताया कि भगवान परशुराम की पुस्तक प. श्याम सुन्दर भट्ट ने लिखी है। कार्यक्रम में भंवर लाल शर्मा, अरूण जोशी, हेमशंकर दीक्षित, गोटूलाल जोशी, धुलचंद पालीवाल सहित अन्य उपस्थित थे। संचालन यज्ञनारायण शर्मा ने तथा धन्यवाद पदम कुमार शर्मा ने ज्ञापित किया।

मात्रिहत्या के पश्चाताप के लिए निरमंड आये थे परशुराम

हिमाचल प्रदेश की सुरमई वादियों में यूं तो कदम-कदम पर देवस्थल मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कुछ एक ऐसे भी हैं जो अपने में अनूठी गाथाएँ और रहस्य समेटे हुए हैं. ऐसा ही एक मंदिर है निरमंड का परशुराम मंदिर. यह मंदिर शिमला से करीब 150 किलोमीटर दूर रामपुर बुशहर के पास स्थित निरमंड गाँव में है. मान्यता है कि भगवान् परशुराम ने यहाँ अपनी जिन्दगी के अहम् वर्ष गुजारे थे. किवदंतियों के अनुसार ऋषि जमदग्नि हिमाचल के वर्तमान सिरमौर जिला के समीप जंगलों में तपस्या किया करते थे. उनकी पत्नी और परशुराम की माता रेणुका भी आश्रम में उनके साथ रहती थीं. ऋषि जमदग्नि को नित्य पूजा के लिए यमुना के जल की जरूरत होती थी. यह जिम्मेदारी रेणुका पर थी. रेणुका अपने तपोबल से रोज ताज़ा रेत का घडा बनाकर उसे सांप के कुंडल पर धर कर आश्रम लाया करती थीं. लेकिन एक दिन रस्ते में गन्धर्व जोड़े की क्रीडा देख लेने के कारण उनका ध्यान भंग हो गया और नतीजा यह निकला की तपोबल क्षीण होने के कारण उस दिन न तो रेत का घडा बन पाया और न ही सांप आया. इस कारण जमदग्नि की पूजा में विघ्न आ गया. ऋषि इस से इतना व्यथित हुए की क्रोधावेश में आकर उन्होंने अपने ज…

हर्षोल्लास से मनाई परशुराम जयंती

शोभायात्रा निकालीराजसमन्द, 26 अप्रेल (प्रासं)।
समस्त ब्राह्मण समुदाय राजसमन्द के तत्वावधान में रविवार को भगवान परशुराम जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम संयोजक जगदीश पालीवाल ने बताया कि समस्त ब्राह्मण समुदाय की ओर से भगवान परशुराम की शोभायात्रा प्रभु द्वारकाधीश मंदिर प्रांगण से प्रात: साढे सात बजे प्रारंभ हुई। शोभायात्रा में महिलाएं केसरिया चुन्दडी व पीलिया पोशाकों में मंगल कलश लिए चल रही थी। वहीं शोभायात्रा में ढोल नगाडे बैण्ड बाजे भक्ति गीतों की मधुर स्वर लहरियां बिखेर रहे थे। शोभायात्रा में झांकियों में शिव-पार्वती-गणेश, श्रीराम, लक्ष्मण,सीता, हनुमान, कृष्ण, सुदामा भजन मंडली सप्त ऋषि झांेिकयों के रूप में ऊंट गाडियों पर बिराजित थे साथ ही भगवान परशुराम महादेव की झांकी विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। शोभायात्रा द्वारकाधीश मंदिर से बडा दरवाजा, नया बाजार, बस स्टेण्ड, मुख्य चौपाटी, जेके मोड होती हुई वि_ल विलास बाग पहुंच धर्मसभा में परिवर्तित हुई। शोभायात्रा के दौरान मार्ग में जगह जगह शहरवासियों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान हजारों लोग उपस्थित थे। पालीवाल ने बताया कि शोभाया…

आकर्षक झांकियों ने मनमोहा

आकर्षक झांकियों ने मनमोहा
Apr 26, 01:40 am
पानीपत, जागरण संवाद केंद्र : सर्व ब्राह्मण मित्र मंडल के तत्वावधान में शनिवार को भगवान परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में शोभायात्रा बड़ी धूमधाम से निकाली गई। आकर्षक झांकियों और बैंड बाजों की मधुर धुनों ने शोभायात्रा की शोभा और बढ़ा दी।
इससे पहले अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष सुरेश वशिष्ठ शोभायात्रा की शुरूआत के मौके पर बतौर मुख्यातिथि पहुंचे। ब्राह्मण मित्र मंडल के सभी सदस्यों ने उनका जोरदार स्वागत किया। सुरेद्र शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। शोभायात्रा की शुरूआत शाम 6 बजे के लगभग श्री जगन्नाथ मंदिर से हुई। जगन्नाथ मंदिर से अमरभवन चौक, गुड़ मंडी, कलंदर चौक, वीरभवन चौक, परमहंस कुटिया, मेन बाजार और सुभाष बाजार से होती हुई गॉड ब्राह्मण धर्मशाला पहुंची। शोभायात्रा में भगवान परशुराम की आकर्षक झांकियां, श्री रामदरबार, शिव परिवार ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पंजाब का भंगड़ा, शामली, करनाल और पानीपत की बैंड टीमों ने स्वर-लहरी से समां बांध दिया। मंडल के प्रधान रवींद्र शर्मा ने बताया कि सर्व ब्राह्मण मित्र मंडल के तत्वावधान में भगवान परशुराम जयंत…

परशुराम जयन्ती पर निकली भव्य शोभायात्रा

उदयपुर, २६ अप्रेल (कासं)। ब्राह्मणों के आराध्य देव भगवान परशुराम की जयंती पर ब्राह्मण समाज की ओर से शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। रविवार प्रात: फतेह स्कूल प्रांगण में ब्राह्मण समाज के महिला-पुरूष एकत्रित हुए। जहां से प्रात: ८।३० बजे शोभायात्रा रवाना हुई। शोभायात्रा फतह स्कूल से रवाना होकर सूरजपोल, अमल का कांटा, मुखर्जी चौक, बड़ा बाजार, घण्टाघर, मौती चौहट्टा, हाथीपोल, अश्विनी बाजार, देहलीगेट, बापूबाजार, सूरजपोल होते हुए पुन: फतह स्कूल पहुंची। शोभायात्रा में भगवान परशुराम के दो बड़े चित्र, भगवान परशुराम की सजीव झांकी, भगवान राम का दरबार शामिल था तथा अखण्ड रामायण पाठ भी किया जा रहा था। शोभायात्रा में उस्ताद दलपतसिंह राठौड़ के नेतृत्व में ब्राह्मण समाज के सैकड़ों बच्चे अखाड़ा प्रदर्शन कर रहे थे। शोभायात्रा के साथ चल रहे दो बैण्ड धार्मिक भजनों की स्वर लहरियां बिखेरते चल रहे थे। शोभायात्रा में शामिल पुरूषों ने सफेद धोती, कुर्ता, पगड़ी व उपरना धारण कर रखा था तथा महिलाओं ने केशरिया साड़ी पहन रखी थी। शोभायात्रा फतहस्कूल में पहुंच धर्मसभा के रूप में परिवर्तित हो गई। जहां पर ब्राह्मण समाज …

Six myths about Indian elections

COURTSY : BBC
Do women in India vote according to the wishes of their husbands? Do Muslims vote as a community? Political scientist Yogendra Yadav examines six myths surrounding the Indian elections.

Women voters outnumber men in many states
A myth is a story or trend that a culture believes to be true. But it has also taken on the meaning of a popular conception that may have become exaggerated if not downright false.
The reason why there is so much myth making around politics and elections in India is partly because Indians are passionate about politics.
It is also because there is very little hard evidence on political behaviour. When it comes to politics, anything goes.
Here are the six most popular myths about Indian politics and elections:

WOMEN VOTE ACCORDING TO THE WISHES OF THEIR HUSBANDS
It is true that in India, like many democracies, the levels of interest and involvement of women in politics is lower than that of men.
Obviously, if you are less interested in something, you tend yo…